Yodha Review: सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म योद्धा सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म योद्धा एक्शन और थ्रिल से भरी हुई है। इसमें राशी खन्ना और दिशा पाटनी भी हैं। पढ़िए इस फिल्म का रिव्यू।
देशभक्ति और हाईजैक सिचुएशन में भी एक्शन। ऐसा एक्शन जो जमीन से हजारो फीट ऊपर होता है, इसमें थ्रिल भी है। वह भी ऐसा कि दर्शकों से भरे सिनेमाघर में दृश्य खत्म होने के बाद ताली बज उठती है। भारतीय फिल्म होने के बाद भी कई बार ऐसा होता है कि अब क्या होगा? सीरियस सीन के बीच में भी बन लाइनर जो रोमांच भर दे। एक फिल्म को एंटरटेनिंग होने का दर्जा तब मिलता है जब उसमें कहानी, इमोशन, एक्टिंग, एक्शन और म्यूजिक हो। योद्धा में यह सारे एलिमेंट्स हैं।
पिता की तरह वर्दी पहनने की जिद
योद्धा की कहानी एक बच्चे की है, जो अपने पिता की ही तरह इंडियन आर्मी में जाना चाहता है। उसके पिता एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करते हैं नाम होता है योद्धा। एक मिशन में वह शहीद हो जाते हैं, इसके बाद पिता की ही तरह वर्दी पहनना अरुण का सपना हो जाता है। बड़ा होकर वह योद्धा जॉइन करता है और उसे लीड भी करता है। उसे प्रियंवदा नाम की लड़की से प्यार हो जाता है, जिसके बाद दोनों शादी भी कर लेते हैं। प्रियंवदा मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में एडिशनल सेक्रेटरी रहती है। टास्क फोर्स में अरुण ऑर्डर के बिना भी मिशन को अंजाम दे देता है। एक मिशन में वह फेल हो जाता है। जिसके बाद उसे और उसकी टीम को पूरी तरह से डिसमेंटलकर दिया जाता है। वह इसके लिए सिस्टम से लड़ाई लड़ता है, लेकिन हार जाता है। वह अपनी टास्क फोर्स को इतना सीरियसली लेता है कि पत्नी तलाक देने के लिए नोटिस भेज देती है। अरुण का जीवन उथल पुथल हो जाता है। कहानी में एक नया मोड़ आता है, जहां अरुण भारत के एक विमान को हाइजैक करता है। अब हाईजैक होता है या करवाया जाता है। इसके लिए फिल्म देखना उचित होगा।
अभिनय से मिली कहानी को मजबूती
योद्धा में अरुण कटयाल की भूमिका सिद्धार्थ मल्होत्रा ने निभाई है। आर्मी अफसर के किरदारों में सिद्धार्थ मल्होत्रा काफी मेहनत कर रहे हैं। योद्धा में उनके काम को देख ऐसा लगता है कि ऐसी कुछ और फिल्में मिल जाएंगी तो वह महारथ हासिल कर लेंगे। इस किरदार को निभाते हुए उन्होंने दर्शकों की नब्ज पकड़ ली है। उन्हें यह समझ आ गया है कि दर्शक को क्या पसंद आएगा। योद्धा में भी उन्होंने अच्छा अभिनय किया है। एक्शन में साथ साथ इमोशन को भी उन्होंने ठीक तरीके से डिलेवर किया है। उनकी पत्नी के रोल यानी प्रियंवदा कटयाल का रोल राशी खन्ना ने निभाया है। पत्नी के साथ साथ वह डिफेंस मिनिस्ट्री में एडिशनल सेक्रेटरी रहती हैं, इसका भी उन्होंने खूब ख्याल रखा है। दोनों में ही राशी का काम देखने योग्य है। दिशा पाटनी का रोल थोड़ा कम है, लेकिन जबरदस्त है। स्पाई और एक्शन भरे इस किरदार में वह सरप्राइज करती हैं। तनुज वीरवानी ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। फिल्म में सनी हिंदुजा मुख्य विलेन के रोल में हैं। यहां भी सनी का किरदार अच्छा है। कम स्क्रीन स्पेस भी वह अपने काम से ध्यान आकर्षित कर ही लेते हैं।
कसी लिखावट में थ्रिल का मजा
फिल्म को सागर अंब्रे ने लिखा है। योद्धा एक थ्रिलर और एक्शन जॉनर की फिल्म है। अपने जॉनर के हिसाब से यह फिल्म दर्शकों के लिए सही साबित होती है। सागर ने फिल्म की कहानी में जितना थ्रिल दिखाया है, वह मजेदार है। कुछ सीन ऐसे आते हैं, जहां लगता है कि अब क्या होगा? यह प्रश्न दर्शक के मन में आना मतलब लिखावट में कसावट है। फिल्म का डायरेक्ट भी सागर ने पुष्कर ओझा के साथ मिलकर किया है। दोनों का ही काम शानदार है। एक्शन सीक्वेंस को उन्होंने ध्यान में रखते हुए बखूबी डिजाइन करवाया है। इसमें सिनेमैटोग्राफर का भी भरपूर साथ मिला है।
कैमरे से दिखा कमाल का एक्शन
फिल्म को जिश्नु भट्टाचार्यजी ने शूट किया है। एक्शन सीक्वेंस को उन्होंने अपनी सिनेमैट्रोग्राफी से बेहद शानदार तरीके से कैप्चर किया है। फिल्म की शुरुआती एक्शन सीन को जिस गोरिल्ला स्टाइल में शूट किया है वह देखने योग्य है। शिवकुमार वी पणिक्कर की एडिटिंग भी सधी हुई है। दोनों ने एक दूसरे को अपने काम से बांधे रखा है।
गानों ने सिचुएशन को बनाया कमाल
फिल्म में एक गाना रीक्रिएट किया गया है, जिसे ओरिजनल सिंगर और कंपोजर ने किया है। इस गाने का नाम किस्मत है। जब यह गाना आपको सुनाई पड़ता है तो लगता है कि यार यह क्या है? हालांकि इसे जिस इमोशन और लाइन दर लाइन फिल्म में यूज किया है, वह निराशा के बादल को हटा देता है। इसके लिए भी डायरेक्टर्स को बधाई। बाकी फिल्म के कुछ गाने आपके जेहन में रह जाते हैं। एंड सीन में आया तिरंगा आपको मजा को दोगुना कर सकता है।
परिवार के साथ देखी जा सकती है योद्धा
फिल्म योद्धा 137 मिनट की है। इसमें एक्शन और थ्रिल दोनों का मजा है। एक्शन ऐसा है कि जिसे देख आप थोड़ा हजम कर सकते हैं। बेतुका और भयंकर वाला एक्शन कम प्रयोग किया गया है। सिद्धार्थ के थोड़े नए काम के लिए इस फिल्म को देखा जा सकता है। फिल्म फैमिली के साथ भी बेझिझक देखी जा सकती है। इस फिल्म को लेकर मेरे विचार यहीं तक। आप सिनेमाघर जाइए, फिल्म देखिए और अपने विचार भी बनाइए।