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क्या AQI से नहीं होती फेफड़ों की बीमारी, पर्यावरण राज्य मंत्री ने क्यों कही ये बात, डॉक्टर से जानें सच

Does Air Quality Index AQI Not Cause Lung Diseases: हाल ही में राज्यसभा में पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दिल्ली में प्रदूषण और फेफड़ों की बीमारी को लेकर अपने लिखित जवाब में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते AQI और फेफड़ों की बीमारियों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। पर्यावरण राज्य मंत्री के बयान ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चलिए डॉक्टर से इस विषय पर विस्तार से जानते हैं...

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क्या AQI से नहीं होती फेफड़ों की बीमारी (PC - AI)

Does Air Quality Index AQI Not Cause Lung Diseases: दिल्ली-एनसीआर में जैसे ही AQI का स्तर बढ़ता है, लोगों की सांसें अपने आप भारी होने लगती हैं। आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी अब आम बात हो गई है। ऐसे में जब पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह की तरफ से यह कहा गया कि AQI और फेफड़ों की बीमारी के बीच सीधा संबंध नहीं है, तो लोग हैरान रह गए। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक इसी बात की चर्चा होने लगी। आखिर सरकार ऐसा क्यों कह रही है और डॉक्टर इस पर क्या कहते हैं, चलिए विस्तार से जानते हैं।

AQI को लेकर पर्यावरण राज्य मंत्री ने क्या कहा

पर्यावरण राज्य मंत्री का कहना है कि सिर्फ AQI के आंकड़ों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि फेफड़ों की बीमारी सीधे उसी वजह से हो रही है। उनके मुताबिक वायु प्रदूषण एक फैक्टर जरूर है, लेकिन बीमारी के पीछे जीवनशैली, धूम्रपान, पहले से मौजूद बीमारी और काम करने का माहौल जैसे कई कारण होते हैं। सरकार का तर्क है कि हर सांस की बीमारी को केवल AQI से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

बयान के बाद क्यों बढ़ा लोगों का कन्फ्यूजन

आम लोगों के लिए यह बात पचाना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि जब AQI बढ़ता है तो अस्पतालों में सांस के मरीज भी बढ़ जाते हैं। लोग रोज अपने आसपास इसके असर देख रहे हैं। ऐसे में मंत्री का बयान लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या उनकी तकलीफ सिर्फ महसूस करने की बात है या इसके पीछे सच में कोई और वजह भी है।

डॉक्टर AQI और फेफड़ों के रिश्ते को कैसे देखते हैं

मैक्स अस्पताल से जुड़ी डॉक्टर शारदा जोशी कहती हैं कि AQI और फेफड़ों की बीमारी के बीच संबंध को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक खराब हवा सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में। हालांकि डॉक्टर यह भी मानते हैं कि हर मरीज की बीमारी सिर्फ AQI की वजह से हो, यह कहना भी सही नहीं होगा।

वैज्ञानिक नजरिए से क्या कहती है रिसर्च

वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और COPD जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च यह भी बताती है कि AQI जितना ज्यादा खराब होता है, उतना ही शरीर पर उसका असर गहराता है। यानी AQI अकेला कारण नहीं, लेकिन एक बड़ा ट्रिगर जरूर है।

आम लोगों के लिए क्या समझना जरूरी है

इस पूरे विवाद से एक बात साफ होती है कि हमें बयानबाजी से ज्यादा अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहिए। अगर हवा खराब है तो मास्क पहनना, बाहर की गतिविधियां सीमित करना और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। AQI को हल्के में लेना या पूरी तरह नजरअंदाज करना, दोनों ही सेहत के लिए सही नहीं हैं। सच यही है कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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