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Wayanad Landslide: मरने वालों की संख्या 400 के पार, 150 से अधिक लोग लापता; जानें अब कैसे हैं वायनाड के हालात

Kerala News: वायनाड भूस्खलन (Wayanad Landslide) में मरने वालों की संख्या 400 के पार पहुंच चुकी है, जबकि इस विनाशकारी आपदा में 150 से अधिक लापता लोगों की तलाश जारी है। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान आज लगातार नौवें दिन भी चल रहा है। आपको बताते हैं, फिलहाल कैसे हालात हैं।

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वायनाड में अब तक कितने लोगों की मौत?

KEY HIGHLIGHTS
  • भूस्खलन प्रभावित वायनाड में बचाव अभियान 9वें दिन भी जारी
  • वायु सेना, सेना और राज्य अधिकारियों द्वारा बचाव अभियान जारी
  • पिछले दो दिनों में 44 शव और 176 शरीर के अंग दफनाए गए हैं

Wayanad Updates: केरल के वायनाड में विनाशकारी भूस्खलन में मरने वालों की संख्या 413 पहुंच गई है। 152 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव अभियान नौवें दिन भी जारी है। रक्षा बलों, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन सेवाओं और स्वयंसेवकों के कर्मियों वाली 1,000 से अधिक सदस्यीय बचाव टीम ने बुधवार सुबह चार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों चूरलमाला, वेल्लारीमाला, मुंडक्कई और पुंचिरिमाडोम में तलाशी अभियान शुरू किया।

अब तक 152 लापता मामले किए गए दर्ज

वायनाड भूस्खलन को लेकर केरल के मंत्री के राजन ने कहा कि 'पिछले दो दिनों में 44 शव और 176 शरीर के अंग दफनाए गए हैं। आज की तलाशी में दो शव के अंग मिले। चूरनमाला क्षेत्र में 17 शिविरों में 648 परिवार और 2225 लोग रह रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों के दो स्कूलों के छात्रों की कक्षाएं मेप्पाडी के दो स्कूलों में स्थानांतरित की जाएंगी। केएसआरटीसी उनके लिए विशेष सेवाएं संचालित करेगा। स्कूलों में छात्रों को विशेष परामर्श दिया जाएगा। अब तक 152 लापता मामले दर्ज किए गए हैं।'

केरल के वायनाड में अब कैसे है हालात?

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि जब तक रक्षा बल कोई फैसला नहीं ले लेते, तलाशी अभियान जारी रहेगा। वर्तमान में सर्च अभियान अब उन क्षेत्रों में चल रहा है जहां लोग रहते थे और 30 जुलाई को सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा आने के बाद फंसे हुए थे। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बीते मंगलवार को बताया था कि वायनाड जिले के चार गांवों में हुई त्रासदी के बाद मलप्पुरम जिले में स्थित नीलांबुर और उसके आसपास के इलाकों में चलियार नदी से 76 शव और शरीर के कई अंग बरामद किए गए हैं।

Wayanad landslide

वायनाड भूस्खलन

100 से अधिक राहत शिविर बनाए गए

बुधवार को भी बचाव टीम चलियार नदी में सर्च अभियान चला रही है। प्रभावित क्षेत्रों में और उसके आसपास विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में 100 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां वर्तमान में 10,300 से अधिक लोग रह रहे हैं। कुछ दिन पहले तक कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं था। सारा ध्यान बचाव, राहत और पुनर्वास पर था। लेकिन, अब सीएम विजयन पर निशाना साधते हुए वाकयुद्ध शुरू हो गया है।

Wayanad Landslide

वायनाड में कहर

मोदी के मंत्री ने बताया मानव निर्मित आपदा

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे मानव निर्मित आपदा करार दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने मांग की है कि मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में आने वाले पैसे का उचित उपयोग किया जाना चाहिए। देश के सबसे लंबे समय तक रक्षा मंत्री रहे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने आपदा के बाद पुनर्वास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने और राजनीतिक लाभ उठाने में शामिल न होने का आह्वान किया है।

केरल के सीएम ने बताया कि सरकारी कर्मचारी और शिक्षक सीएम आपदा राहत कोष में अपने वेतन का कम से कम 5 प्रतिशत योगदान देने के लिए आगे आए हैं। सीएमडीआरएफ में कुल धनराशि पर प्रकाश डालते हुए विजयन ने कहा, "30 जुलाई से सोमवार तक हमें आपदा राहत कोष में 53.98 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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