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सुनेत्रा पवार: दो साल पहले ली सक्रिय राजनीति में एंट्री, पहला चुनाव ननद से हारीं, अब बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम

महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम के रूप में सुनेत्रा पवार ने पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। यह पहली बार है जब कोई महिला सूबे की उप मुख्यमंत्री बनी है। ऐसे में यह जानना भी ​अहम है कि सुनेत्रा पवार कौन हैं? अजित पवार की पत्नी होने से इतर उनकी अपनी पहचान क्या है? उनका पारिवारिक और राजनीतिक इतिहास क्या है? अजित पवार से उनकी शादी कैसे हुई?आइये जानते हैं...

महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनी सुनेत्रा पवार।

महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनी सुनेत्रा पवार।

Who is Sunetra Pawar: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के आकस्मिक और दुखद निधन के बाद सूबे की सियासत में पैदा हुए शून्य को भरने के लिए सियासी हलचल तेज है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा ने सूबे के डिप्टी सीएम पद की भी शपथ ले ली है। यह महाराष्ट्र के लिए भी ऐतिहासिक अवसर है। 1 मई 1960 में गठित सूबे को पहली बार एक महिला डिप्टी सीएम मिली है। इससे पहले एनसीपी विधायकों की बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया था।

ऐसे में हम आपको बताएंगे कि सुनेत्रा पवार कौन हैं? अजित पवार की पत्नी होने से इतर उनकी अपनी पहचान क्या है? उनका पारिवारिक और राजनीतिक इतिहास क्या है? अजित पवार से उनकी शादी कैसे हुई?आइये जानते हैं...

कौन हैं सुनेत्रा पवार?

सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में हुआ। उन्होंने औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एसबी कॉलेज से बी.कॉम किया। राजनीति से जुड़े एक प्रभावशाली परिवार का हिस्सा होने के बावजूद सुनेत्रा पवार ने कभी सक्रिय राजनीति का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखते हुए खुद को समाजसेवा और विकास कार्यों तक सीमित रखा।

पवार परिवार से जुड़ने के बाद उनका फोकस बारामती के पास स्थित पैतृक गांव काठेवाड़ी के विकास पर रहा, जहां उन्होंने खास तौर पर स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े कई अभियान चलाए।उनकी कोशिशों का ही परिणाम था कि काठेवाड़ी गांव को 2006 में ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा मिला इसे खुले में शौच मुक्त गांव घोषित किया गया।

वर्ष 2008 में उन्होंने बारामती में एक आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। केंद्र सरकार की टेक्सटाइल पार्क योजना के तहत विकसित 65 एकड़ में फैला यह हाईटेक पार्क आज करीब 15 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

पिता और भाई भी राजनीति में रहे

सुनेत्रा पवार ने भले ही राजनीति में काफी देर बाद एंट्री ली, लेकिन इस क्षेत्र से उनका परिचय पैदा होने के साथ ही हो गया था। उनके पिता बाजीराव पाटिल राज्य के अच्छे नेता थे। इसके अलावा, उनके भाई पद्मसिंह 1980 के दशक में सूबे के प्रभावशाली नेताओं में शुमार थे। पद्मसिंह विधायक और फिर कई बार सांसद भी रहे। इतना ही नहीं वे राज्य के गृहमंत्री भी बने। इस तरह से कह सकते हैं कि अजित पवार से शादी के पहले से ही वे राजनीति को भली भांति जानती थीं और रसूखदार परिवार से जुड़ी थीं।

अजित पवार से विवाह और जुड़ा बारामती से रिश्ता

सुनेत्रा पवार के भाई पद्मसिंह पाटिल और शरद पवार की गहरी दोस्ती थी। इसी दोस्ती को ही दोनों ने रिश्तेदारी में बदला और सुनेत्रा का विवाह शरद पवार के भतीजे अजित के साथ तय हुआ। 1985 में उनकी शादी हुई और वे बारामती आ गईं। उस दौर में अजित पवार राजनीति में एक्टिव थे, लेकिन सक्रिय रूप से कदम नहीं रखा था। शादी के बाद अजित ने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। तब सुनेत्रा पवार ने घर और परिवार संभालते हुए अजित पवार को पीछे से सपोर्ट दिया। इस दौर में वे अजित के दूध के व्यवसाय में सक्रिय रहीं। यह वह समय था जब राजनीति उनके लिए प्राथमिकता नहीं थी,बल्कि परिवार पहले था।

सुनेत्रा पवार के हैं दो बेटे

सुनेत्रा और अजित पवार के दो बेटे जय और पार्थ पवार हैं। बड़े बेटे पार्थ पवार ने वर्ष 2019 में महाराष्ट्र के मावल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था,हालांकि उन्हें इसमें हार का सामना करना पड़ा। पार्थ पवार के मावल से लोकसभा चुनाव लड़ने के साथ ही पवार परिवार के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। सुनेत्रा पवार पर यह आरोप लगे कि वह पार्थ के चुनाव लड़ने पर अड़ी थीं, हालांकि उन्होंने इसका हमेशा खंडन किया। अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं

सुनेत्रा पवार की सक्रिय राजनीति में एंट्री और ननद से मिली हार

सुनेत्रा पवार को सक्रिय राजनीति में अभी बहुत समय नहीं हुआ है, लेकिन इतने कम समय में ही वे सूबे की सियासत का उभरता हुआ चेहरा बनकर आई हैं। पवार परिवार से आने के बाद भी उन्होंने कभी राजनीति में आने को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। हालांकि वे अजित के साथ जनसंपर्क के लिए जाती थीं, लेकिन खुद चुनाव लड़ने के बारे में नहीं सोंचा था। उनके राजनीतिक सफर का निर्णायक मोड़ 2023 के अंत में आया,जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बंट गई और यहीं से उनकी सक्रिय भूमिका शुरू हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब उन्होंने अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस चुनाव को पवार बनाम पवार की लड़ाई के तौर पर देखा गया। हालांकि सुनेत्रा इस चुनाव में अपनी ननद से हार गईं। लोकसभा हार के बाद सुनेत्रा पवार 13 जून 2024 को राज्यसभा सांसद बनीं। एनसीपी विभाजन के बाद भी वह परिवार को जोड़ने वाली कड़ी बनी रहीं।

अजित के निधन के बाद निजी और राजनीति दोनों अलग मोड़ पर...

अब जबकि 28 जनवरी को पति और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया है तो सुनेत्रा का निजी और सार्वजनिक जीवन दोनों एक अलग मोड़ पर आ गए हैं। अब वे सूबे की पहली डिप्टी सीएम बनकर फिर से महाराष्ट्र की राजनीति में लौट रही हैं।

सुनेत्रा की एक पहचान ये भी

सुनेत्रा पवार की असली पहचान राजनीति से पहले सामाजिक कार्यों से बनी। काटेवाड़ी गांव से उन्होंने ग्राम स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। जब अजित पवार सतारा के गार्डियन मिनिस्टर थे,तब महाबलेश्वर यात्रा के दौरान उन्होंने संत गाडगे बाबा के ग्राम स्वच्छता आंदोलन से प्रेरित एक गांव देखा। वहीं से काटेवाड़ी परियोजना की नींव पड़ी। हालांकि शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया। कहा गया कि क्या वे प्रदर्शनी लगाकर गांव साफ करेंगी? लेकिन सुनेत्रा पवार ने किसी के कहने की कोई परवाह नहीं की। वे डटी रहीं लगातार गांव आती रहीं, लोगों से बात करती रहीं। नतीजा यह हुआ कि जहां 80% घरों में शौचालय नहीं थे,वहां निर्मलग्राम आंदोलन खड़ा हो गया। काटेवाड़ी की सफलता के बाद सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र के 86 गांवों में निर्मलग्राम अभियान का नेतृत्व किया।उन्होंने ‘निर्मलग्राम स्वयं सहायता आंदोलन’ शुरू किया, जिसने स्वच्छता को जनआंदोलन बनाया।

सुनेत्रा पवार ने ‘एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया’ की स्थापना की। इस संगठन के जरिए वह जल संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता पर जमीनी स्तर पर काम करती हैं। उनके लिए राजनीति से पहले सतत विकास अहम रहा। बारामती में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुनेत्रा पवार ने टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की, जहां आज लगभग 15 हज़ार महिलाएं काम कर रही हैं। वह 2006 से इसकी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा, वह विद्या प्रतिष्ठान जैसी बड़ी शैक्षणिक संस्था की ट्रस्टी हैं, जहां हज़ारों छात्र पढ़ते हैं। खास बात यह है कि इस संस्था का अधिकांश संचालन वह खुद संभालती हैं।

शिव शुक्ला
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शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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