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क्या आपका पसंदीदा केक बन सकता है जानलेवा बीमारी की वजह, जानें क्या है केक और कैंसर के बीच संबंध

Does Cake Cause Cancer: बर्थ डे हो या एनिवर्सरी केक काटना एक परंपरा सी बन गई है। केक खाना भला किसे पसंद नहीं है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका पसंदीदा केक आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। जी हां आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि केक कैसे कैंसर की वजह बन रहा है?

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cake causes of cancer

Photo : iStock

बर्थ डे हो या एनिवर्सरी केक कटिंग न हो तो सेलिब्रेशन अधूरा सा लगता है। इसमें भी लोगों को अलग अलग तरह के फ्लेवर वाले केक खाना खूब पसंद होता है। आज कल लोग रेड वेलवेट और ब्लैक फॉरेस्ट केक को खूब जमकर खाना पसंद करते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई एक खबर में यह बात सामने आई है कि आपके ये पसंदीदा केक कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की वजह बन रहे हैं। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं कि कैसे केक बन रहे हैं कैंसर की वजह?

बेंगलुरु में फेल हुए केक के सैंपल

कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु शहर में कई बेकरी से केक के सैंपल कलेक्ट किए गए थे। जिनकी जांच करने पर सामने आया कि इन केक में 12 अलग-अलग तरह के ऐसे केमिकल केक में डाले जा रहे हैं, जो हमारे शरीर में जाकर कैंसर जैसे गंभीर खतरे की वजह बनते हैं। इसमें रेड वेलवेट और ब्लैक फॉरेस्ट केक को मुख्य रूप से शामिल किया गया है। जिसे आकर्षक बनाने के लिए आर्टिफिशियल कलर्स का इस्तेमाल किया जाता है।

केक और कैंसर का संबंध

रेड वेलवेट और ब्लैक फॉरेस्ट केक को सुंदर दिखाने के लिए कई तरह के कलर्स का इस्तेमाल किया जाता है। जो हमारी सेहत के लिए काफी खतरनाक होते है। टेस्टिंग के दौरान केक के सैंपल से एल्यूरा रेड, सनसेट येलो FCF, पोंसो 4R और कारमोइसिन जैसे रंग मिले। जिसे केक को सुंदर दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई और ऐसे पदार्थ केक में डाले रहे हैं, जो कि कैंसर की वजह बन सकते हैं।

पहले भी सामने आए मामले

खाद्य सुरक्षा विभाग समय समय पर हमें खाने-पीने की चीजों को लेकर सचेत करता रहता है। जिससे हम अपनी सेहत का ख्याल रख सकें। इस साल की शुरुआत में कर्नाटक सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट को आधार मानते हुए कॉटन कैंडी और गोभी मंचूरियन जैसे फूड्स की बिक्री को पूरी तरह बैन कर दिया था। क्योंकि कॉटन कैंडी और गोभी मंचूरियन में रोडामाइन-बी फूड कलरिंग एजेंट मौजूद था जिसे कैंसर कारक माना जाता है।

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गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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