West Bengal Assembly Elections 2026 : कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राज्य सरकार के कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसरों को पीठासीन अधिकारी के रूप में चुनाव ड्यूटी करने की मंगलवार को अनुमति दे दी। अदालत ने इस संबंध में एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें निर्वाचन आयोग द्वारा उनकी ड्यूटी लगाने के फैसले को रद्द कर दिया गया था। खंडपीठ ने कहा कि कुछ प्रोफेसरों ने अदालत का रुख किया, लेकिन अन्य ने निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार कर्तव्य का निर्वहन किया।
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति अजय गुप्ता की खंडपीठ ने पीठासीन अधिकारियों के रूप में उनकी नियुक्ति को रद्द करने वाले एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी। खंडपीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा विशिष्ट कारणों का उल्लेख किए बिना ’ग्रुप ए’ रैंक के अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसरों को भी आयोग की आवश्यकता को समझना चाहिए।
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पश्चिम बंगाल में दो चरण में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा कुछ असिस्टेंट प्रोफेसरों को पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने के फैसले को 17 अप्रैल को रद्द कर दिया था।
पश्चिम बंगाल सरकारी कॉलेज अध्यापक संघ से संबंधित याचिकाकर्ताओं ने 23 और 29 अप्रैल को होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए विभिन्न मतदान केंद्रों में पीठासीन अधिकारी के रूप में अपनी नियुक्ति को चुनौती देते हुए याचिका दायर की।
प्रोफेसरों की याचिका रद्द
एकल पीठ ने याचिकाकर्ता प्रोफेसरों की पीठासीन अधिकारियों के रूप में नियुक्ति को रद्द करते हुए कहा था कि संबंधित अधिकारी कोई ऐसा दस्तावेज़ पेश करने में विफल रहे, जिससे यह साबित हो सके कि किन अपरिहार्य परिस्थितियों के आधार पर उन्हें मतदान केंद्रों पर नियुक्त करने का फैसला लिया गया। उनके वकील शमीम अहमद के अनुसार, अदालत में याचिका दायर करने वाले संगठन में 300 से अधिक सदस्य हैं।
