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Heat Wave in Delhi Election: क्या दिल्ली के चुनाव पर पड़ेगा भीषण गर्मी और लंबे वीकेंड का असर? 25 मई को मतदान

Severe Heat Affect on Delhi Election: शराब नीति घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद 1 जून तक उन्हें चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिली। मौजूदा चुनावी माहौल में दिल्ली को लेकर लोगों में सबसे ज्यादा उत्सुकता देखी जा रही होगी। तो क्या दिल्ली के चुनाव पर भीषण गर्मी और लंबे वीकेंड का असर पड़ेगा?

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दिल्ली में मतदाताओं पर प्रचंड गर्मी का कितना पड़ेगा असर?

Photo : Times Now Digital

Delhi Voter Turnout: लोकसभा चुनाव 2024 के छठे चरण में देशभर की 58 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, इसी कड़ी में 25 मई को ही दिल्ली की सभी सात सीटों पर मतदान होंगे, जिसके लिए राजधानी पूरी तरह तैयार है। सभी सात सीटों पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली, पश्चिम दिल्ली और चांदनी चौक पर मतदान होगा। ऐसे में एक सवाल ये उठ रहा है कि क्या दिल्ली के चुनाव पर भीषण गर्मी और लंबे वीकेंड का असर पड़ेगा?

दिल्ली में लोकसभा चुनाव को लेकल सरगर्मी

शराब नीति घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ही दिन पहले दिया है, गिरफ्तारी और फिर 50 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें अदालत से 1 जून तक अंतरिम जमानत मिली। दिल्ली का यह चुनाव मौजूदा सियासी हालातों के दृष्टिकोण से सबसे ज्यादा उत्सुकता वाला चुनाव माना जा रहा है। जहां बीजेपी को एक और क्लीन स्वीप की उम्मीद है, वहीं INDI गठबंधन में सहयोगी आप और कांग्रेस सभी सीटों पर जीत का दावा कर रही हैं।

गर्मी और लंबा वीकेंड बिगाड़ सकता है खेल?

राष्ट्रीय राजधानी में चिलचिलाती गर्मी के कारण मतदाताओं के मतदान केंद्रों से दूर रहने की संभावना है, मौसम विभाग ने शहर में रेड अलर्ट जारी किया है। मतदान के दिन राष्ट्रीय राजधानी में लू चलने की आशंका है और पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के सभी चरण-छह चुनाव वाले राज्यों में लू की स्थिति देखी जाएगी, साथ ही कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा।

2014 की तुलना में 2019 में कम हुआ था मतदान

पिछले लोकसभा चुनाव में, दिल्ली में 60.34 प्रतिशत मतदान हुआ था - जो 2014 के लोकसभा चुनाव से पांच प्रतिशत कम था। लोकसभा चुनाव 2014 में 65.22 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, चिलचिलाती गर्मी, गर्मी की छुट्टियां और वीकेंड पर मतदान का दिन... इस बार भी वोट प्रतिशत गिरा सकता है। विशेषज्ञों द्वारा बताए गए मुख्य कारणों में इन सभी बातों का जिक्र किया गया, जिसके कारण 2019 में मतदाता राष्ट्रीय राजधानी में मतदान केंद्रों से दूर रहे थे। इस वर्ष भी, दिल्ली में मतदान शनिवार को है और लोगों को बुद्ध पूर्णिमा के साथ छुट्टियों को क्लब करने का विकल्प प्रदान करता है।

दिल्ली लोकसभा चुनाव के लिए जोरों पर तैयारियां

इस बीच, अर्धसैनिक बलों की 51 कंपनियों और उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश के 13,500 होम गार्ड और ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों सहित 60,000 कर्मियों के साथ, दिल्ली पुलिस शहर में लोकसभा चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। पुलिस उपायुक्त (चुनाव प्रकोष्ठ) संजय सहरावत ने पीटीआई-भाषा को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। डीसीपी सहरावत ने कहा कि मतदान के दिन दिल्ली में लगभग 60,000 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे और उनमें से कम से कम 33,000 पुलिसकर्मी मतदान केंद्रों की सुरक्षा करेंगे।

ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से होगी निगरानी

उन्होंने कहा, "कुल 2,628 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से 429 संवेदनशील हैं। इन संवेदनशील मतदान केंद्रों पर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के साथ अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात किए जाएंगे।" इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली पुलिस की पीसीआर इकाइयां भी अपने-अपने इलाकों में नजर रखेंगी।

गर्मी के लिए चुनाव आयोग की गाइडलाइंस

चुनाव आयोग ने चुनावी मौसम के दौरान गर्मी को देखते हुए क्या करें और क्या न करें को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। इसने मतदाताओं से दोपहर 12-3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने, बाहर का तापमान बहुत अधिक होने पर ज़ोरदार गतिविधियों से बचने, शराब, चाय के साथ-साथ उच्च प्रोटीन वाले भोजन से बचने और अन्य सावधानियों का आग्रह किया है। दिल्ली में 1.52 करोड़ मतदाता हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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