Govida: Hero No. 1 To Zero: बॉलीवुड की चकाचौंध वाली दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो कभी आसमान छूते हैं, तो कभी धरती पर सराबोर हो जाते हैं। ऐसे ही एक स्टार का नाम है गोविंदा, जो 90 के दशक में वो न सिर्फ डांसिंग किंग थे, बल्कि कॉमेडी के भी बादशाह थे। उनकी फिल्में देखकर थिएटर में तालियां बजतीं, सड़कों पर फैंस ठुमके लगाते थे। लेकिन आज 2025 में जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो सवाल उठता है आखिर वो अर्श से फर्श पर कैसे आ गए? एक ऐसा सितारा जो बीबीसी पोल में अमिताभ बच्चन के साथ 'ग्रेटेस्ट स्टार' की लिस्ट में शुमार था, आज छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स या रियलिटी शोज में नजर आता है। आइए, गोविंदा के करियर की इस ट्रेजिक जर्नी को खोलते हैं जहां हिट्स की बारिश के बाद सूखा आ गया।

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डेब्यू करते ही मचाया धमाल
गोविंदा का सफर शुरू होता है 1986 से, जब 'इल्जाम' ने उन्हें लॉन्च किया गया। एक मिडिल क्लास फैमिली से निकले इस लड़के ने रातोंरात स्टारडम हासिल कर लिया। बीकॉम की डिग्री के बाद पिता की सलाह पर फिल्मों में कूदे गोविंदा ने 'डिस्को डांसर' देखकर डांस सीखा। बेहद कम उम्र में ही गोविंदा के आगे फिल्मों की लाइन लग गई। लेकिन असली धमाका 90 के दशक में हुआ, जब उन्होंने डेविड धवन के साथ काम करना शुरू किया। इस जोड़ी ने बड़े पर्दे पर धमाल मचा दिया। फिल्म 'शोला और शबनम' (1992) से शुरू हुआ ये सफर 'आंखें' (1993), 'कुली नंबर 1' (1995), 'हीरो नंबर 1' (1997), 'दूल्हे राजा' (1998), 'हसीना मान जाएगी' (1999) जैसी फिल्मों तक चला। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। इस दौरान गोविंदा एक-एक दिन में 18 घंटे काम किया करते थे। इस दौरान गोविंदा फिल्म के लिए एक करोड़ रुपये तक फीस लेते थे।

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समय के साथ नहीं बदले गोविंदा
2000 के दशक में बॉलीवुड बदल रहा था। मल्टीप्लेक्स का दौर आया, ऑडियंस को 'दिल चाहता है' जैसी न्यूएंस वाली फिल्में चाहिए थीं। लेकिन गोविंदा पुरानी फॉर्मूले पर अड़े रहे। उनकी 'राजा भैया', 'खुल्लम खुल्ला प्यार करें' जैसी कॉमेडीज फ्लॉप हो गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक गोविंदा ज्योतिषियों की सलाह पर बिना स्क्रिप्ट पढ़े फिल्में चुनी और यही से उनकी बर्बादी का दौरा शुरू हो गया। गोविंदा की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप होने लगीं। उन्होंने एक साथ दर्जनों B-ग्रेड और C-ग्रेड फिल्में साइन कर लीं। गोविंदा की लगातार 10 से भी ज्यादा फिल्में फ्लॉप रहीं। गोविंदा की दूसरी बड़ी गलती कई हिट फिल्मों को रिजेक्ट करना रहा। गोविंदा ने 'ताल' में अक्षय कुमार का रोल ठुकराया, जो सुपरहिट हुई। 'देवदास' में शाहरुख के साथ चुन्नी बाबू का रोल मना किया। 'गदर' और 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के ऑफर को भी बिना सोचे समझे लात मार दी। 'बिवी नंबर 1' में भी ऑफर होने के बाद काम नहीं किया इस फिल्म ने सलमान खान के करियर को और चमकदार बना दिया था। इसके बाद गोविंदा फिल्मी दुनिया छोड़ राजनीति में कूद गए और 2004 में कांग्रेस से मुंबई सांसद बने। इस दौरान गोविंदा और बॉलीवुड के बीच की दूरी और बढ़ गई। गोविंदा का करियर बर्बाद करने में अगर सबसे बड़ा हाथ किसी था तो गोविंदा ही थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक गोविंदा में डिसिप्लिन की काफी कमी थी, वो सेट पर घंटों लेट आते। ये तब तक ठीक रहा जब तक गोविंदा की फिल्में हिट होती रही, लेकिन जब एक्टर फ्लॉप होना शुरू हुए तो ये उनकी सबसे बड़ी कमी बन गई। डिसिप्लिन की कमी ने गोविंदा के करियर को तबाह करने ताबूत पे आखिरी कील का काम किया।

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अंधविश्वास में फंसे थे गोविंदा
एक्टर गोविंदा के करियर को तबाह करने में अंधविश्वास ने बड़ा रोल निभाया था। एक समय पर गोविंदा अपने हाथ में कई सारी अंगूठियां पहनने लगे थे। गोविंदा के अंधविश्वास से जुड़े कई किस्से आज भी वायरल होते हैं। प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी बताते हैं कि 'गोविंदा धीरे-धीरे अंधविश्वासी होते गए। कभी कहते थे कि सेट पर झूमर गिरने वाला है, सब हट जाओ और कभी वो कादर खान डूबने की भविष्यवाणी करते थे। इतना ही नहीं वो अंधविश्वास के चलते लोगों को सेट पर कपड़े तक बदलने को बोल देते थे। एक बार तो गोविंदा ने सेट पर लोगों के पेन लाने पर बैन लगा दिया था। क्योंकि किसी ज्योतिषी बताया था कि उन्हें पेन से खतरा है। एक बाद गोविंदा ने इसी अंधविश्वास के कारण फ्लाइट तक छोड़ दी थी। हिमानी शिवपुरी ने बताया कि 'हैदराबाद शूट के लिए रवैना टंडन, अरुणा ईरानी, कुकू कोहली सब फ्लाइट में, लेकिन गोविंदा 'अशुभ समय' के कारण चढ़े ही नहीं। टीम घंटों इंतजार करती रही।' गोविंदा के अंधविश्वास ने उनसे प्रोफेशनलिज्म छीन लिया। और यही उनके करियर को बर्बाद कर गया।

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गोविंदा की वापसी का आज भी फैंस को है इंतजार
गोविंदा अब फिल्मी दुनिया से एकदम गायब ही हो गए हैं, लेकिन उनके फैंस आज भी एक्टर की वापसी की इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा गोविंदा की बॉलीवुड में वापसी का रास्ता कैसे खुलता है।
