Cutting Sugar Early In Life May Lower Risk Of Heart Diseases: हम रोज-रोज सुनते हैं कि 'कम चीनी खाओ, सेहत बनाए रखो', लेकिन अब एक बड़ी वैज्ञानिक स्टडी ने इसे और भी ज्यादा गंभीर अंदाज से पेश किया है। नई रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर हम जन्म से पहले और जीवन के पहले दो सालों में चीनी की मात्रा कम रखें, तो भविष्य में दिल की बीमारी का खतरा काफी हद तक घट सकता है। यानी सिर्फ बचपन तक का मसला नहीं, बल्कि आज की आदतें आपके दिल को कई साल बाद भी प्रभावित कर सकती हैं। इस आर्टिकल में हम सरल भाषा में चर्चा करेंगे कि यह स्टडी क्या कहती है, इसके मायने क्या हैं, और हम आज किस तरह शुरुआत कर सकते हैं।
शुरुआती जीवन में चीनी कम करना
इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने BMJ में प्रकाशित विश्लेषण का उपयोग किया, जिसमें देखा गया कि जिन लोगों को गर्भावस्था से लेकर दो साल की उम्र तक चीनी की कम खपत मिली थी, उनमें बाद में हृदय-रोग (कॉरनरी हार्ट डिजीज) का जोखिम कम पाया गया। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहला 1000 दिन (गर्भ में विकास से लेकर दो साल तक) स्वास्थ्य की नींव तय करते हैं।
कितनी कमी मिली और असर कितना हुआ?
स्टडी के अनुसार, अगर जन्म से पहले और शुरुआती जीवन में चीनी कम थी, तो हृदय-रोग के जोखिम में लगभग 20 % तक की कमी देखी गई। साथ ही दिल का दौरा (हार्ट अटैक), हार्ट फेल्योर, अतालता (एट्रियल फिब्रिलेशन) और स्ट्रोक जैसी स्थितियों में भी गिरावट मिली। उदाहरण के लिए- हार्ट हमला में करीब 25 % कमी, स्ट्रोक में 31 % कमी।
इस कमी का मकसद क्या था?
यह स्टडी एक तरह से “प्राकृतिक प्रयोग” थी- युद्ध के बाद UK में चीनी राशनिंग खत्म होने के बाद के आंकड़े देखे गए। शोधकर्ताओं का कहना है कि चीनी की कम मात्रा के कारण डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों का जोखिम भी कम हुआ, जिससे हृदय-रोग का जोखिम आगे चलकर घट गया।
इसका क्या मतलब है?
आज के समय में ज्यादातर लोग, बच्चे और मां-गर्भवती महिलाएं, चीनी-युक्त फूड, ड्रिंक्स और स्नैक्स की ओर अधिक रुख करती हैं। इस स्टडी से यह साफ हुआ कि आजही से चीनी पर ध्यान देना जरूरी है। मतलब यह नहीं कि मिठाई पूरी तरह बंद करनी है, बल्कि 'अतिरिक्त चीनी', 'प्रोसेस्ड मीठा' कम करना है। ऐसा करना सिर्फ बचपन के लिए नहीं, बल्कि जीवन भर के दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है।
शुरुआत कैसे करें
अगर आपको यह लग रहा है कि “बहुत बाद में सोचा”, तो अभी शुरुआत करनी बेहत सही है। आज-उम्र में छोटे-छोटे बदलाव बहुत मायने रखते हैं। जैसे- मीठे ड्रिंक्स (सोडा, जूस) की जगह पानी या फलों का चुनाव, नाश्ते-टिफिन में कम शुगरी स्नैक व् फल-सेब डालना। बच्चों के खाने-पिने में अतिरिक्त चीनी वाले खाद्य कम करना। माँ बनने वाली महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चीनी-युक्त चीजों पर थोड़ा नियंत्रण रखें। ऐसा करने से आप उस जोखिम को कम कर सकते हैं जिसका खुलासा इस स्टडी ने किया है।
कुछ बातें ध्यान में रखें
हालांकि इस स्टडी ने मजबूत संकेत दिए हैं, लेकिन यह एक 'संबंध' (association) दिखाती है, 'कारण-प्रभाव' (cause-effect) अब तक पूरी तरह तय नहीं हुआ है। इसके साथ-साथ यह भी ध्यान रहे कि ऐसे अध्ययन में व्यक्तिगत डायट डेटा नहीं था, बल्कि सांख्यिकीय रूप से राशनिंग डेटा पर आधारित था। यानी बिल्कुल नए नियम नहीं बल्कि एक सावधानी-वाली चेतना के रूप में इसे देखें।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
