इलेक्शन

अरविंद केजरीवाल को संदीप दीक्षित ने खुली बहस की चुनौती दी, बोले- मैं इंतजार करूंगा

Sandeep Dikshit vs Arvind Kejriwal: क्या आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और नई दिल्ली विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित के बीच ओपन डिबेट देखने को मिलेगी? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि खुद दीक्षित ने दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल को खुली बहस के लिए आमंत्रित किया है।

Image

संदीप दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल को दिया ओपन चैलेंज।

Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: कांग्रेस नेता और नयी दिल्ली विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री तथा आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखकर खुली बहस की चुनौती दी। पूर्व सांसद दीक्षित इस सीट पर केजरीवाल को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी से प्रवेश वर्मा उम्मीदवार हैं।

केजरीवाल को खुली बहस के लिए जंतर-मंतर पर बुलाया

नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने कहा, 'मैं बार-बार कह रहा हूं कि अरविंद केजरीवाल आएं और पिछले 10 सालों में किए गए अपने कामों पर मुझसे चर्चा करें। मैं उन्हें जंतर-मंतर पर आमंत्रित करूंगा और उन मुद्दों की सूची दूंगा, जिन पर मैं उनसे सवाल पूछना चाहता हूं। चुनाव आयोग अरविंद केजरीवाल से यमुना में जहर होने का सबूत मांग रहा है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे हैं।'

संदीप दीक्षित ने पत्र लिखकर अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को दोपहर दो बजे से तीन बजे के बीच जंतर मंतर पर आकर बहस करने के लिए आमंत्रित किया। पत्र में दीक्षित ने कहा कि जब से कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की है, उस समय से वह केजरीवाल के उन कार्यों के दावों को चुनौती दे रहे हैं जो उन्होंने मुख्यमंत्री और नयी दिल्ली के विधायक के रूप में किए।

उन्होंने कहा, 'मैं आपको शुक्रवार को अपराह्न दो बजे से तीन बजे के बीच जंतर मंतर पर खुली सार्वजनिक बहस के लिए आमंत्रित कर रहा हूं। मैं इंतजार करूंगा कि आप वहां आएं और उन सभी विषयों पर बहस करें जिन्हें आप अपनी उपलब्धियों के रूप में उजागर कर रहे हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article