Uttar Pradesh Nagar Nikay Chunav 2023 : उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव दो चरणों में होने जा रहा है। राज्य में 4 और 11 मई दो चरणों में मतदान होगा और चुनाव नतीजे 13 मई को आएंगे। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी चुनाव मैदान में हैं। सभी दलों के लिए यह चुनाव काफी अहम है। सभी राजनीतिक दल एक तरह से लोकसभा चुनाव से पहले अपनी तैयारी परखना चाहते हैं। इस चुनाव में मिली जीत बढ़त दिलाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का काम करेगी। चुनाव के लिए ये दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। खासकर भाजपा और सपा बड़ी जीत दर्ज करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
भाजपा
मौजूदा नगर निकाय चुनाव को भाजपा लोकसभा चुनाव की अपनी तैयारी के रूप में ले रही है। उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक इस चुनाव में भगवा पार्टी सामान्य सीटों पर ओबीसी समुदाय से उम्मीदवारों को टिकट दे सकती है। इसके अलावा जिन इलाकों में मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है उन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की योजना है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं की हुई एक बैठक में इस बारे में सहमति बनी। भाजपा ने फैसला किया है कि नगर निकाय चुनाव में वह मंत्रियों, सांसदों एवं विधायकों के परिवार से किसी को टिकट नहीं देगी। पार्टी स्थानीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को संदेश देना चाहती है कि वह सभी का सम्मान करती है। मंत्रियों, सांसदों एवं विधायकों के परिवार के लोगों को टिकट दिए जाने से स्थानीय नेता एवं कार्यकर्ता निराश हो सकते हैं और उनका मनोबल गिर सकता है। ऐसे में भाजपा लोकसभा चुनावों से पहले कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती।समाजवादी पार्टी
विधानसभा चुनाव में हार के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) पूरे दम-खम के साथ नगर निकाय चुनाव लड़ रही है। यह चुनाव सपा, राष्ट्रीय लोकदल और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (एएसपी) साथ मिलकर लड़ रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश इस चुनाव में दलितों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में हैं। आजाद के साथ आने से सपा को उम्मीदें जगी हैं। राज्य में करीब 20 प्रतिशत दलित आबादी है। अखिलेश को लगता है कि आजाद के आने से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दलित वोट बैंक में सेंधमारी हो सकेगी। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह गठबंधन कितना असरदार होगा, यह देखने वाली बात होगी।
बहुजन समाज पार्टी
नगर निकाय चुनाव को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती गंभीर दिखाई दे रही हैं। बसपा हर सीट पर जातिगत समीकरण के आधार पर अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है। बसपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेहतर करने की उम्मीद है। मायावती साफ कर चुकी हैं कि वह प्रयागराज मेयर सीट के चुनाव में अतीक अहमद की पत्नी एवं उसके किसी रिश्तेदार को टिकट नहीं देंगी। इस बार पार्टी की छवि को लेकर उन्होंने ज्यादा गंभीरता दिखाई है। बसपा ने अपने सभी जोनल प्रभारियों से सभी सीटों के लिए मजबूत उम्मीदवारों के नाम सुझाने के लिए कहा है। हालांकि, पिछले निकाय चुनावों में बसपा का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है।
कांग्रेस
बीते साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। राज्य में हाशिए पर जा चुकी पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले किसी तरह अपना प्रदर्शन सुधारने की रणनीति पर काम कर रही है। इस चुनाव में यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी प्रचार में उतरेंगी, इस बात की संभावना बहुत कम है। प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर सकते हैं। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा कि इस चुनाव के जरिए हम युवा प्रतिभा की पहचान करेंगे। हम युवाओं को टिकट देंगे।
राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार 17 मेयर पद, 1420 सभासद, 199 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, 5327 नगर पालिका परिषद, 544 नगर पंचायत अध्यक्ष और 7178 नगर पंचायत सदस्य के लिए चुनाव होंगे।
