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शरद पवार ने लगाया बेहद संजीदा आरोप, पुलिस वाहनों के इस्तेमाल से सत्तारूढ़ दलों को पहुंचाया जा रहा फायदा

Maharashtra Chunav: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बदस्तूर जारी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के मुखिया शरद पवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए ये दावा किया है कि सत्तारूढ़ दलों को फायदा पहुंचाने के लिए पुलिस वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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शरद पवार।

Sharad Pawar's Big Claim: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दलों के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए पुलिस वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार ने यहां गोविंदबाग में अपने आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस मामले पर सार्वजनिक तरीके से और बात करना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि इससे उन अधिकारियों को ठेस पहुंचेगी, जिन्होंने यह जानकारी उनसे साझा की है।

अपने पोतों के साथ शरद पवार ने की मीडिया से बातचीत

शरद पवार के पोते और पार्टी के उम्मीदवार युगेंद्र पवार (बारामती) और रोहित पवार (करजात-जामखेड़) भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे। पवार परिवार हर साल गोविंदबाग में मिलता है, लेकिन इस साल उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनका परिवार इसमें शामिल नहीं हुआ।

सत्तारूढ़ दलों के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने का आरोप

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दावा किया, 'हमें कई जिलों से, अधिकारियों से पता चला है कि सत्तारूढ़ दलों के उम्मीदवारों को चुनाव के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है, पुलिस वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। पुलिस विभाग के अधिकारियों ने भी ऐसा कहा है।' पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार की खासियत यह है कि इसके नेता विमान के जरिए ए और बी फॉर्म भेजते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वह ए और बी फॉर्म का जिक्र कर रहे थे जो किसी भी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य हैं। दरअसल खबरें आई थीं कि शिंदे ने विमान का उपयोग करके ए और बी फॉर्म भेजे थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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