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158 साल पुराना कानून, ट्रंप की जिद और कोर्ट की रोक... अमेरिका में 'जन्मजात नागरिकता' पर क्यों नहीं थम रही जंग?

Birthright Citizenship: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता को सीमित करने वाले नए कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है। मैरीलैंड की जज डेबोरा एल बोर्डमैन ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर का हवाला देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया। आइये इस लेख में पढ़ते हैं आखिर क्या है पूरा मामला?

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क्या अमेरिका में जन्म लेते ही अब नहीं मिलेगी नागरिकता? (फोटो: एआई इमेज)

Birthright Citizenship: अमेरिका में जन्मजात नागरिकता यानी 'बर्थराइट सिटीजनशिप' (Birthright Citizenship) को लेकर कानूनी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। मैरीलैंड स्थित अमेरिकी जिला अदालत की जज डेबोरा एल बोर्डमैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उस नए कार्यकारी आदेश पर अंतरिम रोक (Preliminary Injunction) लगा दी है, जिसके जरिए वे जन्मजात नागरिकता के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रहे थे।

एपी की खबर के मुताबिक अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में दायर सामूहिक याचिका (Class-action lawsuit) पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक यह रोक लागू रहेगी। जज बोर्डमैन ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की नजीर का जिक्र करते हुए साफ लिखा कि देश की सर्वोच्च अदालत पहले ही यह तय कर चुकी है कि अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले बच्चे जन्म से ही यहां के नागरिक हैं। अमेरिका में जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था वर्ष 1868 में लागू हुए संविधान के 14वें संशोधन से चली आ रही है।

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इस कानून के खिलाफ

इस कानून के तहत अपवादों को छोड़कर, अमेरिकी सीमा के भीतर जन्म लेने वाले हर बच्चे को स्वतः नागरिकता प्राप्त हो जाती है। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इस व्यवस्था को समाप्त करने की वकालत करते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने एक आदेश जारी कर अवैध या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के बच्चों को नागरिकता न देने का ऐलान किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जून में खारिज कर दिया था। इसके बाद अगस्त में प्रशासन ने एक संशोधित और सीमित आदेश जारी किया।

Photo: AP

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प्रवासी परिवारों के बीच भारी भ्रम और डर का माहौल

इसमें मुख्य रूप से 'बर्थ टूरिज्म' (नागरिकता के उद्देश्य से अमेरिका जाकर बच्चे को जन्म देना) को निशाना बनाया गया था। इसके साथ ही विदेशी दूतावासों से जुड़े लोगों, कुछ विशेष संगठनों या अमेरिका द्वारा 'एलियन एनिमी' माने जाने वाले व्यक्तियों के बच्चों के लिए नागरिकता के नियम कड़े करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इस नए आदेश से अमेरिका में रह रहे प्रवासी परिवारों के बीच भारी भ्रम और डर का माहौल बन गया। प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों जैसे 'वी आर कासा' (We Are CASA), 'असाइलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट' और अन्य संस्थाओं ने परिवारों के साथ मिलकर इसके खिलाफ अदालत की शरण ली।

आदेश पर रोक लगाना जल्दबाजी-सरकारी वकील

याचिकाओं में कहा गया कि प्रशासन 'एलियन एनिमी' की बेहद व्यापक और अस्पष्ट व्याख्या कर रहा है, जिसमें केवल आशंकाओं और गलत जानकारियों का सहारा लिया जा रहा है। कई परिवारों को डर था कि सिर्फ अमेरिका का टिकट खरीदने या दूर के किसी रिश्तेदार का किसी गिरोह से संबंध होने की आशंका मात्र से उनके बच्चों को नागरिकता के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान सरकार के वकीलों ने तर्क दिया कि आदेश पर रोक लगाना जल्दबाजी होगी क्योंकि अभी संबंधित एजेंसियों की ओर से आधिकारिक दिशानिर्देश जारी होने बाकी हैं।

कोर्ट ने खारिज की दलील

लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। जज बोर्डमैन ने कहा कि गाइडलाइंस चाहे जो भी हों, 2026 का यह कार्यकारी आदेश सीधे तौर पर बच्चों की नागरिकता छीनने का निर्देश देता है। इस फैसले के बाद मानवाधिकार संगठनों ने खुशी जताते हुए कहा कि व्हाइट हाउस को यह समझना होगा कि वह बच्चों के संवैधानिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी फैसलों से ऊपर नहीं जा सकता।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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