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क्या कहता है दिल्ली की दो महिला मुख्यमंत्र‍ियों से जुड़ा इतिहास, आतिशी की राह नहीं होगी आसान

Women CM of Delhi : दिल्ली की नई मुख्यमंत्री आतिशी की राह आसान नहीं रहने वाली है। आम आदमी पार्टी के सिर पर संकट के बादल छाए हुए हैं। ऐसे में आपको आतिशी से पहले दिल्ली की दो महिला मुख्यमंत्र‍ियों के साथ क्या जुड़ा है, इसका इतिहास जानना चाहिए। सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित दिल्ली की सीएम रह चुकी हैं।

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सुषमा स्वराज, आतिशी मार्लेना, शीला दीक्षित

Delhi: भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज और कांग्रेस की शीला दीक्षित के बाद आतिशी मार्लेना के तौर पर दिल्ली को तीसरी महिला मुख्यमंत्री मिली है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आप विधायक दल की बैठक में आतिशी को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद शनिवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उन्हें सीएम पद की शपथ दिलाई। ऐसे में वह बतौर सीएम आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव तक सत्ता की बागडोर संभालेगी।

इससे पहले कौन-कौन महिला मुख्यमंत्रियों रहीं?

आतिशी मार्लेना से पहले सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित ने दिल्ली के सीएम पद की कुर्सी संभाली है। इन दोनों महिला मुख्यमंत्र‍ियों का कार्यकाल कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह रहा है।

सुषमा के नाम पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड

भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के नाम दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। साल 1998 में तत्कालीन सीएम साहिब सिंह वर्मा के कुर्सी छोड़ने के बाद सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया गया था। वो 13 अक्टूबर 1998 से 3 दिसंबर 1998 तक दिल्ली की सीएम रहीं। बतौर सीएम 52 दिनों का उनका कार्यकाल उपलब्धियों से ज्यादा चुनौतियों से भरा रहा। सुषमा स्वराज ने संकट के समय सीएम पद का कार्यभार संभाला था। क्योंकि दिल्ली में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था।

अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान सुषमा स्वराज ने महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर तमाम बड़े फैसले किये, जो उनके राजनीतिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुए। स्वराज और आतिशी दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के भीतर सियासी संकट के समय विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री बनीं। 1998 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं कांग्रेस पार्टी ने बड़े जनादेश के साथ सत्ता में वापसी की।

शीला दीक्षित के कार्यकाल में कई बड़ी उपलब्धियां

शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली में नई सरकार का गठन हुआ। शीला दीक्षित का कार्यकाल कई बड़ी उपलब्धियों का गवाह रहा। उनके शासनकाल में दिल्ली में सफलतापूर्वक कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया गया था। वहीं दिल्ली में बेहतर सड़कों के निर्माण के साथ फ्लाईओवर का जाल बिछाया गया। दिल्ली मेट्रो ट्रेन शीला दीक्षित सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

उन्होंने दिल्ली को वर्ल्ड क्लास शहर बनाने के लिए विकास के तमाम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा। उनके नेतृत्व में दिल्ली के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। इसमें ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर क्रांतिकारी सुधार शामिल है। शीला दीक्षित 1998 से 2013 तक 15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। वो अपने गुड गवर्नेंस मॉडल के लिए हमेशा सुर्खियों में रही।

आतिशी मार्लेना की राह नहीं होने वाली है आसान

बतौर सीएम आतिशी मार्लेना की राह आसान नहीं होने वाली है। उनके पास विकास के काम को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा समय नहीं है। क्योंकि अगले के प्रारंभ में दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। ऐसे में जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करना और जनता तक अपनी सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

दिल्ली में मुफ्त बिजली, पानी के अलावा तमाम बुनियादी सुविधाओं को लेकर विपक्ष इन दिनों 'आप' पर हमलावर है, ऐसे में सरकार की छवि को बरकरार रखना आतिशी मार्लेना के लिए बड़ी चुनौती है। वहीं प्रशासनिक मोर्चे के साथ-साथ अपने कैबिनेट सहयोग‍ियों और उप राज्यपाल के साथ सामंजस्य बैठाना भी आतिशी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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