Wayanad Rescue Workers Food by Drone: केरल के वायनाड में भूस्खलन की त्रासदी में जीवित बचे लोगों और मृतकों के शवों की चुनौतीपूर्ण तलाश जारी रहने के बीच प्राधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में भोजन पहुंचाने के लिए पारंपरिक संसाधनों की बजाय मानव रहित ड्रोन की मदद ले रहे हैं। जीवित बचे लोगों की तलाश में खतरनाक इलाकों में खोज कर रहे सैकड़ों कर्मियों के लिए भी भोजन के पैकेट पहुंचाने के लिए प्राधिकारियों ने आधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया है।ये ड्रोन एक बार में 10 लोगों के लिए भोजन के पैकेट ले जा सकते हैं।
सोमवार को यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 'बचाव कर्मियों के लिए एक त्वरित भोजन एवं पानी वितरण प्रणाली स्थापित की गई है। भारी उपकरण और मशीनें चलाने वाले कर्मियों को भोजन की सीधी आपूर्ति ड्रोन के जरिये संभव हुई है।'
खाना मेप्पडी पॉलिटेक्निक में संचालित सामुदायिक रसोई में हो रहा है तैयार
इसमें कहा गया है कि बचावकर्मियों के लिए खाना मेप्पडी पॉलिटेक्निक में संचालित सामुदायिक रसोई में तैयार किया जा रहा है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की देखरेख में केरल होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन प्रतिदिन लगभग सात हजार भोजन के पैकेट तैयार कर रहा है, जिन्हें जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है।
लापता लोगों की संख्या अब 180 हो गई है
4 अगस्त शाम तक के सरकारी आंकड़े के अनुसार, 30 जुलाई के भूस्खलन में अब तक कुल 221 शव और 166 मानव अंग बरामद किए गए हैं।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पूर्व में लापता लोगों की संख्या 206 थी, लेकिन कुछ लोगों से अधिकारियों ने फोन से संपर्क किया जिससे लापता लोगों की संख्या अब 180 हो गई है।
नीतू की कॉल की रिकॉर्डिंग वायरल
वायनाड में 30 जुलाई को हुए विनाशकारी भूस्खलन के बारे में आपातकालीन सेवाओं को संभवत: सबसे पहले सूचित करने वालीं एक निजी अस्पताल की महिला कर्मचारी नीतू जोजो की बचाव दल के पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। चूरलमाला में विनाशकारी भूस्खलन के बाद घर में फंसे अपने और कुछ अन्य परिवारों के लिए मदद मांगने वाली नीतू की कॉल की रिकॉर्डिंग वायरल हो गई है। रिकॉर्डिंग में उन्हें 30 जुलाई की सुबह में हुई भयावहता का विवरण बताते सुना जा सकता है, जब उनका घर भूस्खलन की चपेट में था।
नीतू संभवतः घटना की पहली सूचना देने वालों में से एक थीं
इस कॉल रिकॉर्डिंग में नीतू को यह कहते हुए सुना गया कि पानी उनके घर के अंदर बह रहा है, जो भूस्खलन में बह गई कारों सहित मलबे से घिरा हुआ था। वह कहती हैं कि उनके घर के पास रहने वाले पांच से छह परिवार प्रकृति के प्रकोप से बचकर उनके घर में शरण ले चुके हैं, जो तुलनात्मक रूप से सुरक्षित था। नीतू संभवतः घटना की पहली सूचना देने वालों में से एक थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बचाया नहीं जा सका और उनका शव कई दिनों बाद मिला।
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