यह उपलब्धि केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलाई जा रही जनसंख्या आधारित जांच पहल के अंतर्गत हासिल की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 30 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को इस जांच के दायरे में लाया गया है। जांच का मुख्य तरीका ‘विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड’ (VIA) है, जो देश के उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा की जाती है
आशा कार्यकर्ताओं की ली गई मदद
जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका। इस अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद अहम रही। वे "सीबीएसी फॉर्म" के जरिए जोखिम में पाई गई महिलाओं की पहचान कर उन्हें नियमित जांच और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करती हैं। साथ ही वे कैंसर की शुरुआती पहचान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।
समुदाय स्तर पर जागरूकता और प्रचार
कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसमें राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस, विश्व कैंसर दिवस जैसे विशेष अवसर शामिल हैं। सरकार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए भी लगातार जागरूकता फैला रही है।
विशेष कैंपेन से मिली रफ्तार
मंत्रालय ने 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक एक विशेष कैंसर जांच अभियान भी चलाया, जिसने जांच अभियान को तेज करने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके सकारात्मक परिणाम आज 10 करोड़ से अधिक जांच के आंकड़े के रूप में सामने आए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा सरकार की समग्र और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
