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महंगाई डायन खाए जात है! सब्जियों और फलों ने छुड़ाए लोगों के पसीने, देखें रेट लिस्ट; जानें कारण

Vegetables Rate Card: लगातार हो रही बारिश का असर अब सब्जियों के दामों पर भी पड़ने लगा है। बीते कुछ हफ्तों से सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। बरसात और बदलते मौसम के कारण सब्जी और फलों के दाम ने रफ्तार पकड़ ली है, जिसके चलते आम लोगों को रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। आपको इस खास रिपोर्ट में वजह समझाते हैं।

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सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल।

Most Expensive Vegetables: गरीबों की थाली से इन दिनों सब्जी गायब हो गई है। इस वक्त हर गरीब मंहगाई की मार झेल रहा है। सब्जियों और फलों की आसमान छू रही कीमतों को देखकर हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर खाएं तो खाएं क्या? सालों से गरीबी और मंहगाई का मुद्दा उठाकर तमाम पार्टियां और नेता सियासी रोटियां सेकते रहे हैं और आज भी सिलसिला जारी है, लेकिन आज तक गरीबों की मुसीबतों का हल नहीं निकल सका है। बारिश की मार के चलते एक बार फिर सब्जियों और फलों ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

बारिश के चलते लोगों को रुला रही महंगाई

देशभर के अलग-अलग हिस्सों में हो रही भारी बारिश के चलते एक बार फिर महंगाई लोगों को रुला रही है। जिसका असर सब्जियों की कीमतों पर भी पड़ रहा है। बदलते मौसम और बरसात के चलते सब्जी और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसके चलते लोगों को रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। कई राज्यों में प्याज की कीमत 60 रुपये के पार पहुंच गई है, तो लहसुन 300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

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सब्जी मार्केट। (साभार- Freepik)

और भी बढ़ सकते हैं सब्जियों के दाम

उदाहरण के तौर पर हरियाणा का जिक्र किया जाए तो यहां की मंडियों बारिश का भारी असर देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, सिरसा में प्याज के दाम ₹60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि लहसुन की कीमत ₹300 रुपये किलो से अधिक है। इसके अलावा हरी सब्जियों के दामों में भी इजाफा देखने को मिला है। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण सब्जियों के दाम और भी बढ़ सकते हैं। सब्जी दुकानदारों का कहना है कि दाम बढ़ जाने के कारण खरीददारी में कमी आई है। अगर बारिश ऐसे ही होती रही तो अगले कुछ और दिनों तक सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है।

हरियाणा की मंडी में सब्जी की कीमतें

सब्जीकीमत
प्याज60 से 70 रुपये किलो
टमाटर70 से 80 रुपये किलो
आलू40 रुपये किलो
लहसुन300 रुपये किलो
खीरा60 रुपये किलो
अरबी80 रुपये किलो
नींबू150 रुपये किलो
इनके अलावा कई हरी सब्जियों की कीमत दोगुनी से अधिक हो गई हैं। हरियाणा सिरसा की सब्जी मंडी में इस समय प्याज 60 से 70 रुपये किलो, टमाटर 70 रुपये किलो, आलू 40 रुपये किलो, लहसुन 300 रुपये किलो, खीरा 60 रुपये किलो, अरबी 80 रुपये किलो, नींबू 150 रुपये किलो तक बिक रहा है। बारिश की वजह से सब्जियों के दामों में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है। सब्जियों और फल के दामों में आए उछाल के कारण आम जनता को अपनी जेब काफी ढीली करनी पड़ रही है। महंगी सब्जियां होने की वजह से आम लोग आर्थिक नुकसान भी झेल रहे हैं। नौबत यहां तक आ चुकी है कि सब्जियों और फल के दाम दोगुना हो गए हैं।

हर रोज बढ़ रही हैं सब्जियों की कीमत

सिरसा की सब्जी मंडी में आने वाले ग्राहकों का मानना है कि पहले के मुकाबले रोजाना अब सब्जियों और फलों के दामों में बढ़ोतरी हो रही है, जिस वजह से वह पहले के मुकाबले अब कम ही सब्जियां और फल खरीद पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर एक सब्जी और फल के लिए दोगुना रेट देना पड़ रहा है।

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सांकेतिक तस्वीर। (साभार- Freepik)

सरकारें आती हैं और चली जाती हैं, लेकिन गरीब की समस्याएं सिर्फ चुनावी स्टंट बनकर ही रह जाता है। देशभर में बीते कुछ हफ्तों में सब्जियों की कीमत लगातार बढ़ी हैं। लोगों को सब्जियां खाने में संकोच करना पड़ रहा है। सब्जियों के कीमत में उछाल से हर कोई परेशान है।

क्यों लगातार महंगी हो रही हैं सब्जियां?

कहा जा रहा है कि बारिश से फसलों को नुकसान होने से आवक घटी है। बीते 10 सालों में गरीबों के हितों में मोदी सरकार ने कई सारी योजनाएं चलाई, गरीबों के उत्थान के लिए कई तोहफे भी दिए। लेकिन ऐसी परिस्थिति में गरीब इंसान खाए बिना कैसे रहेगा? सब्जियां तो सब्जियों आलू के लिए भी बाजार में जाने से पहले सोचना पड़ रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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