Mahadev And Sons Aasim Khan On Backlash: टीवी के पॉपुलर सीरियल 'महादेव एंड सन्स' ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। 'महादेव एंड सन्स' में धीरज और रज्जी का एक सीन था, जिसपर रोमांस के नाम पर घरेलू हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगा। इस सीजन में धीरज ने रज्जी को पहले धक्का दिया, ऐसे में उसका हाथ गरम आयरन पर जा लगा। वहीं जब रज्जी दर्द से चीखने लगी तो धीरज ने जबरन उसका मुंह बंद कर दिया। इस सीन ने दर्शकों का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था। लोगों ने सीन के लिए मेकर्स को तो आड़े हाथों लिया ही, साथ ही किरदार पर भी अपना गुस्सा जाहिर किया। वहीं अब इस मामले पर एक्टर आसिम खान (Aasim Khan) ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मेकर्स का बचाव करने की कोशिश की। टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: 'मेरे 30 लाख नहीं चुकाए'- Shehzada Dhami ने राजन शाही पर लगाया बड़ा आरोप? सपोर्ट में आईं शिल्पा शिंदे
आसिम खान (Aasim Khan) ने इंडिया फोरम संग बातचीत के दौरान कहा कि वह किसी भी तरह की घरेलू हिंसा को बढ़ावा नहीं देते हैं। आसिम खान ने इस बारे में कहा, "अभी एक विवाद चल रहा है। घरेलू हिंसा ऐसी चीज है जिसपर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए, चाहे वो किसी भी तरह की हिंसा हो। चाहे इसमें औरत मर्द का शोषण करे या मर्द औरत का। मैं भी पूरी तरह से इसके खिलाफ हूं और मैं इसे किसी भी तरह से बढ़ावा नहीं देता। जहां तक शो की चिंता है, तो ये एपिसोड से एक गलतफहमी हुई है और लोग इससे नाराज हो रहे हैं।" टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: 2026 में बवाल करने के लिए तैयार हैं ये रियलिटी शोज, दर्शक भी पलकें बिछाए कर रहे हैं इंतजार

'Mahadev And Sons' के विवादित सीन पर आसिम खान ने तोड़ी चुप्पी, फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम
आसिम खान (Aasim Khan) यहीं नहीं रुके। उन्होंने धीरज और रज्जी के एक और सीन पर चुप्पी तोड़ी, जिसमें धीरज गुस्से में रज्जी पर बाल्टी भरकर पानी डाल देता है। इस सीन पर आसिम खान ने कहा, "वो इसलिए था क्योंकि रज्जी नशे में थी। उस हालत में वो कुछ ऐसा बोलने जा रही थी, जिसे पूरा परिवार गुप्त रखने की कोशिश कर रहा था। इसलिए वो रज्जी पर पानी डालता है। मतलब, आधा एपिसोड देखकर ही गुस्सा आ जाता है। पूरा एपिसोड देखने के बाद मुझे लगता है कि चीजें साफ होंगी। और बाकी सब ठीक है। ये चलता रहेगा। न तो मेकर्स ऐसी किसी चीज को बढ़ावा देते हैं, जिसमें घरेलू हिंसा के जरिए कुछ दिखाया जाए। न ही मैं ऐसी किसी चीज का हिस्सा होना चाहता हूं। तो सबकुछ सकारात्मक है और मुझे लगता है कि ठीक है।"
