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महुआ मोइत्रा से क्यों किनारा करती रहीं ममता बनर्जी? कांग्रेस उठा सकती है इस चूक का लाभ

Congress With Mahua Moitra: ममता बनर्जी ने आखिरकार महुआ मोइत्रा से दूरी क्यों बना रखी है? महुआ खुद पर लगे आरोपों को निराधार बता रही हैं, तो वहीं अब उनके समर्थन में कांग्रेस के एक और दिग्गज उतर आए हैं। मणिशंकर अय्यर ने महुआ का बचाव करते हुए भाजपा को जमकर कोसा है। आपको इस पूरे विवाद में कांग्रेस की एंट्री के मायने समझाते हैं।

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कहीं ममता बनर्जी को भारी न पड़ जाए ये गलती।

Political News: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनकी पार्टी के कोई भी दिग्गज नेता और सीएम ममता बनर्जी ने अब तक इस पूरे विवाद से दूरी बना रखी है। सियासी उठापटक का दौर जारी है। महुआ खुद पर लगे आरोपों को निराधार बता रही हैं, तो वहीं अब उनके समर्थन में कांग्रेस के एक और दिग्गज उतर आए हैं। मणिशंकर अय्यर ने महुआ का बचाव करते हुए भाजपा को जमकर कोसा है। आपको इस पूरे विवाद में कांग्रेस की एंट्री के मायने समझाते हैं।

कांग्रेस ने महुआ मोइत्रा का इस तरह किया बचाव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा का बचाव किया है और रविवार को उन्होंने कहा कि 'संसद की आचार समिति ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को तलब किया जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रमेश बिधूड़ी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जो केंद्र सरकार के दोहरे मानकों को दर्शाता है।' अय्यर ने आगे कहा, 'देश एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है। हमारा लोकतंत्र खतरे में है। भारतीय संविधान की भावना की रक्षा की जानी चाहिए। लोकतंत्र के हमारे तीन स्तंभों- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को मजबूत बने रहने की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार मोइत्रा और बिधूड़ी से निपटने में दोहरे मापदंड क्यों अपना रही है।

महुआ का साथ देने उतरी कांग्रेस, समझिए मायने

विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) में कई पार्टियां एक-दूसरे के गले की फांस बनी हुई हैं। कांग्रेस बनाम आम आदमी पार्टी, कांग्रेस बनाम समाजवादी पार्टी और कांग्रेस बनाम टीएमसी की जंग खुले तौर पर देखी गई है। ऐसे में जहां एक तरह ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने महुआ से जुड़े विवाद पर चुप्पी साध रखी है। ममता पूरी तरह बैकफुट पर हैं, मगर कांग्रेस इस विवाद पर दो कदम आगे नजर आ रही है। सियासत में कभी भी बड़ा उलटफेर हो सकता है, जो कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपनी जमीन तलाश रही है, वो महुआ मोइत्रा के जरिए खुद को वहां मजबूत कर सकती है। मगर ये कितना संभव है, आने वाला वक्त बताएगा।

ममता ने महुआ मामले पर बस इतनी सी बात कही

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर लगे कैश-फॉर-क्वेरी विवाद पर ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पहली बार प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, "यह सब एक राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से हो रहा है।" ममता ने एक तो इतनी देरी से इस विवाद पर चुप्पी तोड़ी थी, वो भी वो इतना ही बोलकर रुक गईं। मतलब साफ है, ममता को महुआ से दूरी बनाए रखनी है। अब तो ऐसा महसूस होने लगा है कि कहीं आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में महुआ मोइत्रा को ममता और उनकी पार्टी साइडलाइन तो नहीं कर देंगी।

महुआ मोइत्रा पर दर्ज होंगे आपराधिक मामले?

सांसद महुआ मोइत्रा ने रविवार को आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उनके खिलाफ "आपराधिक मामले" दर्ज करने की तैयारी कर रही है। महुआ ने संसद में ‘पैसों के बदले सवाल पूछने’ से जुड़े कथित मामले में लोकसभा आचार समिति के सामने पेश होने के कुछ दिन बाद यह आरोप लगाया। उन्होंने दोहराया कि आचार समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर ने दो नवंबर को सुनवाई के दौरान उनसे "घटिया" और "अप्रासंगिक" सवाल पूछे। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी पोस्ट में महुआ ने कहा, 'मैं यह जानकर कांप रही हूं कि भाजपा मेरे खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की तैयारी कर रही है। उनका स्वागत है- बस इतना जान लीजिए कि इससे पहले कि सीबीआई और ईडी सवाल करें कि मेरे पास कितने जोड़े जूते हैं, उन्हें 1,30,000 करोड़ के कोयला घोटाले के सिलसिले में अडाणी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करनी होगी।'

7 नवंबर को लोकसभा की आचार समिति की बैठक

कृष्णानगर से सांसद महुआ ने कहा, 'साथ ही भाजपा- इससे पहले कि आप फर्जी कहानी के साथ महिला सांसदों को बाहर निकालें, याद रखें कि मेरे पास आचार समिति में हुई बातचीत के रिकॉर्ड की सटीक प्रतिलिपि है। अध्यक्ष के घटिया, घिनौने, अप्रासंगिक प्रश्न, विपक्ष का विरोध, मेरा विरोध- सब कुछ आधिकारिक रूप से मौजूद है।' तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर ‘पैसे के बदले प्रश्न पूछने’ के आरोपों की जांच कर रही लोकसभा की आचार समिति मसौदा रिपोर्ट को अंगीकार करने के लिए सात नवंबर को बैठक करेगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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