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वाह सरकार! न जाने का रास्ता, न बिजली; 30 लाख खर्च कर खेत के बीच खड़ी कर दी स्कूल बिल्डिंग

Munger News: बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। खेतों के बीच करीब 30 लाख की लागत से स्कूल भवन तो बना दिया गया, लेकिन रास्ता न होने से पिछले एक साल से ताला लटका है।

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रास्ता न होने से बंद पड़ा विद्यालय

Photo : Times Now Digital

Munger News: बिहार में एक तरफ जहां सैकड़ों सरकारी स्कूल भवनों की कमी के कारण झोपड़ियों या सामुदायिक भवनों में चलने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ मुंगेर जिले से सरकारी धन के दुरुपयोग और लापरवाही की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। मुंगेर के हवेली खड़गपुर प्रखंड स्थित नया टोला प्रसंडो गांव में शिक्षा विभाग ने करीब 30 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से दो मंजिला स्कूल भवन बनाकर तैयार कर दिया है। लेकिन विडंबना यह है कि खेतों के बीच बनी इस शानदार इमारत तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। नतीजा यह है कि पिछले एक साल से यह नया भवन ताले में बंद है और अब यह बच्चों के पढ़ने की जगह मवेशियों का तबेला बनता जा रहा है।

करोड़ों के बजट से बनी इमारत में दरारें और गोबर का अंबार

खेतों के बीच बना यह दो मंजिला भवन अब देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगा है। भवन में तीन बड़े हॉल और एक कार्यालय तो बना दिया गया, लेकिन पेयजल के लिए लगी बोरिंग उखड़ चुकी है। भवन की दीवारों में अभी से दरारें आने लगी हैं। परिसर में जगह-जगह कचरे और गोबर का अंबार लगा हुआ है, जिससे यह स्कूल कम और मवेशियों का बाड़ा ज्यादा नजर आता है।

'अधिकारियों के दबाव में कराया गया हैंडओवर': प्रधानाचार्य का आरोप

प्राइमरी स्कूल के प्रधानाचार्य नीरज कुमार निराला ने अपने ही विभाग के उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भवन पूरी तरह अधूरा है और यहां तक पहुंचने का न तो रास्ता है और न ही बिजली का कनेक्शन।

प्रधानाचार्य नीरज कुमार निराला ने कहा कि तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और हवेली खड़गपुर की तत्कालीन प्रभारी प्रखंड शिक्षा अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रियंका कुमारी द्वारा मुझ पर भारी दबाव बनाकर इस अधूरे भवन को हैंडओवर कराया गया जबकि भवन में बहुत से काम होना बाकी थे। इसमें ना बिजली पहुंची है और ना ही जाने का रास्ता है। मजबूरी में करीब 100 नामांकित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई आज भी गांव के एक सामुदायिक भवन में करानी पड़ रही है।

Munger govt school

खेत में बने स्कूल में पगडंडियों के सहारे जाते लोग

ग्रामीणों में दिखी नाराजगी

गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी कीमती और महंगी जमीन सरकार को दान में दी थी। लेकिन स्थानीय नेताओं की ठेकेदारी और अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूल को जैसे-तैसे खेतों के बीच खड़ा कर दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की बात सुनने के बजाय स्थानीय नेताओं की जी-हजूरी में लगे रहे, जिसकी वजह से रास्ते का विवाद हल नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग का रवैया सकारात्मक होता तो गांव वाले मिलकर रास्ते की समस्या सुलझा लेते, लेकिन अधिकारियों ने हम लोगों की कम, नेताओं की ज्यादा सुनते हैं और यही वजह है कि रास्ते का मामला अटका हुआ है।

Saket kumar
साकेत कुमारauthor

साकेत कुमार के पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 18 वर्षों का लंबा अनुभव है। वर्तमान में वह Times Now Navbharat के पटना ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं और बिहार की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और ग्राउंड रिपोर्टिंग में गहरी पकड़ रखते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण खबरों को कवर किया है और निष्पक्ष, तथ्यपरक और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। साकेट की रिपोर्टिंग में जमीनी हकीकत, गहन रिसर्च और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने की प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है।

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