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13000 फीट की ऊंचाई, LAC फास्ट आर्मी मूवमेंट...;सेला सुरंग ने कैसे बढ़ा दी चीन की टेंशन? PM Modi आज करेंगे उद्घाटन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 9, 2024, 06:29 AM IST

Sela Tunnel Explainer : असम के तेजपुर को अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के तवांग से जोड़ने वाली सड़क पर सेला सुरंग (Sela Tunnel) तवांग क्षेत्र के लिए हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट होने के कारण सेला सुरंग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह सुरंंग दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सुरंग होगी।

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सेला टनल का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी

Photo : Twitter

Sela Tunnel Explainer : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) आज अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। वह यहां कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने वाले हैं, जिसमें सेला सुरंग परियोजना (Sela Tunnel Project) भी शामिल है। यह सुरंग सिर्फ अरुणाचल प्रदेश के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय सेना (Indian Army) के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सुरंग से चीन बॉर्डर (China Border) पर आर्मी मूवमेंट फास्ट होगा और भारत की ड्रैगन तक पहुंच और भी ज्यादा आसान हो जाएगी। खास बात यह है कि यह सुरंग चीन (China) की सीमा से लगे तवांग को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास होने के कारण सेला सुरंग (Sela Tunnel) भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, यह सुरंग तवांग जिले को अरुणाचल प्रदेश के उन हिस्सों से जोड़ती है, जो अक्सर बर्फबारी और भूस्खलन के कारण बंद रहते थे। अब इस सुरंग से तवांग जिले तक अर मौसम में पहुंच बनी रहेगी।

दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सुरंग

825 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सेला सुरंग परियोजना में दो सुरंगें और 8.780 किमी लंबी सड़क शामिल है। सुरंगों और लिंक सड़कों समेत परियोजना की कुल लंबाई करीब 12 किमी है। दो सुरंगों में से, पहली 980 मीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग है। दूसरी 1.5 किमी लंबी है, जिसमें आपात स्थिति के लिए एक एस्केप ट्यूब है। जानकारी के मुताबिक, सेला-चारबेला रिज से होकर गुजरने वाली और न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) से निर्मित यह सुरंग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सुरंग होगी।

2019 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

इस सुरंग की खुदाई 13 हजार 800 फीट सेला दर्रे के नीचे की गई है, जो तवांग जिले को अरुणाचल प्रदेश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यह अक्सर बर्फबारी और भूस्खलन के कारण बंद रहता है। सुरंग पूरे साल तवांग और चीन की सीमा से लगे अन्य क्षेत्रों तक पहुंच प्रदान करेगी, जिससे भारतीय सेना को भी काफी मदद मिलेगी। एक अधिकारी ने बताया कि सुरंग के अंदर कई तरह के सुरक्षा उपाय किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट की नींव फरवरी 2019 में रखी थी। कोरोनावायरस महामारी समेत कई कारणों के चलते सुरंग के काम में देरी हुई। सेला सुरंग की अहमियत को इसी बात से समझा जा सकता है कि इस टनल के पूरा बनने के बाद तवांग के जरिए चीन सीमा तक की दूरी 10 किलोमीटर तक घट जाएगी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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