Monsoon Fungal Infection on Foot: बारिश में भीगने के बाद घर पहुंचकर कपड़े तो बदल लिए, लेकिन जूते अगले दिन फिर पहन लिए। पैरों की उंगलियों के बीच की नमी पर भी ध्यान नहीं गया। कुछ दिनों बाद वहीं खुजली शुरू हुई। फिर त्वचा सफेद पड़ने लगी या छोटे-छोटे कट दिखाई देने लगे। मानसून में यह परेशानी बहुत आम है और इसी को मानसून में फंगल इंफेक्शन कहते हैं।
वैसे बारिश का पानी सीधे तौर पर फंगल इंफेक्शन की इकलौती वजह नहीं है। असली समस्या पैरों में लगातार बनी रहने वाली नमी है। हवा में अधिक उमस, पसीना, गीले कपड़े और देर तक बंद जूते पहनना मिलकर फंगस को बढ़ाते हैं।
बारिश में फंगल इंफेक्शन क्यों बढ़ जाता है
पारस हेल्थ के सीनियर डायरेक्टर और इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. संदीप भटनागर बताते हैं कि मानसून में मौसम में पूरी तरह ठंडा नहीं होता। ऐसे में गर्म तापमान के साथ हवा में नमी बढ़ जाती है। यदि त्वचा भी लंबे समय तक गीली या पसीने से नम रहे तो फंगस पनप सकती है।
बारिश में बाहर से देखने पर जूते सूखे लग सकते हैं, लेकिन उनके भीतर नमी बनी रहती है। उसी जूते को लगातार पहनने से पैर को हवा नहीं मिलती। मोजे भी पसीना सोखकर नम बने रहते हैं। यही वजह है कि उंगलियों के बीच फंगल इंफेक्शन यानी एथलीट फुट होने का खतरा बढ़ सकता है।
केवल पैर ही नहीं, इन हिस्सों पर भी रहता है खतरा
फंगल इंफेक्शन शरीर के उन हिस्सों में अधिक हो सकता है जहां पसीना और नमी देर तक रुकी रहती है। इनमें ये अंग शामिल हैं:
- पैरों की उंगलियों के बीच
- जांघों और कमर के आसपास
- बगल में
- स्तनों के नीचे
- पेट की सिलवटों में
- गर्दन की सिलवटों में
- लंबे समय तक गीले कपड़ों से ढकी त्वचा पर
अधिक वजन वाले लोगों में त्वचा की सिलवटों के बीच हवा कम पहुंच पाती है। डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को भी त्वचा और पैरों में होने वाले बदलावों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
फंगल इंफेक्शन के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें
डॉ. संदीप भटनागर का कहना है कि हर खुजली फंगल इंफेक्शन नहीं होती। एलर्जी, एक्जिमा और बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण भी कई बार इससे मिलते-जुलते दिखाई दे सकते हैं। फिर भी इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
| त्वचा पर दिखाई देने वाला बदलाव | संभावित संकेत |
|---|---|
| लगातार खुजली और लालिमा | त्वचा में संक्रमण या जलन |
| गोल या फैलता हुआ चकत्ता | रिंगवर्म यानी दाद की आशंका |
| उंगलियों के बीच सफेद, नम त्वचा | एथलीट फुट का संकेत |
| त्वचा पर पपड़ी या छिलना | फंगल ग्रोथ या अधिक नमी |
| एड़ी या उंगलियों के बीच दरारें | संक्रमण बढ़ने का संकेत |
| जलन, दुर्गंध या दर्द | डॉक्टर से जांच कराने की जरूरत |
रिंगवर्म, एथलीट फुट और जॉक इच एक ही समूह के फंगस से होने वाले अलग-अलग तरह के संक्रमण हैं। ये संक्रमित व्यक्ति, साझा तौलिये या नम सतहों के संपर्क से भी फैल सकते हैं। CDC भी सही पहचान के लिए जांच को महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि कई दूसरी त्वचा संबंधी परेशानियां फंगल इंफेक्शन जैसी दिख सकती हैं।
मानसून में पैरों को कैसे सुरक्षित रखें
डॉ. भटनागर के अनुसार बचाव का सबसे जरूरी नियम त्वचा को साफ और सूखा रखना है। इसके लिए महंगे प्रोडक्ट की नहीं, कुछ नियमित आदतों की जरूरत है।
- बाहर से आने के बाद पैर धोकर अच्छी तरह सुखाएं।
- उंगलियों के बीच तौलिये से नमी जरूर हटाएं।
- गीले या पसीने वाले मोजे तुरंत बदलें।
- एक ही जूता रोज पहनने से बचें।
- जूतों को पूरी तरह सूखने और हवा लगने दें।
- संभव हो तो हवा पास करने वाले फुटवियर चुनें।
- किसी दूसरे व्यक्ति के जूते, मोजे या तौलिये इस्तेमाल न करें।
- भीगे कपड़ों में देर तक न बैठें।
- नहाने के बाद त्वचा की सिलवटों को अच्छी तरह सुखाएं।
- सार्वजनिक शॉवर या चेंजिंग रूम में नंगे पैर न चलें।
CDC भी पैर रोज धोने, उन्हें पूरी तरह सुखाने और कम से कम दिन में एक बार मोजे बदलने की सलाह देता है।
खुजली होते ही कोई भी क्रीम लगाना क्यों ठीक नहीं
दवा की दुकान से बिना सलाह ली गई क्रीम लगाने पर कई बार खुजली कुछ दिनों के लिए दब जाती है। इससे ऐसा लगता है कि संक्रमण ठीक हो रहा है, जबकि वह त्वचा के भीतर फैलता रह सकता है। खासकर गलत या अनुपयुक्त क्रीम लक्षणों को बदल सकती है, जिससे बाद में सही पहचान और इलाज मुश्किल हो जाता है।
इसलिए बार-बार लौटने वाले, तेजी से फैलने वाले या दर्द और दरारों के साथ होने वाले इंफेक्शन में त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। डायबिटीज वाले व्यक्ति के पैर में घाव, सूजन, पस या रंग बदलना दिखाई दे तो इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
मानसून में फंगल इंफेक्शन से बचने का सबसे प्रभावी तरीका बेहद साधारण है कि त्वचा को नमी में बंद न रहने दें। गीले जूते बदलना, उंगलियों के बीच पैर सुखाना और अलग तौलिया इस्तेमाल करना छोटी बातें लग सकती हैं, लेकिन यही आदतें कई हफ्तों की खुजली और परेशानी से बचा सकती हैं।
