Mukhtar Ansari News:पूर्वांचल में एक समय तक आतंक का दूसरा नाम मुख्तार अंसारी था। 80 के दशक में ही वह अपराध की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम बन चुका था। धीरे-धीरे उसकी राजनीति में एंट्री हुई, इसके बाद मुख्तार अंसारी ने क्राइम और पॉलिटिक्स का ऐसा कॉकटेल तैयार किया किया कि प्रशासन उस पर हाथ भी नहीं डाल सका। समय का चक्र बदला और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त मुख्तार अंसारी सलाखों के पीछे पहुंच गया, उसे उम्रकैद की सजा भी हुई।
मुख्तार अंसारी के खिलाफ हत्या से लेकर जबरन वसूली तक के 65 मामले दर्ज थे। इसके बावजूद वह विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर पांच बार विधायक चुना गया। बीती रात बांदा के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मुख्तार अंसारी की मौत हो गई और इसी के साथ अपराध और राजनीति के साथ उसके गठजोड़ के एक अध्याय का अंत हो गया। आइए पढ़ते हैं कहानी मुख्तार अंसारी की....
15 की उम्र में अपराध की दुनिया में रखा पहला कदम
साल 1963 में जन्मे मुख्तार अंसारी ने उत्तर प्रदेश में पनप रहे सरकारी ठेका माफियाओं में खुद को और अपने गिरोह को स्थापित करने के लिए अपराध की दुनिया में प्रवेश किया। साल 1978 की शुरुआत में महज 15 साल की उम्र में अंसारी ने अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा था। उसके खिलाफ IPCकी धारा 506 के तहत गाजीपुर के सैदपुर थाने में पहला मामला दर्ज किया गया था। इसके लगभग एक दशक बाद 1986 में वह जाना-पहचाना चेहरा बन चुका था, तब तक उसके खिलाफ गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत एक और मामला दर्ज हो चुका था।
क्राइम से जब राजनीति में हुई एंट्री
अगले एक दशक में मुख्तार अंसारी अपराध की दुनिया में अपने कदम जमा चुका था। यह वह वक्त था जब उसके खिलाफ जघन्य अपराध के तहत कम से कम 14 और मामले दर्ज हो चुके थे। हालांकि अपराध में बढ़ता अंसारी का कद राजनीति में उसके प्रवेश में बाधा नहीं बन सका और अंसारी पहली बार 1996 में मऊ से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर विधायक चुना गया था। इसके बाद उसने 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में इस सीट पर अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा। साल 2012 में, अंसारी ने कौमी एकता दल (क्यूईडी) बनाया और मऊ से फिर से जीत हासिल की। 2017 में उन्होंने फिर से मऊ से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। साल 2022 में मुख्तार ने अपने बेटे अब्बास अंसारी के लिए सीट खाली कर दी।
जेल में भी बढ़ता गया क्राइम का ग्राफ
साल, 2005 में मुख्तार अंसारी सलाखों के पीछे पहुंच गया। हालांकि, जेल से भी उसका अपराध का साम्राज्य चलता गया। जेल में रहते हुए उसके खिलाफ हत्या और गैंगस्टर अधिनियम के तहत 28 मामले दर्ज थे और सितंबर 2022 से आठ आपराधिक मामलों में उसे दोषी ठहराया गया था। वह पिछले 19 सालों से उत्तर प्रदेश और पंजाब की विभिन्न जेलों में बंद रहा। फिलहाल मुख्तार अंसारी पर विभिन्न अदालतों में 21 मुकदमे लंबित थे।
जब-जब हुई मुख्तार अंसारी को सजा
- 37 साल पहले धोखाधड़ी से हथियार लाइसेंस प्राप्त करने के एक मामले में इस महीने की शुरुआत में वाराणसी की अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 2.02 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। सितंबर 2022 से लेकर पिछले 18 महीनों में यह आठवां मामला था, जिसमें उन्हें उत्तर प्रदेश की विभिन्न अदालतों ने सजा सुनाई थी और दूसरा मामला जिसमें उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
- 15 दिसंबर, 2023 को, वाराणसी की एक सांसद/विधायक अदालत ने भाजपा नेता और कोयला व्यापारी नंद किशोर रूंगटा के अपहरण व हत्या के मामले में अंसारी को पांच साल, छह महीने की सजा सुनाई थी ।
- 27 अक्टूबर, 2023 को, गाजीपुर सांसद/विधायक अदालत ने 2010 में उनके खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में उन्हें 10 साल के कठोर कारावास और पांच लाख रूपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
- 05 जून, 2023 को वाराणसी की एक सांसद/विधायक अदालत ने पूर्व कांग्रेस विधायक और वर्तमान उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या के मामले में अंसारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
- 29 अप्रैल 2023 को गाजीपुर सांसद/विधायक अदालत ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में अंसारी को 10 साल कैद की सजा सुनाई थी।
- 23 सितंबर, 2022 को पूर्व विधायक के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में 1999 में गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अंसारी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और 50,000 रूपये का जुर्माना लगाया था।
- 15 दिसंबर, 2022 को गाजीपुर सांसद/विधायक अदालत ने उनके खिलाफ 1996 और 2007 में गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों में उन्हें 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी और प्रत्येक मामले में 5-5 लाख रूपये जुर्माना लगाया था।
- पिछले 13 महीनों में अंसारी को पहली सजा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सुनाई थी। 2003 में लखनऊ जिला जेल के जेलर को धमकी देने के आरोप में उन्हें 21 सितंबर, 2022 को सात साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।
