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8 घंटे सोने के बाद भी दिमाग थका-थका क्यों लगता है? डॉक्टर से जानिए Mental Fatigue का कारण

पूरी नींद लेने के बाद भी अगर दिमाग थका और ध्यान कमजोर महसूस हो, तो इसकी वजह मानसिक थकान हो सकती है। लगातार स्क्रीन, ज्यादा सोचने, फैसले लेने और खराब नींद से मेंटल फैटिग बढ़ सकती है।

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Mental Fatigue क्या और क्यों होता है

Mental Fatigue: सुबह उठे, रात में सात-आठ घंटे सोए और फिर भी ऐसा लगे कि दिमाग ने रातभर आराम ही नहीं किया। काम शुरू करते ही ध्यान भटकने लगे, छोटी-छोटी चीजों पर सोचने में ज्यादा मेहनत लगे और लगातार स्क्रीन देखने के बाद सिर मेंटरल रूप से बोझिल महसूस हो। अगर ऐसा कभी-कभार होता है, तो जरूरी नहीं कि यह नींद की कमी का संकेत हो। कई बार शरीर को आराम मिल जाता है, लेकिन दिमाग लगातार काम करने की वजह से थका हुआ महसूस करता है। इसे मानसिक थकान यानी मेंटल फैटिग कहा जाता है।

न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र श्रीवास्तव, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, ShardaCare-HealthCity, के अनुसार लंबे समय तक ध्यान, जानकारी समझने, फैसले लेने और लगातार मानसिक काम करने से दिमाग की कार्यक्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। यानी समस्या हमेशा यह नहीं होती कि आपने कम सोया है, कभी-कभी दिमाग को कम बोझ की भी जरूरत होती है।

नींद पूरी फिर भी दिमाग थका क्यों?

मानसिक थकान और नींद आने में अंतर है। नींद आने पर शरीर सोने का संकेत देता है, जबकि मानसिक थकान में दिमाग लंबे समय तक ध्यान बनाए रखने और जानकारी को प्रभावी ढंग से संभालने में मुश्किल महसूस कर सकता है।

दिमाग का एक हिस्सा, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, ध्यान, याददाश्त, योजना बनाने और निर्णय लेने जैसे कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लगातार मानसिक दबाव रहने पर इन कामों की क्षमता कुछ समय के लिए कम हो सकती है।

हर फैसला भी लेता है मेंटल एनर्जी

दिन में सिर्फ बड़े फैसले ही दिमाग पर असर नहीं डालते। क्या जवाब देना है, किस काम को पहले करना है, किस संदेश को देखना है और किस काम को टालना है, छोटे-छोटे फैसले भी मानसिक मेहनत मांगते हैं। लगातार निर्णय लेने से दिमाग पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

आठ घंटे बिस्तर पर रहना ही काफी नहीं, सात-आठ घंटे बिस्तर पर रहने का मतलब यह नहीं कि नींद उतनी ही आराम देने वाली थी। नींद के दौरान बार-बार छोटी रुकावटें आने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सुबह उठने के बाद भी मानसिक थकान महसूस हो सकती है।

कब इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लंबे समय तक ध्यान लगाने में परेशानी, दिन में बहुत ज्यादा नींद, प्रेरणा की कमी या सोचने की गति धीमी रहने जैसी समस्याएं बनी रहें, तो इसकी दूसरी वजहों पर भी ध्यान देना जरूरी है। नींद की खराब गुणवत्ता, कुछ दवाओं का असर, मूड से जुड़ी समस्याएं, पोषक तत्वों की कमी और थायरॉइड से जुड़ी दिक्कतें भी भूमिका निभा सकती हैं।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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