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यूपी में किसने किसको दिया गच्चा? अखिलेश ने शिवपाल को या फिर मौर्य ने...समझें किस ओर करवट ले रही सियासत

UP Politics: उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में आजकल गच्चा शब्द काफी ट्रेंड कर रहा है। योगी आदित्यनाथ का मानना है कि अखिलेश यादव ने अपने चाचा को गच्चा दिया है। तो वहीं अखिलेश का मानना है कि योगी के साथ मौर्य खेल कर रहे हैं और योगी ने मोदी को गच्चा दिया है। आपको समझाते हैं कि सारा विवाद क्या है।

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किस ओर करवट ले रही यूपी की सियासत?

UP Mein Kisne Kisko Diya Gachcha: यूपी की राजनीति में इन दिनों टांग खिंचाई का दौर तेज हो गया है। लोकसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा में अंदरूनी कलह की अटकलें सामने आ रही है। तो वहीं समाजवादी पार्टी में भी चाचा और भतीजे के बीच मनमुटाव बढ़ने की आशंका नजर आ रही है। आम चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश ने जो जनादेश दिया, उसके बाद से बीजेपी की टेंशन लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर योगी कह रहे हैं कि अखिलेश यादव ने शिवपाल को गच्चा दिया, तो वहीं अखिलेश ये दावा कर रहे हैं कि मौर्य मोहरा हैं और योगी ने मोदी को गच्चा दिया है।

आखिर उत्तर प्रदेश में किसको किसने गच्चा दिया?

ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है, ऐसे दावों के बीच अखिलेश यादव ने बीजेपी में बंदरबांट की बात कहकर कभी मौर्य को मोहरा बताया तो कभी मोदी-योगी के रिश्तों को लेकर बार-बार चुटकी भी ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पीएम मोदी पर इशारों-इशारों में तंज कसते हुए ये तक दावा कर दिया कि जिसने हराया (लोकसभा चुनाव में) उसे हटा नहीं पा रहे। उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र की सरकार चलने वाली नहीं, बल्कि गिरने वाली सरकार है। वहीं योगी ने शिवपाल की चुटकी लेते हुए ये कह दिया कि चचा को गच्चा दे ही दिया। अब सवाल ये है कि किसके दावे में कितना दम है।

Akhilesh Yadav Shivpal Yadav Factor

अखिलेश यादव, शिवपाल यादव।

अखिलेश ने चाचा को दे दिया गच्चा? क्या बोले शिवपाल

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में 'गच्चा देने' (धोखा देने) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर खूब तंज किये। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव को लक्ष्य करते हुए नेता प्रतिपक्ष से कहा, 'आपने चचा को गच्चा दे ही दिया।' वहीं, इस पर शिवपाल सिंह यादव ने योगी को जवाब देते हुए कहा 'देख लेना 2027 में सपा सत्ता में आएगी और आपके जो 'डिप्टी चीफ मिनिस्टर' हैं, वह आपको फिर गच्चा देंगे।' इसके साथ-साथ शिवपाल ने एक बड़ी मजेदार बात कही। उन्होंने आगे योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि तीन साल तो मैं आपके संपर्क में रहा हूं। गच्चा तो आपने भी दिया है। शिवपाल यादव के इस बयान से साथ ही मुख्यमंत्री योगी सहित सदन में मौजूद तमाम लोगों ने जमकर ठहाका लगाया।

क्या योगी की टेंशन बढ़ाने वाले हैं केशव प्रसाद मौर्य?

ये सवाल लंबे समय से उठ रहा है कि क्या यूपी में योगी के साथ खेला होने वाला है? सवाल ये भी है कि क्या इस खेला के सूत्रधार सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य होंगे? अखिलेश यादव बार-बार मौर्य को मोहरा बता रहे हैं, दिल्ली के वाई फाई का पासवर्ड करार दे रहे हैं। इसी कड़ी में उनके चाचा शिवपाल ने भी उनके कदम से कदम मिलाया। शिवपाल यादव ने कहा 'जब आपने गच्चा दिया तो इस चुनाव (लोकसभा चुनाव-2024) में आपकी पार्टी पीछे रह गयी और सपा आगे हो गयी। अब देख लेना 2027 में सपा फिर से (सत्ता में) आएगी और आपके जो 'डिप्टी चीफ मिनिस्टर' हैं, वह आपको गच्चा दे देंगे!'

क्या सीएम योगी ने पीएम मोदी के साथ किया खेला?

एक दिन पहले ही अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में पीएम मोदी और सीएम योगी पर तीखा तंज कसा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने भाजपा की कथित अंदरूनी खींचतान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए कटाक्ष किया कि जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं। अखिलेश ने कहा कि 'आप अपने आप को ताकतवर कहते थे, लेकिन जिसने (लोकसभा चुनाव में) हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं।' अखिलेश का ये तंज लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार को लेकर था, जिसके लिए वो लगातार योगी और मौर्य की लड़ाई को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं।

Akhilesh Yadav Slams Modi Yogi

पीएम मोदी और सीएम योगी पर अखिलेश का तंज।

कौन है मोहरा- अखिलेश यादव या केशव प्रसाद मौर्य?

गच्चा के अलावा इन दिनों यूपी की सियासत में मोहरा बताने वाली सियासत तेज हो चुकी है। इसकी शुरुआत अखिलेश यादव ने की थी, अखिलेश यादव ने प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को “मोहरा” बताया था। उन्होंने ये भी कहा था कि वह (केशव मौर्य) दिल्ली के वाई-फाई के पासवर्ड हैं। अखिलेश के इस तंज के बाद से ही केशव प्रसाद मौर्य ने बार-बार अखिलेश यादव को कांग्रेस का मोहरा बता रहे हैं। उन्होंने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि आप खुद कांग्रेस का मोहरा बन चुके हैं और भाजपा को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी न पालें। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों को निशाना बनाने, अपमान करने की जगह आप समाजवादी पार्टी को समाप्त होने से बचाने के लिए काम करें, उस पर ज्यादा ध्यान दें।

Keshav Prasad Maurya vs Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव ने केशव प्रसाद मौर्य पर कसा तंज।

केशव प्रसाद मौर्य बार-बार सपा को समाप्तवादी पार्टी बता रहे हैं और अखिलेश यादव को कांग्रेस का मोहरा कह रहे हैं। अखिलेश ने उनकी चुटकी ली तो मिर्ची लग गई, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि अखिलेश को बोलने का मौका भी मौर्य ने ही दिया है। उदाहरण के तौर पर हाल ही में हुई बीजेपी ओबीसी कार्यसमिति की बैठक में सीएम योगी के अलावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को भी मौजूद रहना था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीएम योगी के पहुंचने से पहले ही दोनों डिप्टी सीएम वहां से निकल गए, जिसके बाद चर्चाएं और भी ज्यादा तेज हो गई। मौर्य बार-बार ये कह रहे हैं कि सरकार से बड़ा संगठन होता है, सरकार के दम पर चुनाव नहीं जीते जाते हैं। निश्चित तौर पर अखिलेश भाजपा में मची इस माथापच्ची का फायदा उठाने से पीछे नहीं रहना चाहते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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