Tunnels in Gaza City : आतंकवादी संगठन हमास पर इजरायल के हमलों के 20 दिन बीत चुके हैं। हमास के ठिकानों को तबाह करने के लिए इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) उस पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रही है। 7 अक्टूबर के हमास के हमलों के पांच दिनों बाद इजरायल ने गाजा सिटी की घेराबंदी कर दी। इजरायल के टैंक और बख्तरबंद वाहन गाजा सीमा के बेहद करीब हैं। हवाई हमले शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि हमास की सैन्य शक्ति पूरी तरह से खत्म करने के लिए आईडीएफ वहां दाखिल होकर जमीनी हमले करेगी लेकिन अभी तक इजरायल के सैनिक गाजा में दाखिल नहीं हुए हैं और आमने-सामने की लड़ाई नहीं हुई है।
सुरंगों में छिपे हैं करीब 30 हजार लड़ाके?
रिपोर्टों की मानें तो बीते कुछ दिनों में इजरायल की तरफ से 'सर्जिकल स्ट्राइक' की गई है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हमास की ताकत को खत्म करने के लिए आईडीएफ को गाजा सिटी में दाखिल होकर हमास के सुरंगों के उस विशाल नेटवर्क को समाप्त करना होगा जिनमें वे छिपे हुए हैं। ये सुरंग दशकों से हमास के सुरक्षा कवच बने हुए हैं। इजरायल पर हमास का हमला पूरी प्लानिंग से हुई है यह बात तो सामने आ चुकी है। अब यह भी कहा जा रहा है कि जमीनी लड़ाई छिड़ने पर इजरायल के सैनिकों का मुकाबला करने के लिए हमास ने इन सुरंगों में अपनी पूरी तैयारी की है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन सुरंगों में हमास के करीब 30 हजार लड़ाके छिपे हुए हैं।
70 मीटर तक गहरी, दो मीटर चौड़ी हैं ये सुरंगे
गाजा सिटी में सुरंगों का जाल बिछा हुआ है। बताया जाता है कि यहां पर करीब 500 किलोमीटर तक सुरंगों का भंवर और भूलभुलैया है। 13,00 सुरंगें कहां खुलेंगी और किस स्थान पर बंद होंगी, इनके ओर-छोर का पता केवल हमास के सदस्यों को है। फिलिस्तीन के कुछ नागरिकों को भी इनके बारे में जानकारी हो सकती है। ये सुरंगें 70 मीटर तक गहरी और इनकी चौड़ाई और ऊचाई दो मीटर तक है। बताया जाता है कि गाजा सिटी में सुरंगों का निर्माण 1980 के दशक में शुरू हुआ लेकिन 2007 में इस शहर पर इजरायल की नाकेबंदी बढ़ने के बाद इनके निर्माण में तेजी आ गई।
हमास के लिए लाइफलाइन मानी जाती हैं ये सुरंगे
गाजा के लोगों और हमास के आतंकियों के लिए ये सुरंगें लाइफलाइन मानी जाती हैं। इन सुरंगों में दवा, खाद्य सामग्री, उपकरणों सहित जरूरत के सभी सामान रखे गए हैं। कहा जाता है कि कुछ सुरंगे मिस्र सीमा के पास खुलती हैं जहां से वस्तुओं की तस्करी कर लाया जाता है। 2013 से पहले सीमा पार से तस्करी पर रोक लगाने के लिए मिस्र ने 12 किलोमीटर लंबे गाजा-इजिप्ट सीमा पर कार्रवाई की। उस समय यहां 2,500 सुरंगें होने का पता चला। इन सुरंगों के जरिए कम से कम 500 टन स्टील और 3,000 टन सीमेंट रोजाना गाजा पहुंचाया जाता था।
सुरंगों की सटीक लोकेशन पता करना आसान नहीं
हमास के लिए इन सुरंगों के महत्व को देखते हुए आईडीएफ की शीर्ष प्राथमिकता इन्हें नेस्तनाबूद करने की है। इजरायल इन सुरंगों को पूरी तरह से बर्बाद करना चाहता है लेकिन इन सुरंगों तक पहुंचने के लिए उसे जमीनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी और इसमें उसका जोखिम बढ़ जाएगा। आईडीएफ के लिए सबसे बड़ी समस्या इन सुरंगों की सटीक जानकारी जुटाना है। सुरंगें कहां-कहां पर हैं यह जानकारी जुटाना भूसे के ढेर में सूई ढूंढना जैसा है। इजरायल जो कि टेक्नॉलजी में इतना आगे है उसके पास इन सुरंगों की सटीक जानकारी नहीं है। इनके बारे में वही पुख्ता जानकारी दे सकता है जो इन सुरंगों में आता-जाता हो।
सुरंगों में है हमास के हथियारों का जखीरा
सुरंगों की स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद भी यहां जमीनी ऑपरेशन एवं हमले करना आसान नहीं है। ऐसे में जब हमास को पहले से पता है कि आईडीएफ ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर सकता है तो जवाबी कार्रवाई एवं मुकाबले की तैयारी उसने पहले से की होगी। यही नहीं आईडीएफ के सैनिक सुरंगों के भंवर विशाल नेटवर्क में फंस सकते हैं। सुरंगों के भीतर लड़ाई में आईडीएफ पर हमास के लड़ाके भारी पड़ सकते हैं और बड़ी संख्या में इजरायली सैनिक हताहत हो सकते हैं। बंकर को नष्ट करने वाले बमों से इन सुरंगों पर हमला किया जा सकता है लेकिन इससे आम लोगों के मारे जाने का खतरा ज्यादा है। कहा जाता है कि सुरंगों में हमास ने अपने रॉकेट और अन्य खतरनाक हथियारों का जखीरा रखा है। इनमें उसने हेडक्वार्टर, कंट्रोल रूम और लॉजिस्टिक सेंटर बनाए हैं।
