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कहानी में अभी ट्विस्ट है? जयराम बोले- 'प्रियंका तो कोई भी उपचुनाव जीतकर सदन पहुंच जाएंगी', बयान के मायने क्या?

Lok Sabha Election: एक बात तो साफ है कि राहुल गांधी अगर चुनाव जीतते हैं तो वायनाड और रायबरेली में से उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। दोनों ही सीटें गांधी परिवार का गढ़ भी रही हैं। ऐसे में स्थानीय नेताओं की नाराजगी से बचने और गांधी परिवार की साख को बचाने के लिए प्रियंका गांधी को रिजर्व के तौर पर रखा गया है।

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प्रियंका गांधी

Photo : Twitter

Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण के लिए नामांकन खत्म होने से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने यूपी में अपनी दो सबसे मजबूत सीटों अमेठी व रायबरेली में प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। दोनों ही सीटों पर नए चेहरों को उतारा गया है। राहुल गांधी जहां रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे तो गांधी परिवार के करीबी किशोरी लाल शर्मा को अमेठी से उतारा गया है। जबकि, अमेठी से प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की चर्चा थी। हालांकि, लिस्ट में उनका नाम नहीं होने से कई तरह की अटकलों का बाजार गर्म है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व महासचिव जयराम रमेश के प्रियंका गांधी के उपचुनाव लड़ने संबंधी बयान ने नए समीकरणों की ओर चर्चा का रुख मोड़ दिया है।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

जयराम रमेश ने कहा है कि राहुल गांधी जी की रायबरेली से चुनाव लड़ने की खबर पर बहुत सारे लोगों की बहुत सारी राय हैं, लेकिन वह राजनीति और शतरंज के मंजे हुए खिलाड़ी हैं और सोच समझ कर दांव चलते हैं। ऐसा निर्णय पार्टी के नेतृत्व ने बहुत विचार विमर्श करके बड़ी रणनीति के तहत लिया है। इस निर्णय से BJP, उनके समर्थक और चापलूस धराशायी हो गये हैं। बेचारे स्वयंभू चाणक्य जो परंपरागत सीट की बात करते थे, उनको समझ नहीं आ रहा अब क्या करें? जयराम रमेश ने आगे कहा है कि प्रियंका जी धुआंधार प्रचार कर रही हैं और अकेली नरेंद्र मोदी के हर झूठ का जवाब सच से देकर उनकी बोलती बंद कर रही हैं। इसीलिए यह ज़रूरी था कि उन्हें सिर्फ़ अपने चुनाव क्षेत्र तक सीमित ना रखा जाए। प्रियंका जी तो कोई भी उपचुनाव लड़कर सदन पहुंच जाएंगी। उन्होंने कहा, शतरंज की कुछ चालें बाक़ी हैं, थोड़ा इंतज़ार कीजिए।

इस बयान के मायने क्या?

एक बात तो साफ है कि राहुल गांधी अगर चुनाव जीतते हैं तो वायनाड और रायबरेली में से उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। दोनों ही सीटें गांधी परिवार का गढ़ भी रही हैं। ऐसे में अगर राहुल गांधी किसी एक सीट का चुनाव करते हैं तो स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी उठानी पड़ सकती है। चुनाव जीतने के बाद रायबरेली छोड़ने से उत्तर भारत में गांधी परिवार की साख को झटका लगेगा, तो वहीं वायनाड छोड़ने का नुकसान केरल के आगामी विधानसभा चुनाव में हो सकता है। इस नुकसान की भरपाई करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी को रिजर्व में रखा है। जयराम रमेश के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि राहुल गांधी के एक सीट छोड़ने पर वहां प्रियंका गांधी को उपचुनाव लड़ाया जा सकता है। इससे गांधी परिवार की साख भी बनी रहेगी और चुनाव में भी उसे कोई नुकसान नहीं होगा।

पीएम मोदी पर भी बोला हमला

जयराम रमेश ने इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, रायबरेली सिर्फ़ सोनिया जी की नहीं, ख़ुद इंदिरा गांधी जी की सीट रही है। यह विरासत नहीं ज़िम्मेदारी है, कर्तव्य है। रही बात गांधी परिवार के गढ़ की, तो अमेठी-रायबरेली ही नहीं, उत्तर से दक्षिण तक पूरा देश गांधी परिवार का गढ़ है। राहुल गांधी तो तीन बार उत्तरप्रदेश से और एक बार केरल से सांसद बन गये, लेकिन मोदी जी विंध्याचल से नीचे जाकर चुनाव लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाये? एक बात और साफ़ है कि कांग्रेस परिवार लाखों कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं उनकी आकांक्षाओं का परिवार है। कांग्रेस का एक साधारण कार्यकर्ता ही बड़े बड़ों पर भारी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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