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I.N.D.I.A. में फूट! ऐसे चलता रहा तो 2024 चुनाव तक बिखर जाएंगे सारे दल

Internal War In 'INDIA': विपक्षी पार्टियों के गठबंधन 'इंडिया' में दरार पड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। एकता का राग अलापने वाली पार्टियों ने अब एक-दूसरे के लिए गड्ढे खोदने शुरू कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी बनाम कांग्रेस और कांग्रेस बनाम टीएमसी की लड़ाई अब खुलकर सामने आने लगी है। आखिर ये सिलसिला चलता रहा तो आगे क्या होगा?

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क्या सिर्फ दिखावे के लिए है विपक्षी गठबंधन 'INDIA' की एकता?

Photo : ANI

Lok Sabha Chunav 2024: आगामी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही विपक्षी पार्टियों के गठबंधन में भीतरी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। 'NDA' vs 'INDIA' की लड़ाई से पहले ही 'इंडिया' की आपसी लड़ाई शुरू हो चुकी है। गठबंधन के तीन बड़े दल कांग्रेस, टीएमसी और आम आदमी पार्टी में मनमुटाव अब साफ-साफ दिखने लगे हैं। जिसका बड़ा नुकसान आगामी चुनावों में झेलना पड़ सकता है। केजरीवाल ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला तो कांग्रेस ने दीदी के टीएमसी में सेंध लगाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। आपको समझाते हैं कि आखिर किन-किन राज्यों में इंडिया का अस्तित्व खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।

केजरीवाल के किस कदम से भड़की कांग्रेस?

कांग्रेस और आप के बीच खींचतान उस वक्त तेज हो गई, जब आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने छत्तीसगढ़ में गठबंधन के सहयोगी दल को घेरना शुरू कर दिया। केजरीवाल ने छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार की और राज्य के स्कूलों की स्थिति की खूब आलोचना की। सीएम केजरीवाल के बयान के बाद कांग्रेस भड़क गई, बारी-बारी से कई नेताओं ने पलटवार करना शुरू कर दिया।

कांग्रेस ने केजरीवाल को दे दी खुली चुनौती

छत्तीसगढ़ में केजरीवाल के बयान के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन्हें खुली चुनौती दे दी है। उन्होंने नसीहत दी कि AAP सरकार के प्रदर्शन की तुलना पिछली शीला दीक्षित सरकार के साथ करना चाहिए। खेड़ा ने कहा कि 'अगर अरविंद केजरीवाल तैयार हैं तो दिल्ली में कांग्रेस की पूर्व सरकार बनाम वर्तमान AAP सरकार के प्रदर्शन पर बहस की जा सकती है। उन्हें रायपुर की फ्लाइट लेने से पहले दिल्ली पर बात करनी चाहिए, जो शहर रसातल में जाता दिख रहा है।'

इससे पहले केजरीवाल की पुरानी सहयोगी वर्तमान में कांग्रेस नेता अलका लांबा के बयान ने भी दोनों पार्टियों के बीच तनाव को उजागर किया था। लांबा ने दावा किया था कि दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों से कांग्रेस चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच बवाल कहीं न कहीं विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डिवेलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (I.N.D.I.A) के लिए बड़ी चिंता है।

कांग्रेस और टीएमसी के बीच भी मनमुटाव

पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस बनाम टीएमसी की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। लोकसभा चुनाव से पहले ही दोनों पार्टियां एक दूसरे को कमजोर करने में जुटी हुई हैं। शनिवार को ममता बनर्जी के करीबी कहे जाने वाले यासिर हैदर ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। बता दें, यासिर हैदर ममता सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम के दामाद हैं, जिन्होंने इसी साल तृणमूल कांग्रेस से दूरी बना ली थी। युवा नेता हैदर के बारे में कहा जाता रहा है कि वो ममता बनर्जी के खास रहे हैं।

यासिर हैदर को कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। बीते लंबे वक्त से देखा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी के बीच तनातनी का सिलसिला जारी है। वहीं शनिवार को ही गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ ने भी टीएमसी को अलविदा कह दिया। दावा किया जा रहा है कि वो एनसीपी के अजित पवार गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अब तक अलेमाओ ने इसे लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है।

राजस्थान, एमपी और गुजरात में भी गठबंधन में अनबन

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी तनाव का माहौल है। तीनों राज्यों में आम आदमी पार्टी अकेले किस्मत आजमाने की कोशिश में है। गठबंधन के लिए चिंता इसलिए भी है, क्योंकि अभी लोकसभा चुनाव 2024 का ऐलान तक नहीं हुआ है और मुख्य पार्टियों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र में शरद पवार के कदम को लेकर भी इंडिया में टेंशन बरकरार है। कभी मोदी के साथ मंच साझा करना, तो कभी भतीजे के साथ सीक्रेट मीटिंग ने उनके सहयोगियों को असहज कर दिया है। वहीं बिहार में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मार सकते हैं। देखना होगा कि चुनाव आने तक इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक रहता है या फिर सारे दल बिखर जाएंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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