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प्राइवेट स्पेस क्षेत्र में भारत की ऊंची उड़ान, स्काईरूट के विक्रम-1 ने रचा इतिहास, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुई सफल लॉन्चिंग

विक्रम-1 तीन ठोस ईंधन (सॉलिड-फ्यूल) चरणों और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से संचालित रॉकेट है। यह मिशन 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 60 डिग्री झुकाव (इंक्लिनेशन) के साथ 350 किलोग्राम तक के पेलोड को स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

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श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से हुई लॉन्चिंग।

Photo : ANI

Vikram-1 launched : अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने 18 जुलाई को इतिहास रच दिया। भारत की पहली निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित ऑर्बिट क्लास के रॉकेट विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस रॉकेट को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। बता दें कि विक्रम-1 तीन ठोस ईंधन (सॉलिड-फ्यूल) चरणों और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से संचालित रॉकेट है। यह मिशन 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 60 डिग्री झुकाव (इंक्लिनेशन) के साथ 350 किलोग्राम तक के पेलोड को स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

PM मोदी ने दी शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं की प्रतिभा, संकल्प और उद्यमशीलता की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों से नवाचार और निजी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने है। प्रधानमंत्री ने Skyroot Aerospace की पूरी टीम को सफल लॉन्च के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि Vikram-1 नई ऊंचाइयों को छुए, इतिहास रचे और आने वाली पीढ़ी के इनोवेटर्स को प्रेरित करे। उन्होंने देशवासियों, खासकर युवाओं से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक मिशन को देखें और Team Skyroot की सफलता की कामना करें।

रॉकेट की तकनीकी ताकत

विक्रम-1 सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा, बहु-चरणीय ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसे पूरी तरह कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है। इसमें 3D-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल रॉकेट बूस्टर लगे हैं। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट्स को पृथ्वी की निचली कक्षा तक पहुंचाने में सक्षम है, और अपनी पहली उड़ान में यह 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर 60 डिग्री के झुकाव वाली कक्षा में पहुंचने का लक्ष्य रखेगा।

कई तकनीक-प्रदर्शन पेलोड्स भी भेजे गए

इस रॉकेट में कई तकनीक-प्रदर्शन पेलोड्स भी भेजे गए हैं। भारतीय अर्थ-ऑब्जर्वेशन नैनोसैटेलाइट कंपनी ग्रह स्पेस, स्पेस डेब्रिस हटाने वाली कंपनी कॉस्मोसर्व, और स्काईरूट का अपना SCOPE पेलोड शामिल है। दरअसल, अब तक भारत में कोई भी निजी कंपनी ऑर्बिट तक पहुंचने में कामयाब नहीं हुई है। स्काईरूट पहले भी इतिहास रच चुकी है। 2022 में इसके सबऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस ने भारत की पहली निजी अंतरिक्ष उड़ान का खिताब हासिल किया था लेकिन ऑर्बिटल लॉन्च एक बिल्कुल अलग चुनौती है और यह टाइमिंग भी बेहद अहम है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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