Rahul Gandhi and Modi Sarkar on Waynad: केरल के वायनाड जिले में हुए विनाशकारी भूस्खलन के बाद वहां त्राहिमाम मचा हुआ है। ऐसी मार्मिक तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसे देखकर हर किसी का रूह कांप उठेगा। रिपोर्ट्स में ये बात सामने आई है कि अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं देश की संसद में वायनाड भूस्खलन के मुद्दे ने मंगलवार को जोर पकड़ लिया। जिसे लेकर जहां एक ओर वायनाड के पूर्व सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार से मदद की मांग की, तो वहीं केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रियों ने राहुल की मांग पर जवाब दिया। आपको इस लेख में बताते हैं कि वायनाड में फिलहाल हालात कैसे हैं और संसद में किस नेता ने इस मुद्दे पर क्या कहा।
वायनाड लोकसभा सीट का फिलहाल कौन प्रतिनिधि?
पिछली लोकसभा 2019 में राहुल गांधी ने वायनाड का प्रतिनिधित्व किया था। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी वह रायबरेली के साथ वायनाड से निर्वाचित हुए थे, लेकिन उन्होंने केरल में आने वाले संसदीय क्षेत्र से इस्तीफा दे दिया। अब वायनाड से उपचुनाव में उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की उम्मीदवार होंगी। फिलहाल इस सीट से कोई भी सांसद नहीं है, यही वजह है कि राहुल ने संसद में वायनाड भूस्खलन के मसले को प्रमुखता से उठा रहे हैं।

वायनाड में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केरल के वायनाड में भूस्खलन से जुड़ा विषय मंगलवार को लोकसभा में उठाया और केंद्र सरकार से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने का आग्रह किया तथा ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए कार्य योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया।
'वायनाड भूस्खलन में 70 से अधिक लोग मारे गए'
राहुल गांधी ने सदन में कहा, 'आज वायनाड में भीषण भूस्खलन हुआ है। 70 से अधिक लोग मारे गए हैं। किस स्तर का नुकसान हुआ है अभी आकलन करना बाकी है क्योंकि यह आपदा बहुत बड़ी है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से बात की है। केंद्र सरकार से आग्रह है कि बचाव कार्य एवं चिकित्सा देखभाल के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाए। मुआवजा तत्काल जारी किया जाए और मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए।'

वायनाड से पूर्व सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया
कांग्रेस नेता ने सरकार से आग्रह किया कि भूस्खलन के खतरे वाले क्षेत्रों की मैपिंग की तत्काल जरूरत है और इसे रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।
राहत, बचाव और पुनर्वास के लिए सरकार का प्लान
केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि केरल के पर्वतीय वायनाड जिले में विनाशकारी भूस्खलन के बाद राज्य सरकार के साथ समन्वय कर राहत व बचाव अभियान चलाया जा रहा है तथा इसमें सेना एवं वायु सेना से लेकर सभी सुरक्षा व सहायता एजेंसियों की मदद ली जा रही है। राज्यसभा में केरल में हुई इस आपदा को लेकर सभी दलों की ओर से चिंता प्रकट किए जाने के बाद उच्च सदन के नेता व केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि वहां स्थिति सामान्य करने के लिए केंद्र सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा, 'यह बहुत बड़ी त्रासदी है और इससे केवल केरल ही नहीं बल्कि पूरा देश द्रवित है। सभी दुखी हैं। यह एक प्राकृतिक आपदा है। प्रधानमंत्री, सक्रियता के साथ हर आवश्यक कदम उठा रहे हैं। जो भी आवश्यक है किया जा रहा है। जो भी जरूरतें होंगी, सब पूरी की जाएंगी।'
पीएम मोदी ने केरल के सीएम पिनरई विजयन से की बात
जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से बात की है, केंद्रीय एजेंसियों को लगाया गया है और राज्य सरकार के साथ समन्वय के साथ काम किया जा रहा है। नड्डा ने कहा कि प्राथमिकता लोगों के शवों को निकालना है और जिनके बचने की संभावना है, उन्हें तुरंत बचाने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय किया गया है और पूरी सरकार इसमें अति सक्रिय होकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'सरकार की तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।' उन्होंने कहा कि यदि कोई सुझाव भी होंगे तो सरकार उन पर अमल करेगी।
मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री से बात की है, राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे में मारे गए हर व्यक्ति के निकट परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की।

वायनाड भूस्खलन की तस्वीर।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), केंद्रीय बलों, सेना और यहां तक की वायु सेना को भी बचाव व राहत अभियान में लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान फिलहाल बचाव व राहत पर है और फिर उसके बाद पुनर्वास सहित अन्य मोर्चों पर लगा जाएगा।
सैकड़ों लोगों के मलबों में फंसे होने की आशंका
वायनाड जिले में मंगलवार तड़के कई जगहों पर हुईं, भूस्खलन की घटनाओं में मौत की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। राहुल जहां 70 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात कह रहे हैं, वहीं अन्य सोर्स अलग संख्या की पुष्टि कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग घायल हैं और सैकड़ों अन्य लोगों के अभी भी मलबों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

वायनाड भूस्खलन के बचाव कार्य में तैनात जवान।
जॉन ब्रिटास ने कहा- भूस्खलन की चपेट में आए कई गांव
वायनाड में हुए इस प्राकृतिक हादसे पर राज्यसभा में विभिन्न दलों के नेताओं ने चिंता जताई और सरकार से केरल को जल्द से जल्द आर्थिक और अन्य सहायता मुहैया कराए जाने की मांग की। केरल से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य जॉन ब्रिटास ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है क्योंकि कई गांव भूस्खलन की चपेट में आए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वायनाड में मौजूद हैं और बचाव व राहत कार्यों की स्वयं निगरानी कर रहे हैं। ब्रिटास ने कहा कि मौजूदा समय में केरल को केंद्र सरकार की हर तरीके से मदद की जरूरत है।
वायनाड भूस्खलन पर किस नेता ने क्या कहा?
- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पी संदोष कुमार ने वायनाड के हादसे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की।
- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के अब्दुल वहाब ने कहा कि केरल सरकार के पास कोष की बहुत कमी है इसलिए उसे तत्काल वित्तीय मदद मुहैया कराने की आवश्यकता है।
- कांग्रेस की जे बी माथेर हिशाम ने कहा कि प्रभावितों की संख्या बहुत बड़ी हो सकती है इसलिए सरकार को इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित कर हरसंभव कदम उठाने चाहिए।
- माकपा के ए ए रहीम ने तलाश व राहत अभियान में तेजी लाकर अधिक से अधिक लोगों का जीवन बचाने का अनुरोध किया और कहा कि यह समय केरल को मदद करने का है।
केरल सरकार ने बचाव अभियान के लिए सैन्य मदद मांगी
केरल के वायनाड जिले में हुए विनाशकारी भूस्खलन के मद्देनजर राज्य सरकार ने बचाव कार्यों के लिए भारतीय सेना की सहायता मांगी है। एक रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि 122 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) मद्रास की सेकेंड-इन-कमांड के नेतृत्व में 43 कर्मियों की एक टीम को बचाव प्रयासों में सहायता के लिए तैनात किया गया है। इस टीम में एक चिकित्सा अधिकारी, दो जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) और 40 सैनिक शामिल हैं, जो प्रभावित क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेंगे। राज्य सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के कई दल, दो हेलीकॉप्टर और अन्य बचाव दल वायनाड में भूस्खलन के कारण पूरी तरह से कट गए मुंडक्कई के लिए रवाना हुए हैं।
