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महाराष्ट्र में शिंदे ही बॉस! पवार और फडणवीस में किसको मिलेगी पावर? या बदलेगा गेम

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Jul 11, 2023, 10:15 PM IST

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सरकार में अचानक अजित पवार की एंट्री ने विधानसभा की तस्वीर ही बदल कर रख दी है। तमाम कयासों का दौर भी चल रहा है, कि क्या शिंदे अजित पवार के साथ मिलकर सरकार चला सकेंगे? अजित पवार को कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा?

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Maharashtra Politics on Shinde Cabinet Expansion

Maharashtra Politics on Shinde Cabinet Expansion: महाराष्ट्र की सरकार में अचानक अजित पवार की एंट्री ने विधानसभा की तस्वीर ही बदल कर रख दी है। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात 12 बजे डिप्टी सीएम अजित पवार, सीएम एकनाथ शिंदे के बंगले पर पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे बाद वहां से निकले, तो दूसरी तरफ देवेंद्र फडणवीस भी रात करीब 11:15 सीएम शिंदे के आवास पर पहुंचे और अजित पवार के जाने के आधे घंटे बाद रात 2 बजे निकले। माना जा रहा है कि सीएम शिंदे और दोनों डिप्टी सीएम विभाग बंटवारे को सुलझाने में तेजी दिखा रहे हैं। यही वजह है कि सीएम आवास में एक सीक्रेट मीटिंग हुई। इस सीक्रेट मीटिंग का क्या निष्कर्ष निकला यह अभी सामने आना बाकी है, लेकिन अंदरखाने से खबर यही है कि यह बैठक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर थी।

महाराष्ट्र सरकार की त्रिकोणीय तस्वीर

महाराष्ट्र की सरकार में जहां कुछ समय पहले तक सरकार में दो बड़े भागीदार थे, वहां अब अजित पवार के आने के बाद संघर्ष त्रिकोणीय हो गया है। तमाम कयासों का दौर भी चल रहा है, कि क्या शिंदे अजित पवार के साथ मिलकर सरकार चला सकेंगे? अजित पवार को कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा? इन सब सवालों के बीच एक सबसे बड़ा सवाल यह भी चल रहा है कि क्या देवेंद्र फडणवीस का मंत्रालय अजित जो दे दिया जाएगा?

महाराष्ट्र की सियासत में अजित

जाहिर है अजित पवार के सरकार में आने से महाराष्ट्र की सियासत और भी मजबूत होती नजर आ रही है। तो वहीं शिंदे गुट के नेताओं का इस हलचल में नुकसान न के बराबर माना जा रहा है, लेकिन अजित पवार की एंट्री से देवेंद्र फडणवीस पर असर जरूर देखने को मिल सकता है। बीते कुछ समय से फडणवीस के प्रदर्शन को लेकर पार्टी आलाकमान भी काफी चिंतित नजर आ चुकी है। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक ऐसी खबरें भी सामने आयीं जिनके मुताबिक एकनाथ शिंदे कभी भी राज्य के सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन इस खबर को खुद शिंदे ने ही फेक करार दिया। उनके मुताबिक वो ही महाराष्ट्र के बॉस हैं और आगे भी रहेंगे। शिंदे का कहना है कि उनका गुट उनके साथ है और इस समय उनका सियासी रसूख जितना है, उतना किसी का नहीं।

महाराष्ट्र में सरकार की उलटफेर और शिंदे के सीएम बनने के बाद फडणवीस को डिप्टी सीएम का पद मिला। इसके बाद पार्टी ने इस बात को लेकर विचार किया कि आने वाले जो चुनाव होंगे फडणवीस का चेहरा उसमें काफी मददगार साबित होगा, लेकिन बीते साल अक्टूबर महीने में अंधेरी ईस्ट सीट पर जो उपचुनाव हुआ, वहां MVA ने अपनी तरफ से रितुजा लटके को उम्मीदवार बनाया तो वहीं बीजेपी ने मुर्जी पटेल को अपना चेहरा बनाया। प्रचार के जोर में जो तस्वीर सामने आई उसके बाद बीजेपी ने अपने कैंडिडेट के नाम को वापस ले लिया।

फडणवीस पर क्या होगा असर?

चुनावी पंडितों की नजर में फडणवीस का यह पहला टेस्ट था। इसके बाद फरवरी 2023 के चुनाव में तो सब कुछ उम्मीद से उलट हो गया। इस दौरान परिषद के जो चुनाव हुए उसमें पांच सीटों पर MVA ने तीन सीटें अपने पाले में कर लीं। बीजेपी के हाथ से नागपुर और अमरावती की सीटें भी निकल गईं। नागपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और अमरावती स्नातक क्षेत्र फडणवीस का गढ़ माना जाता है। ऐसे में माना यही जा रहा था कि बीजेपी के हिस्से आने वाली इन दो सीटों को कोई अपने पाले में नहीं ले सकता, लेकिन नतीजे कुछ और ही निकले।

इसके बाद मार्च 2023 में पुणे की कस्बा पेठ और पिंपरी चिंचवाड़ की दोनों सीटें भी बीजेपी के हाथ से निकल गयीं, जिसमें पेठ सीट पर तो बीजेपी ने तीस साल से कब्जा जमा रखा था। ऐसे में इन सभी प्रदर्शनों पर अगर गौर करें तो फडणवीस को लेकर मंत्रिमंडल विस्तार के समय संशय बढ़ता हुआ ही नजर आता है। माना यही जा रहा है कि उनके विभागों पर कैंची चल सकती है और अजित की मांगों पर मुहर लग सकती है।

अजित पवार ने गुट ने मांगे ये विभाग?

बता दें कि अजित पवार गुट वित्त के साथ ही सहकारिता मंत्रालय की मांग कर रहा है। यह एनसीपी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दर्जन भर से अधिक एनसीपी नेता सहकारी या निजी चीनी कारखाने चला रहे हैं। साथ ही उनका सहकारी बैंकों पर भी नियंत्रण है। उन्हें दोनों क्षेत्रों में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर उनके पास सहकारी मंत्रालय होगा तो उनकी समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।

कुल मिलाकर अभी तक की कहानी यही नजर आती है कि फडणवीस के विभागों पर सबकी नजर है। अजित अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. लेकिन इस सब के बीच शिंदे मजबूती से महाराष्ट्र की कमान साधे हुए हैं। हालांकि यह राजनीति है... ऊंट कब किस ओर करवट ले ले यह किसको खबर, अंतिम तस्वीर अभी आना बाकी है और तब तक कयासों का दौर अपनी रफ्तार में है।

कुलदीप राघव
कुलदीप राघव author

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर... और देखें

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