Amethi Lok Sabha Chunav: राहुल गांधी और स्मृति ईरानी एक बार फिर अमेठी में आमने सामने होंगे, तो दोनों की राह इस बार आसान नहीं होगी। इस बार अमेठी का समीकरण बेहद अलग है, अगर भाजपा इस सीट पर लगातार दूसरी बार जीत हासिल करती है तो यहां एक नया सियासी इतिहास रचा जाएगा। हालांकि राहुल और कांग्रेस को कमजोर समझना किसी बड़ी लापरवाही से कम रही होगी।
स्मृति Vs राहुल की जंग, कितना बदला समीकरण?
भाजपा ने अमेठी से स्मृति ईरानी को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी है। अब राहुल गांधी एक बार फिर कांग्रेस के उम्मीदवार होते हैं, तो मुकाबले की तस्वीर थोड़ी अलग हो जाएगी। अमेठी में इस तरह वो फैक्टर काम कर सकता है कि भाजपा को इस सीट पर कभी भी दोबारा जीत हासिल नहीं होती है। स्मृति ईरानी ने अमेठी में अपना घर बनवा लिया है, मगर इस सीट को गांधी परिवार का गढ़ कहा जाता है। राहुल अगर दोबारा यहां से चुनाव लड़ते हैं तो वो इस बात का संदेश देने की कोशिश करेंगे कि अपने गढ़ में हार मिलने के बाद भी उनके इरादे कमजोर नहीं हुए हैं।
हार के बावजूद अमेठी से चुनाव लड़ेंगे राहुल गांधी?
अमेठी जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया है कि पार्टी नेता राहुल गांधी 2024 का लोकसभा चुनाव अमेठी से लड़ेंगे। नई दिल्ली में हुई एक अहम बैठक के बाद लौटे कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने बुधवार को बताया कि राहुल गांधी ही अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार होंगे जिसकी घोषणा जल्द हो जाएगी। सिंघल ने बताया कि चुनाव की तैयारी शुरू कर दी गयी हैं, कार्यकर्ता अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाने की तैयारी कर रहे हैं। राहुल गांधी 2004 से 2019 तक अमेठी से सांसद रहे। वह 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता स्मृति ईरानी से चुनाव हार गये थे। राहुल इस समय केरल के वायनाड से सांसद हैं।
क्या कहता है अमेठी का सियासी इतिहास?
अमेठी में 16 बार हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को महज तीन बार बार झेलनी पड़ी है। यही नहीं इस सीट के सियासी इतिहास का जिक्र करें तो एक भी बार भाजपा यहां से दोबारा जीत हासिल नहीं कर पाई। ये फैक्टर निश्चित तौर पर स्मृति ईरानी की चिंता में इजाफा करेगा। यही वजह है कि स्मृति यहां तमाम कोशिशें कर रही हैं। चुनाव से पहले अमेठी में घर बनवाकर उन्होंने सियासी संदेश दिया। हालांकि डॉ. संजय सिंह और रवींद्र प्रताप सिंह का अमेठी निवासी फैक्टर उन्हें इस सीट से दोबारा जीत दिलाने में कारगर साबित नहीं हुआ था।
गांधी परिवार का गढ़ क्यों कहा जाता है अमेठी?
पहली बार अमेठी में हुए लोकसभा चुनाव 1967 में कांग्रेस के वी डी वाजपेयी को जीत हासिल हुई थी। गांधी परिवार से ताल्लुक रखने वाले और इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को 1977 में इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि तीन साल बाद ही 1980 में उन्हें प्रचंड जीत हासिल हुई। इसके एक साल बाद ही सियासत में राजीव गांधी ने अपनी एंट्री करते हुए 1981 में इस सीट से जीत हासिल की। इस सीट से राजीव गांधी चार बार लोकसभा सदस्य रहे। फिर सोनिया गांधी एक बार और राहुल गांधी तीन बार अमेठी के सांसद रहे। मतलब 16 बार हुए लोकसभा चुनाव में से 9 बार यहां गांधी परिवार का कब्जा रहा।
राहुल गांधी अपनी न्याय यात्रा लेकर हाल ही में अमेठी पहुंचे थे, हैरानी की बात ये है कि तीन बार यहां से सांसद रहे राहुल दो साल बाद अमेठी आए थे, लेकिन उनमें अपने लोगों के प्रति पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखी। राहुल की यात्रा में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखी, जब वो यहां के सांसद रहते हुए इस क्षेत्र में आते थे। 2021 में स्मृति ईरानी ने अपना घर बनवाने के लिए 11 बिस्वा जमीन खरीदी थी। अब इस जमीन पर उन्होंने अपना आशियाना बनवाया है। साल 2021 में ही स्मृति के बेटे ने भूमि पूजन कर आवास की नींव रखी थी। चुनाव के ठीक पहले वह अपने नए घर में प्रवेश कर गई हैं। जो कांग्रेस की राह की मुश्किलें बढ़ाने में भरपूर भूमिका अदा करेगी।
स्मृति ने अमेठी में हर अपना घर बनवाकर इस सीट का समीकरण काफी हद तक बदल दिया है। अगर इतिहास बदल जाए और लगातार इस सीट पर भाजपा दो बार जीत हासिल कर ले तो हैरानी नहीं होगी। हालांकि सियासत में कभी भी कुछ भी हो सकता है, राहुल गांधी या स्मृति इरानी कौन जीतेगा इसका फैसला जनता को तय करना है, असल तस्वीरें तो चुनावी नतीजों में ही साफ होंगी।
