Borderline Personality Disorder Explained In Hindi: आजकल लोगों में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन कई बार हम इनके लक्षणों को समझ ही नहीं पाते। ऐसा ही एक गंभीर मानसिक विकार है बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर यानी BPD। इस बीमारी में इंसान की भावनाएं, सोच और रिश्ते बहुत अस्थिर हो जाते हैं। छोटी-सी बात पर गुस्सा, गहरी उदासी, खालीपन का एहसास या अचानक फैसले लेना - ये सब इसके संकेत हो सकते हैं। हाल ही में सामने आई एक स्टडी में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि करीब 50 से 55 प्रतिशत BPD मरीजों में अल्कोहल यूज डिसऑर्डर भी पाया जाता है। यानी आधे से ज्यादा मरीज शराब की लत से भी जूझ रहे होते हैं। इस बीमारी को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने बात की यशोदा अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. नवीन कुमार धागुडु और अमृता अस्पताल के सीनियर फिजियोलॉजिस्ट डॉ. राकेश के. चड्ढा से बात की। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं....
क्या होता है बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर?
बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जिसमें व्यक्ति की भावनाएं बेहद तेजी से बदलती हैं। कभी बहुत ज्यादा खुश तो कभी बेहद निराश। रिश्तों में अस्थिरता, खुद की छवि को लेकर भ्रम और बार-बार आत्मघाती विचार आना इसके मुख्य लक्षण माने जाते हैं।
डॉ. राकेश के. चड्ढा बताते हैं कि BPD में मरीज अक्सर इमोशनल पेन को संभाल नहीं पाते। उन्हें खालीपन महसूस होता है और वे खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे कदम भी उठा सकते हैं। यह समस्या आम तनाव से अलग होती है और इसके लिए प्रोफेशनल इलाज जरूरी है।
50-55% मरीजों में क्यों दिखती है शराब की लत?
हालिया अध्ययन में पाया गया कि लगभग 50 से 55 प्रतिशत BPD मरीजों में अल्कोहल यूज डिसऑर्डर भी मौजूद होता है। यानी हर दो में से एक मरीज शराब पर निर्भर हो सकता है।
डॉ. नवीन कुमार धागुडु के अनुसार, BPD से जूझ रहे लोग अक्सर अपनी तीव्र भावनाओं को शांत करने के लिए शराब का सहारा लेते हैं। उन्हें लगता है कि शराब कुछ समय के लिए दर्द और बेचैनी कम कर देगी। लेकिन यह राहत अस्थायी होती है और धीरे-धीरे लत में बदल जाती है।
शराब की लत कैसे लग जाती है
BPD और अल्कोहल का कनेक्शन कैसे काम करता है?
जब कोई व्यक्ति लगातार भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरता है, तो वह तुरंत राहत पाने के तरीके खोजता है। शराब दिमाग में डोपामिन जैसे केमिकल्स को प्रभावित करती है, जिससे कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है।
लेकिन डॉ. नवीन कुमार धागुडु बताते हैं कि लंबे समय में शराब दिमाग की केमिस्ट्री को और बिगाड़ देती है। इससे डिप्रेशन, एंग्जायटी और इम्पल्सिव बिहेवियर और ज्यादा बढ़ सकता है। यानी BPD के लक्षण और गंभीर हो जाते हैं।
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति में बार-बार मूड बदलना, गुस्से के तेज दौरे, रिश्तों में अस्थिरता, खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति या अत्यधिक शराब सेवन जैसी आदत दिखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. राकेश के. चड्ढा कहते हैं कि समय पर पहचान और इलाज से स्थिति को काफी हद तक संभाला जा सकता है। साइकोथेरेपी, खासकर डायलैक्टिकल बिहेवियर थेरेपी, BPD के इलाज में प्रभावी मानी जाती है। वहीं शराब की लत के लिए काउंसलिंग और मेडिकल सपोर्ट जरूरी होता है।
इससे कैसे बचा जा सकता है
इलाज और सपोर्ट क्यों है जरूरी?
BPD और अल्कोहल यूज डिसऑर्डर दोनों ही ऐसी स्थितियां हैं जिनमें पेशेवर मदद बेहद जरूरी है। केवल इच्छा शक्ति से इन्हें कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है।
डॉ. राकेश के. चड्ढा बताते हैं कि परिवार का सपोर्ट, नियमित काउंसलिंग और डॉक्टर की निगरानी में दवा उपचार काफी मददगार हो सकता है। सबसे जरूरी है कि मरीज को जज न किया जाए, बल्कि समझा जाए।
डॉ. नवीन कुमार धागुडु भी मानते हैं कि सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितनी हम शारीरिक बीमारियों को देते हैं।
आखिर में यह समझना जरूरी है कि बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है। और अगर इसके साथ शराब की लत जुड़ जाए तो स्थिति और जटिल हो सकती है। इसलिए लक्षण दिखें तो देर न करें, विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
Expert Views By: डॉ. नवीन कुमार धागुडु, यशोदा हॉस्पिटल हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट मनोचिकित्सक हैं। उनके पास इस क्षेत्र में 20 साल से अधिक अनुभव है। वहीं, डॉ. राकेश के. चड्ढा, अमृता अस्पताल फरीदाबाद में फिजियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख हैं। उनको इस फील्ड में लगभग 20 साल का अनुभव है।
