US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू हुआ तनाव खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। आए दिन शांति वार्ता में प्रगति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक बार फिर होर्मुज में दोनों देश आमने-सामने आ गए। पिछले 24 घंटे में तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की।
अमेरिका ने बरपाया कहर
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान के खिलाफ जवाबी हमलों में 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के मुताबिक, यह हमले 7 जुलाई को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के नवीनतम हमलों के तत्काल जवाब के रूप में किए गए। वहीं, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों में किसी भी नागरिक के हताहत होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।
अमेरिकी सेना ने बताया कि हमलों में ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों, कमान और नियंत्रण नेटवर्क, तटीय रडार स्थलों, एंटी शिप मिसाइल क्षमताओं और होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास संचालित होने वाली 60 से अधिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नावों को निशाना बनाया गया। सेंटकॉम ने ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों को युद्धविराम का स्पष्ट और खतरनाक उल्लंघन करार दिया।
ईरान ने भी किया जोरदार पलटवार, बजने लगे सायरन
ईरान और अमेरिका एक-दूसरे के खिलाफ बस हमले करने के लिए वजहें तलाशते रहते हैं। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान भी कहां चुप बैठने वाला था। उसने बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में बुधवार को दूसरी बार मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे। ऐसे में बहरीन ने अपने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर तत्काल शरण लेने की अपील की। हालांकि, हमलों में बहरीन या कुवैत में नुकसान की कोई तत्काल रिपोर्ट सामने नहीं आई।
दोनों देशों के बीच कतर में बातचीत हो चुकी है और अब इस्लामाबाद में अगले दौर की वार्ता प्रस्तावित है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बढ़ता तनाव कूटनीतिक प्रयासों को एक बार फिर से पटरी से उतार देगा।
टकराव का केंद्र फिर बना होर्मुज
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस समुद्री जलमार्ग से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता है। भारत, चीन, जापान और यूरोप सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री जलमार्ग पर निर्भर हैं।
दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान और कतर मध्यस्थता कर रहे हैं। भले ही तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, लेकिन दोनों देशों ने मध्यस्थ के जरिए बातचीत जारी रखी है, जो इस बात का संकेत है कि देर-सवेर दोनों के बीच स्थिति सुधर सकती है।
कहां होगी अगले दौर की वार्ता
दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का अगला दौर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में प्रस्तावित है। हालांकि, स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट का विकल्प भी मौजूद है। 18 जून को दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के मकसद से एक समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए थे। इसके बाद, बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, लेकिन मौजूदा हमलों के बाद बातचीत कुछ समय के लिए टल सकती है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अगले दौर की वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना थी, लेकिन अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। कतर की राजधानी दोहा में हुई बातचीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बहुत अच्छा' बताया था। ट्रंप के इस बयान को बातचीत की दिशा में सकारात्मक माना गया। हालांकि, तनातनी के बाद इस्लामाबाद वार्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
US ने रद्द किया तेल लाइसेंस
लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के बाद कुछ भी कह पाना मुश्किल है, क्योंकि अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में दी गई अस्थायी राहत वापस ले लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने 21 जून को जारी जनरल लाइसेंस एक्स को रद्द कर उसकी जगह जनरल लाइसेंस एक्स-1 लागू किया। इस फैसले के साथ ही युद्धविराम व्यवस्था के तहत ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री की अस्थायी अनुमति तत्काल समाप्त कर दी गई।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देश सीधे टकराव से बचना चाहते हैं, लेकिन अपने-अपने रणनीतिक हितों से पीछे हटने को भी तैयार नहीं हैं।
क्या बढ़ता तनाव बातचीत पर असर डालेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता से ठीक पहले सैन्य तनाव बढ़ना दोनों पक्षों की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। कई बार बातचीत की मेज पर मजबूत स्थिति हासिल करने के लिए देश दबाव की राजनीति अपनाते हैं। अगर होर्मुज में हमले या सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है, तो इस्लामाबाद वार्ता का माहौल प्रभावित हो सकता है। वहीं, दूसरी तरफ अगर दोनों पक्ष संयम बरतते हैं तो बातचीत आगे बढ़ने की संभावना भी बनी रहेगी।
