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भाजपा के इन 2 दिग्गजों को लगा बड़ा झटका, जानें गुजरात जैसा हिमाचल में क्यों नहीं चला जादू

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 9, 2022, 07:40 AM IST

Himachal Pradesh Assembly Election 2022: इस बार भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता प्रेम कुमाल धूमल ने चुनाव नहीं लड़ा था। इस बात का दावा किया गया धूमल खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। ऐसे में वह चुनाव के दौरान सक्रिय नहीं रहे। 2022 के चुनाव में हिमाचल में रिकॉर्ड 76% वोटिंग हुई।

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हिमाचल में नहीं चला भाजपा का जादू

Photo : BCCL
KEY HIGHLIGHTS
  • भाजपा को 2022 में जहां 49.2 फीसदी वोट मिले थे, वहीं इस बार वोट 6 फीसदी घटकर 42.9 फीसदी पर आ गया।
  • राज्य की 68 में से 21 सीटों पर भाजपा को बागियों का सामना करना पड़ा।
  • हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जे.पी.नड्डा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का गृह राज्य है।

Himachal Pradesh Assembly Election 2022: भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात चुनाव जितनी खुशियां लेकर आया है, उतना ही हिमाचल प्रदेश के परिणाम मायूसी लेकर आए हैं। बिखरी और बगावत से परेशान कांग्रेस ने उसे आसानी से पटखनी दे दी है। नतीजे पार्टी के लिए इसलिए निराशाजनक हैं क्योंकि हिमाचल प्रदेश, पार्टी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का गृह राज्य है। उसमें भी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर के गृह जिले हमीरपुर में पार्टी का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा है। हमीरपुर में पार्टी को सभी 5 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है।

अनुराग ठाकुर का रोना नहीं आया काम

इस बार भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता प्रेम कुमाल धूमल ने चुनाव नहीं लड़ा था। इस बात का दावा किया गया धूमल खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। ऐसे में वह चुनाव के दौरान सक्रिय नहीं रहे। हालांकि उनके बेटे और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर जरूर प्रचार करने पहुंचे, एक सभा में वह रो भी दिए थे। लेकिन इसके बावजूद उनके गृह जिले हमीरपुर की 5 में से 4 सीट कांग्रेस ने जीत ली जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। जबकि पिछली बार 2017 के चुनाव में पार्टी को 2 सीटें मिली थीं।

जे.पी. नड्डा के जिले का क्या रहा हाल

जे.पी.नड्डा के गृह जिले बिलासपुर में पार्टी का प्रदर्शन हमीरपुर जैसा नहीं रहा, वहां पर भाजपा ने 4 में से 3 सीटें जीत ली है। पिछली बार भी भाजपा को इतनी ही सीटें मिली थी। वैसे तो गृह जिले में जे.पी.नड्डा को बड़ा झटका नहीं लगा है। लेकिन राज्य में जिस तरह पार्टी को हार मिली है, वह जरूर नड्डा के लिए झटका है।

6 फीसदी कम मिले वोट, बागियों ने बिगाड़ा खेल

2022 के चुनाव में हिमाचल में रिकॉर्ड 76% वोटिंग हुई। ज्यादा वोटिंग और नतीजों से लगता है कि लोगों के मन में सरकार के खिलाफ नाराजगी थी। इसलिए भाजपा को 2022 में जहां 49.2 फीसदी वोट मिले थे, वहीं इस बार उसका वोट 6 फीसदी घटकर 42.9 फीसदी पर आ गया है। और इसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी की 44 के मुकाबले 19 सीटें घट गई और उसे केवल 25 सीटें मिलीं।

भाजपा ने चुनाव से पहले अपने विधायकों के प्रति लोगों की नाराजगी को भांप लिया था। इसलिए उसने 10 विधायकों के टिकट काटे। लेकिन खुली और अंदरखाने दोनों तरफ से बगावत हुई। राज्य की 68 में से 21 सीटों पर भाजपा को बागियों का सामना करना पड़ा। इसमें से कई चुनाव जीत गिए या फिर उनकी वजह से भाजपा हार गई । किन्नौर में पूर्व MLA तेजवंत नेगी निर्दलीय चुनाव लड़े और वहां भाजपा हार गई। देहरा सीट पर भी होशियार सिंह निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत गए। इसी तरह भाजपा फतेहपुर, कुल्लू और मनाली,नालागढ़ सीट भी हार गई।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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