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भाजपा ने वसुंधरा को धीरे से दिया जोर का झटका! पहली सूची के बाद दिखे बागी तेवर, क्या चुनाव बाद बदलने वाली है भूमिका?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 10, 2023, 12:19 PM IST

Rajasthan Assembly Election 2023: वसुंधरा राजे को लेकर भाजपा में गहमागहमी का माहौल बना हुआ था। हालांकि, भाजपा ने अपनी सूची में ऐसे कई विधायकों के टिकट काट दिए जो वसुंधरा राजे के करीबी बताए जाते हैं। इसमें भरतपुर से दो बार की विधायक अनिता सिंह गुर्जर से लेकर बानसून से पूर्व मंत्री रोहिताश शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।

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वसुंधरा राजे

Photo : BCCL

Rajasthan Assembly Election 2023: भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही राजस्थान में प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की थी। भाजपा की इस सूची में सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता वसुंधरा राजे के करीबियों को तवज्जो नहीं दी गई है। इसके बाद राजस्थान भाजपा में बागी सुर सुनाई देने लगे हैं। एक तरफ समर्थकों का कहना है कि वसुंधरा का करीबी होने के कारण उनका टिकट काटा गया है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान ने वसुंधरा राजे को जोर सा झटका धीमे से दिया है।

प्रत्याशियों के ऐलान से पहले ही वसुंधरा राजे को लेकर भाजपा में गहमागहमी का माहौल बना हुआ था। हालांकि, भाजपा ने अपनी सूची में ऐसे कई विधायकों के टिकट काट दिए जो वसुंधरा राजे के करीबी बताए जाते हैं। इसमें भरतपुर से दो बार की विधायक अनिता सिंह गुर्जर से लेकर बानसून से पूर्व मंत्री रोहिताश शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।

चुनाव से पहले सुनाई देने लगे बागी सुर

दो बार की विधायक रहीं अनिता सिंह गुर्जर ने कहा है कि उन्हें वसुंधरा राजे का समर्थक होने के कारण टिकट नहीं दिया गया है। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। वहीं रोहिताश शर्मा ने भी कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं। जयपुर की झोटवाड़ा सीट से पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत का भी टिकट काटा गया है। वहीं, देवली-उनियारा से घोषित प्रत्याशी विजय बैंसला को लेकर भी विरोध तेज हो गया है। कहा जा रहा है कि समर्थकों ने टोंक प्रभारी रमेश बिधूड़ी के सामने नाराजगी जाहिर की है और इस मुद्दे को उठाया है।

41 उम्मीदवारों की जारी की थी सूची

बता दें, भाजपा ने सोमवार को राजस्थान की 41 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए थे। पार्टी ने इस सूची में क्षेत्री समीकरणों को तवज्जो दी है। भाजपा की पहली सूची में ओबीसी वर्ग को बड़ी संख्या में टिकट बांटे गए हैं। इनमें 25 अनारक्षित सीटों पर 15 सीटों पर भाजपा ने ओबीसी उम्मीदवार को उतारा है। भाजपा ने 41 में से 29 नए उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।

क्या है भाजपा की स्ट्रैटजी

राजस्थान में भाजपा पीएम मोदी के नाम पर चुनाव में उतर रही है। आलाकमान को उम्मीद है कि हर बार की तरह यहां भी मोदी मैजिक काम करेगा, लेकिन वसुंधरा राजे की नाराजगी बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसे में भाजपा के नेता वसुंधरा राजे को भी साधने का काम कर रहे हैं। भाजपा की हर बैठक में उनको तवज्जो दी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भाजपा वसुंधरा राजे को केंद्रीय भूमिका में लाना चाहती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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