Gujarat-Maharashtra Weather: अगर आप पिछले दो-तीन दिनों में गुजरात, महाराष्ट्र या मध्य प्रदेश के आसपास हैं, तो आपने महसूस किया होगा कि आसमान मानो पूरी तरह खुल गया है। वलसाड और नवसारी जैसे जिलों में तो 24 से 48 घंटों के भीतर 18 से 36 इंच तक पानी गिर चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अहमदाबाद, सूरत, नवसारी, वलसाड, राजकोट और भावनगर समेत राज्य के 16 जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) और निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी 'स्काईमेट' (Skymet) के अनुसार, देश में पिछले दो दिन इस पूरे मानसून सीजन के सबसे ज्यादा बारिश वाले दिन रहे हैं। आखिर अचानक मौसम में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया? आइए समझते हैं।
आखिर क्यों हो रही है गुजरात में इतनी भारी बारिश
गुजरात के ऊपर इस समय 5 शक्तिशाली मौसम प्रणालियां (Weather Systems) एक साथ सक्रिय हो गई हैं। जब कई मौसमी स्थितियां एक जगह मिलती हैं, तो बारिश का असर कई गुना बढ़ जाता है। अरब सागर से नम हवाएं और बंगाल की खाड़ी का लो-प्रेशर गुजरात के ऊपर मिल रहे हैं, जिससे मूसलाधार बारिश और फ्लैश फ्लड के हालात बन रहे हैं, और इसके कारण 5 मुख्य सिस्टम हैं।
1. साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation)
सरल शब्दों में कहें तो साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक 'विशाल वैक्यूम क्लिनर' जैसा होता है। जब किसी जगह की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, तो आसपास के समुद्रों (अरब सागर) से यह गोल-गोल घूमते हुए नमी और बादलों को बड़ी तेजी से अपनी ओर खींचती है। दक्षिण गुजरात के आसमान में बने इस चक्रवाती घेरे ने अरब सागर से पानी से लदे बादलों की पूरी की पूरी सप्लाई लाइन गुजरात की तरफ मोड़ दी है।
2. मानसून ट्रफ (Monsoon Trough)
मान लीजिए कि मानसून के बादलों का एक रास्ता सा बना हुआ है, जिसपर बादल चलते हैं। फिलहाल यही बादलों का हुजूम सामान्य जगह से थोड़ा दक्षिण (गुजरात और मध्य भारत) की ओर खिसक गया है। मानसून की यह अक्ष रेखा इस समय गुजरात और राजस्थान की सीमा के पास टिकी हुई है, जिससे लगातार नम हवाएं मैदानी इलाकों से टकरा रही हैं।
3. शियर जोन (Shear Zone - ईस्ट-वेस्ट शियर जोन)
जब एक तरफ से पूर्व की हवाएं और दूसरी तरफ से पश्चिम की हवाएं आपस में टकराती हैं, तो बीच में हवा ऊपर उठने के सिवा कहीं नहीं जा पाती। फिलहाल 22°-23° उत्तरी अक्षांश (उत्तर गुजरात से झारखंड तक) के बीच यह जोन बना है। दो विपरीत हवाओं के टकराने से बादल बहुत घने हो जाते हैं और एक ही जगह पर घंटों तक पानी बरसाते रहते हैं।
4. मानसून कन्वर्जेंस जोन (Monsoon Convergence Zone)
यह 'बादलों की 7,000 किलोमीटर लंबी अटूट कतार' है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि हिमालय से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक बादलों की एक विशाल बेल्ट बन गई है, जो सीधे गुजरात के ऊपर से गुजर रही है।
5. लो-प्रेशर सिस्टम (Low-Pressure Area)
यह हवा के कम दबाव का एक ऐसा क्षेत्र होता है जो आसपास की शांत हवा में हलचल मचा देता है और बारिश की तीव्रता को 10 गुना बढ़ा देता है। 23 जुलाई की शाम को दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और मप्र की सीमा पर ऐसा ही एक सिस्टम मजबूत हुआ है।
आंकड़ों की जुबानी: 2 दिन में बदल गया पूरे देश का मानसून
स्काईमेट के अनुसार, 22 और 23 जुलाई को पूरे देश में औसत 9.7 मिमी की तुलना में 13.6 मिमी और 16.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, यानी सामान्य से 50% से भी ज्यादा। जुलाई की शुरुआत तक देश में बारिश का जो घाटा 23% बना हुआ था, वह इन दो दिनों की मूसलाधार बारिश के चलते घटकर सीधे 19% पर आ गया। वहीं, अकेले जुलाई महीने की बारिश की कमी अब सिमटकर सिर्फ 1.2% रह गई है।
अगले 72 घंटे: कौन-कौन से शहर और राज्य रहें सावधान
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, 24 से 26 जुलाई तक गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, गांधीनगर, केड़ा, गोधरा, दाहोद, तापी, भुज, नलिया, अमरेली, बोटाद, छोटा उदयपुर। महाराष्ट्र के पुणे, नासिक, धुले, नंदुरबार, जलगांव, अहमदनगर, औरंगाबाद और उत्तरी कोंकण तट। राजस्थान के डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, झालावाड़ और सलूम्बर। मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा और देवास में विशेष सावधानी की जरूरत है।