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World Physiotherapy Day: फिजियोथेरेपी और मसाज में क्या अंतर है, दोनों को एक समझने की न करें गलती

Physiotherapy vs Massage: फिजियोथेरेपी और मसाज एक नहीं होते। वर्ल्ड फिजियोथेरपी डे पर जानें कि दोनों में क्या अंतर होता है, दर्द में मसाज कब कराएं और फिजियोथेरेपिस्ट के पास कब जाएं।

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दर्द होने पर मसाज बेहतर है या फिजियोथेरपी कराना जरूरी है, जानें यहां

World Physiotherapy Day: कमर में दर्द होने पर अक्सर लोग सलाह देते हैं कि अच्छी तरह मसाज करा लो। गर्दन अकड़ गई तो घर पर तेल गर्म करके मालिश कर लेते हैं। अक्सर लोग इसी को ही फिजियोथेरेपी समझ लेते हैं। उनके हिसाब से मशीन से गर्माहट देने या शरीर की मालिश करने वाली प्रक्रिया यही होती है। यह सोच आम जरूर है, लेकिन सही नहीं। क्योंकि यही फिजियोथेरपी और मसाज में अंतर होता है।

मसाज और फिजियोथेरेपी दोनों से शरीर को राहत मिल सकती है, लेकिन दोनों के करने के तरीके में बड़ा अंतर है। मसाज आमतौर पर थकी मांसपेशियों को आराम देने के लिए की जाती है। वहीं फिजियोथेरेपी चोट, बीमारी, ऑपरेशन या लगातार बने दर्द के बाद शरीर की ताकत और मूवमेंट वापस लाने वाली उपचार प्रक्रिया होती है।

कई समस्याओं के इलाज में फिजियोथेरेपी की भूमिका को समझते हुए हर साल 8 सितंबर को World Physiotherapy Day मनाया जाता है। साल 2026 में इस खास दिन की थीम हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधियों की भूमिका पर केंद्रित है।

फिजियोथेरेपी क्या होती है

फिजियोथेरेपी व्यक्ति की समस्या और जरूरत के अनुसार तैयार की जाने वाली वैज्ञानिक उपचार प्रक्रिया है। इसमें फिजियोथेरेपिस्ट सबसे पहले दर्द या कमजोरी की वजह समझने की कोशिश करता है।

वह व्यक्ति की चाल, मांसपेशियों की ताकत, जोड़ों की गति, संतुलन, पोस्चर और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता की जांच कर सकता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, मैनुअल थेरेपी, पोस्चर सुधार और मूवमेंट ट्रेनिंग की योजना बनाई जाती है।

कुछ मामलों में मशीनों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। लेकिन केवल मशीन लगाना या सिकाई करना पूरी फिजियोथेरेपी नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्द घटाने के साथ व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से चलने-फिरने और अपने काम करने योग्य बनाना है।

मसाज क्या है और इससे क्या फायदा मिलता है

मसाज में हाथों से शरीर की मांसपेशियों पर दबाव दिया जाता है। इसे सामान्य भाषा में मालिश कहा जाता है। तेल वाली पारंपरिक मालिश, स्पा मसाज और स्पोर्ट्स मसाज इसके अलग-अलग रूप हो सकते हैं।

मसाज से थकी हुई मांसपेशियों को कुछ समय के लिए आराम मिल सकता है। शरीर की सामान्य जकड़न कम महसूस हो सकती है और व्यक्ति को रिलैक्स होने में मदद मिलती है। लगातार यात्रा करने, हल्की कसरत या दिनभर काम करने के बाद थकान हो तो हल्की मसाज अच्छा महसूस करा सकती है।

हालांकि, आराम मिलने का अर्थ यह नहीं कि दर्द की असली वजह भी दूर हो गई है। यदि दर्द चोट, नस, जोड़ या गलत बॉडी मूवमेंट से जुड़ा है तो केवल मसाज पर्याप्त नहीं होगी।

फिजियोथेरेपी और मसाज में क्या अंतर है

फिजियोथेरेपी और मसाज में सबसे बड़ा अंतर इनके उद्देश्य में है। मसाज शरीर को आराम देने और मांसपेशियों की सामान्य जकड़न कम करने के लिए की जाती है। वहीं फिजियोथेरेपी शारीरिक परेशानी का आकलन करके उसकी वजह पर काम करती है।

मान लीजिए कि आपकी गर्दन में दर्द है। मसाज से आसपास की मांसपेशियां कुछ देर के लिए रिलैक्स हो सकती हैं। लेकिन दर्द की वजह घंटों मोबाइल देखना, गलत पोस्चर या गर्दन और कंधे की मांसपेशियों की कमजोरी है तो परेशानी फिर लौट सकती है।

फिजियोथेरेपिस्ट आपके बैठने का तरीका देख सकता है। वह कमजोर मांसपेशियों की पहचान करके गर्दन और कंधों के लिए सही एक्सरसाइज बता सकता है। यानी मसाज का लक्ष्य तत्काल आराम हो सकता है, जबकि फिजियोथेरेपी लंबे समय की रिकवरी पर ध्यान देती है।

क्या फिजियोथेरेपी में मसाज भी होती है

कुछ परिस्थितियों में फिजियोथेरेपिस्ट मसाज करता है। इसे मैनुअल थेरेपी या सॉफ्ट टिश्यू तकनीक कहा जाता है। देखने में यह मसाज जैसी लग सकती है, लेकिन इसे किसी खास चिकित्सीय उद्देश्य से किया जाता है।

यह पूरी उपचार योजना का केवल एक हिस्सा होता है। इसके साथ एक्सरसाइज, संतुलन का अभ्यास, मांसपेशियों की मजबूती और सही मूवमेंट सीखना भी जरूरी हो सकता है। इसलिए फिजियोथेरेपी को मसाज का आधुनिक नाम कहना सही नहीं है।

किन समस्याओं में फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है

फिजियोथेरेपी केवल कमर और घुटने के दर्द तक सीमित नहीं है। इसकी जरूरत इन स्थितियों में पड़ सकती है-

  • चोट या फ्रैक्चर के बाद चलने में परेशानी
  • घुटने या कूल्हे के ऑपरेशन के बाद रिकवरी
  • स्ट्रोक के बाद शरीर के एक हिस्से में कमजोरी
  • गर्दन, कंधे या कमर में लगातार दर्द
  • फ्रोजन शोल्डर, गठिया और खेल की चोट
  • बुजुर्गों का संतुलन बिगड़ना या बार-बार गिरना
  • हृदय रोग के बाद सुरक्षित तरीके से सक्रिय होना

इलाज व्यक्ति की उम्र, बीमारी और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। इसलिए इंटरनेट पर देखकर कोई भी एक्सरसाइज शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है।

दर्द में मसाज कब नहीं करानी चाहिए

तेज दर्द, नई चोट, सूजन, फ्रैक्चर की आशंका या किसी हिस्से में सुन्नपन हो तो अपने स्तर पर जोरदार मसाज नहीं करानी चाहिए। त्वचा में संक्रमण, खून का थक्का होने की आशंका या हाल में ऑपरेशन हुआ हो तो भी चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

दर्द के साथ कमजोरी, झनझनाहट, चक्कर, चलने में परेशानी या पेशाब-पाखाने के नियंत्रण में बदलाव हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

आराम और रिकवरी एक बात नहीं

मसाज के बाद शरीर हल्का लग सकता है। फिजियोथेरेपी का लक्ष्य शरीर को मजबूत और पहले से अधिक सक्षम बनाना होता है। हल्की थकान मिटानी हो तो मसाज राहत दे सकती है। लेकिन दर्द बार-बार लौट रहा हो या चोट और बीमारी के बाद सामान्य जीवन में वापस आना हो तो सही जांच और फिजियोथेरेपी जरूरी है। शरीर कई बार केवल आराम नहीं, सही मूवमेंट सीखने का संकेत भी दे रहा होता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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