International Space Station: पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को अब पृथ्वी पर वापस लाने की तैयारी चल रही है। इसका जीवनकाल समाप्त होने वाला है। जिसके बाद इसे धरती पर वापस लाने की तैयारी की जा रही है।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कैसे बना
अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को अमेरिका, जापान, कनाडा और रूस ने मिलकर बनाया है। इसे अंतरिक्ष में स्थापित करने में 12 साल का समय लगा था। तब करीब 80 रॉकेट्स के साथ इसके पार्ट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया था, जहां से इसे सेट किया गया था। इसे बनाने का कार्य 1998 से लेकर 2010 तक चला था। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बारे में तो हर कोई जानता है। यह 20 वर्षों से अधिक समय से पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगा रहा है। यह पृथ्वी की सतह से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर 7.66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से यात्रा कर रहा है। इस गति से, आईएसएस को एक कक्षा पूरी करने में लगभग 90 मिनट लगते हैं।
ISS का क्या है काम
यहां अमेरिका, जापान, कनाडा, यूरोपीय एजेंसी समेत 15 देशों के वैज्ञानिक रहकर रिसर्च करते हैं। पृथ्वी की ओर आ रहे खतरे पर नजर रखते हैं, अंतरिक्ष के घटनाक्रम पर नजर रखते हैं। यहां रहकर वो उन खतरों का समाधान खोजते हैं, जिसे पृथ्वी पर रहकर करना नामुमकिन होता है।
ISS का जीवन काल
मूल रूप से 15 साल के जीवनकाल के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को कमीशन किया गया था। जिस पर वो खरा उतरा है। स्पेस स्टेशन पिछले 23 साल से अंतरिक्ष में मौजूद है, अब नासा ने इसे एक दशक के लिए और आगे बढ़ा दिया है, लेकिन उस समय तक पहुंचते-पहुंचते शायद ही अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की उतना महत्व रह जाएगा, एक तो इसका जीवन काल खत्म हो जाएगा, दूसरा कई देश खुद का अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की तैयारी में हैं। रूस, चीन के बाद अब भारत भी इसकी तैयारी में है।
कैसे पृथ्वी पर वापस आएगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन
नासा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को 2031 में आधिकारिक तौर पर बंद करने की योजना की घोषणा की है। 1998 के बाद से दर्जनों प्रक्षेपणों के बाद स्टेशन को ऊपर और कक्षा में स्थापित करने के बाद, इसे नीचे लाना अपने आप में एक उपलब्धि होगी। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को पूरी तरीके से सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना लगभग नामुमकिन है और काफी महंगा भी। इसके कुछ जरूरी पार्ट्स जरूर नासा पृथ्वी पर लाने की कोशिश करेगा। बाकि बचे स्पेस स्टेशन को डीकमीशनिंग ऑपरेशन के जरिए नासा, प्रशांत महासागर में गिरा सकता है। इस जगह को अंतरिक्ष यान के कब्रिस्तान के रूप में जाना जाता है।
