Monsoon Dampness And Asthma: बारिश का मौसम आते ही घरों में सीलन की समस्या बढ़ने लगती है। कई लोग इसे सिर्फ दीवारों की खराबी या बदबू की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही सीलन और उससे पैदा होने वाली फंगस (कवक) अस्थमा के मरीजों की परेशानी कई गुना बढ़ा सकती है? कई बार लोग सोचते हैं कि बारिश में सांस फूलने या खांसी बढ़ने की वजह सिर्फ मौसम या वायरल संक्रमण है, जबकि असली कारण घर के अंदर छिपी नमी भी हो सकती है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरि बताते हैं कि अगर बारिश के मौसम में अस्थमा बार-बार बिगड़ रहा है, तो घर के अंदर की सीलन और फंगस को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
बारिश में फंगस इतनी जल्दी क्यों पनपती है
डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरि बताते हैं कि बारिश के मौसम में हवा में नमी काफी बढ़ जाती है। अगर घर में कहीं पानी टपक रहा हो, दीवारों में सीलन हो या कमरे में ताजी हवा ठीक से न आती हो, तो फंगस तेजी से फैलने लगती है। यह सिर्फ दीवारों पर ही नहीं, बल्कि लकड़ी के फर्नीचर, पर्दों, कालीन, गद्दों और एयर कंडीशनर के अंदर भी पनप सकती है। कई बार फंगस साफ दिखाई नहीं देती, लेकिन उसके बहुत छोटे-छोटे कण हवा में फैले रहते हैं और सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं।
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अस्थमा के मरीजों के लिए यह क्यों बन जाती है परेशानी
डॉक्टर के मुताबिक, फंगस के ये बारीक कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या होती है, उनमें ये कण सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। इसका असर यह होता है कि सांस लेने में तकलीफ बढ़ने लगती है और अस्थमा के दौरे का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में सिर्फ बाहर की हवा ही नहीं, घर के अंदर का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
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इन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है
डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरि के अनुसार, अस्थमा के मरीजों के अलावा एलर्जी से परेशान लोग, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और जिनकी रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। अगर घर में लंबे समय तक सीलन बनी रहती है, तो इन लोगों में सांस से जुड़ी दिक्कतें जल्दी बढ़ सकती हैं। इसलिए मानसून में घर को सूखा और साफ रखना भी सेहत का हिस्सा है।
ये लक्षण दिखें तो समझिए कुछ गड़बड़ हो सकती है
अगर बारिश के दिनों में घर के अंदर रहते समय बार-बार खांसी आने लगे, सांस फूलने लगे, सीने में जकड़न महसूस हो या सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आए, तो इसे हल्के में न लें। रात में ज्यादा खांसी आना, पहले की तुलना में इनहेलर की जरूरत बढ़ जाना या छींक और नाक बंद रहने जैसी एलर्जी की शिकायत बढ़ना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि घर की सीलन और फंगस आपकी परेशानी बढ़ा रही है।
बारिश में घर को फंगस से बचाने के आसान तरीके
डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरि सलाह देते हैं कि घर में नमी कम रखने की कोशिश करें और कमरों में ताजी हवा आने दें। अगर कहीं से पानी रिस रहा है, तो उसे बिना देर किए ठीक कराएं। जहां सीलन हो, उसे एक-दो दिन के भीतर अच्छी तरह सुखा दें ताकि वहां फंगस न पनपे। अगर दीवार या किसी दूसरी जगह फंगस दिखाई दे, तो सिर्फ उसे साफ करना काफी नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना जरूरी है कि नमी क्यों हो रही है। इसके अलावा गीले कपड़े, गीले गद्दे या कालीन लंबे समय तक घर के अंदर न रखें। एयर कंडीशनर और कूलर की समय-समय पर सफाई भी जरूरी है।
डॉक्टर कहते हैं कि अगर नियमित दवा लेने के बाद भी बारिश में अस्थमा बार-बार बढ़ रहा है, तो सिर्फ मौसम या प्रदूषण को जिम्मेदार न मानें। घर की सीलन और फंगस भी इसकी वजह हो सकती है। समय रहते इसकी पहचान करना और घर में नमी को कम करना अस्थमा के गंभीर अटैक से बचाने में मदद कर सकता है।
