एक्सप्लेनर्स

शराब घोटाले में केजरीवाल के फंसने, गिरफ्तार होने से लेकर जेल से रिहा होने तक; देखें पूरी टाइमलाइन

Arvind Kejriwal Jail to Bail: शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। 2 जून को सरेंडर करने के बाद से केजरीवाल जेल की सलाखों के पीछे थे। अब वो तिहाड़ से बाहर आ चुके हैं। आपको इस मामले में केजरीवाल से जुड़ी पूरी टाइमलाइन बताते हैं कि कब क्या हुआ।

Image

अरविंद केजरीवाल।

Excise Policy Scam Case Timeline: आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में घटनाक्रम इस प्रकार है, जिसमें उच्च्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी। और वो जेल से रिहा हो गए हैं। क्या आप जानते हैं कि शराब घोटाले में केजरीवाल का नाम कब आया, वो कब गिरफ्तार हुए, कब जमानत मिली, उन्होंने कब दोबारा सरेंडर किया। नीचे देखिए पूरी टाइमलाइन...।

नवंबर 2021: दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति पेश की।

जुलाई 2022: उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने नीति बनाने और लागू करने में कथित अनियमितताओं के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की।

अगस्त 2022: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित अनियमितताओं के संबंध में मामले दर्ज किए।

सितंबर 2022: दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति को रद्द कर दिया।

अक्टूबर 2023 से मार्च 2024: ईडी ने धन शोधन मामले के संबंध में केजरीवाल को नौ समन जारी किए।

21 मार्च, 2024: दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जारी किए गए समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करने से इनकार कर दिया। इसके तुरंत बाद ईडी ने आम आदमी पार्टी (आप) नेता को गिरफ्तार कर लिया।

10 मई: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दी और कहा कि उन्हें दो जून को आत्मसमर्पण करना होगा और वापस जेल जाना होगा।

20 जून: निचली अदालत ने केजरीवाल को नियमित जमानत दी।

21 जून: ईडी ने निचली अदालत के जमानत आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने एजेंसी की याचिका पर नोटिस जारी किया, स्थगन के मुद्दे पर घोषणा होने तक जमानत आदेश को स्थगित कर दिया।

25 जून: उच्च न्यायालय ने धन शोधन मामले में निचली अदालत द्वारा केजरीवाल को दी गई जमानत पर रोक लगा दी।

26 जून: सीबीआई ने आबकारी नीति से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में केजरीवाल को औपचारिक रूप से जेल से गिरफ्तार किया।

17 मई: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।

12 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने कथित आबकारी नीति ‘घोटाले’ में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी। लेकिन कहा गया कि सीबीआई मामले में वह जेल में ही रहेंगे।

17 जुलाई: केजरीवाल ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई द्वारा अपनी गिरफ्तारी को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

5 अगस्त: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई द्वारा केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखा।

12 अगस्त: केजरीवाल ने भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई द्वारा उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

14 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने आबकारी नीति घोटाला मामले में गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया।

5 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा।

11 सितंबर: दिल्ली की अदालत ने आबकारी घोटाला मामले में केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 25 सितंबर तक बढ़ा दी।

13 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देते हुए कहा कि लंबे समय तक जेल में रखना स्वतंत्रता से अन्यायपूर्ण तरीके से वंचित रखना है।

13 सितंबर: दिल्ली की एक अदालत ने आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाला मामले में केजरीवाल के रिहाई के आदेश जारी किए।

13 सितंबर: अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। जेल के बाहर केजरीवाल के समर्थकों ने जमकर उत्साह मनाया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article