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Congress Vs AAP: कांग्रेस को बार-बार क्यों कोस रही है आम आदमी पार्टी? समझिए लोकसभा चुनाव से पहले ये संयोग या प्रयोग

Lok Sabha Chunav: वैसे तो विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक दूसरे की सहयोगी हैं, मगर AAP के तेवर से ये कन्फ्यूजन हो जाती है कि ये दोनों पार्टियां सहयोगी हैं या एक-दूजे की कट्टर विरोधी... केजरीवाल की पार्टी के एक दिग्गज ने कहा है कि कांग्रेस 'फिएट कार के पुराने मॉडल' की तरह है। जिसके बाद सवाल उठने लाजमी हैं।

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आम आदमी पार्टी बनाम कांग्रेस।

Photo : Times Now Digital

Political News: आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक दूसरे के साथी हैं या विरोधी? इस सवाल का सटीक जवाब ढूंढ पाना आम आदमी के बस की बात नहीं है, अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के सुर कब किसके खिलाफ हो जाए और कब किसके पक्ष में हो जाए ये कभी भी तय नहीं रहा है। कभी कांग्रेस को पानी पी-पीकर कोसने वाले और कभी कांग्रेस के हाथ का साथ लेने वाले केजरीवाल के सियासी सफर की शुरुआत ही कांग्रेस के विरोध के साथ हुई थी, मगर जब पहली बार सत्ता का स्वाद चखना था तो केजरीवाल की आप जाकर कांग्रेस के ही गोद में बैठ गई।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोस्त या दुश्मन?

इस सवाल का जवाब ढूंढ पाना बिल्कुल वैसा है जैसे रेत के ढेर में एक सुई की तलाश करना। अरविंद केजरीवाल जब पहली बार दिल्ली की सत्ता में आए थे तो कांग्रेस के खिलाफ सबसे बड़े आंदोलन की नाव की सवारी की थी। कांग्रेस को कोस-कोस कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई और दिल्ली में चुनाव लड़ा। चुनावी परिणाम में जब आम आदमी पार्टी सरकार बनाने से कुछ सीटें दूर रह गई तो केजरीवाल ने उसी कांग्रेस से हाथ मिला लिया, जिसे पानी पी-पीकर कोसते रहे। फिर कांग्रेस का विरोध किया और देखते ही देखते आज आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक ही गठबंधन 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस' (INDIA) का हिस्सा हैं।

बार-बार बदलते हैं सीएम केजरीवाल के तेवर

कहने के लिए तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे की सहयोगी पार्टियां हैं, लेकिन इन दोनों दलों में सहयोगियों वाले कोई गुण नहीं नजर आते हैं। कभी कांग्रेस अपने सहयोगी दल आप पर निशाना साधती है तो कभी केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाती है। ये सिलसिला बदस्तूर जारी है। लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, लेकिन दोनों सहयोगी दलों के बीच इतना भी समझौता नहीं हो सका है कि दोनों चुनाव के वक्त एक-दूसरे के खिलाफ टिप्पणी करने के सिलसिले पर लगाम लगा सके।

सीएम केजरीवाल के खास ने कांग्रेस को कोसा

ये तमाम सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बार फिर कांग्रेस के खिलाफ टिप्पणी की है। उन्होंने कांग्रेस की तुलना ‘‘फिएट कार के पुराने मॉडल’’ से की और पार्टी नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब संसद का बजट सत्र चल रहा था तो वह छत्तीसगढ़ में अपनी यात्रा में व्यस्त थे। बजट सत्र के दूसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए मान ने एक मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण को बाधित करने के लिए पंजाब कांग्रेस सदस्यों की आलोचना की।

पंजाब में एक-दूजे की विरोधी हैं आप और कांग्रेस

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का हिस्सा हैं। ये दोनों दल पंजाब को छोड़कर अन्य जगहों पर गठबंधन के तहत लोकसभा चुनाव लड़ेगें। गांधी के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब संसद के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता छत्तीसगढ़ में अपनी यात्रा में व्यस्त थे।

सीएम भगवंत मान ने पूछा, ‘बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री का भी संबोधन होना था। लेकिन उनके (कांग्रेस) मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ के जंगलों में घूम रहे थे। पता नहीं वह कौन सी यात्रा निकाल रहे थे?’ राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के तहत छत्तीसगढ़ में थे। मान ने यह भी कहा कि 15 दिन पहले समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने उनसे कहा था कि कांग्रेस 'अपडेट' हो गई है।

किस बात पर मान ने कांग्रेस की ली चुटकी?

सीएम मान ने कहा कि अखिलेश यादव ने उन्हें बताया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक सीट की मांग कर रही है। भगवंत मान ने यादव द्वारा उन्हें बताई गई बातों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने एक उम्मीदवार का नाम घोषित किया था, जिसे उस सीट से खड़ा किया जाना था, लेकिन साढ़े नौ साल पहले उनकी मृत्यु हो गई थी। मान ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, 'वे इतने जागरुक हैं।' उन्होंने कहा, 'वास्तव में, कांग्रेस "फिएट कार के पुराने मॉडल" की तरह है जिसे अपडेट नहीं किया जा सकता।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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