INDIA Meet in Delhi: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2023 में तीन जगह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के बाद विपक्षी एकता को तगड़ा झटका लगा है। यही वजह है कि इंडिया गठबंधन के तहत आने वाले कई दलों का मनोबल और एक-दूसरे के प्रति गर्मजोशी वाला रवैया कम होता नजर आया। ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार (छह दिसंबर, 2023) को होने वाली इंडिया ब्लॉक के महामंथन से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी किनारा कर लिया है।
सूत्रों के हवाले से मंगलवार (पांच दिसंबर, 2023) को कुछ टीवी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि बिहार सीएम खुद इस बैठक में हिस्सा लेने नहीं आएंगे। हालांकि, उनकी पार्टी की तरफ से बैठक में लल्लन सिंह और संजय झा शामिल होंगे, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव (फिलहाल डिप्टी सीएम) शरीक होंगे।
जेडीयू के सीनियर नेता से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मीटिंग में हिस्सा लेने से असमर्थता जताई थी। सोमवार को टीएमसी सुप्रीमो ने सूबे के उत्तरी क्षेत्र में पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला दिया था। उन्होंने बताया था कि वह छह दिसंबर को इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगी। बनर्जी ने पत्रकारों को बताया था, ‘‘मैं छह दिसंबर से 11 दिसंबर तक उत्तर बंगाल का दौरा करूंगी। मुझे छह दिसंबर को बैठक की तारीख के बारे में जानकारी नहीं थी। अगर मुझे बैठक की तारीख के बारे में पहले से पता होता तो मैं अपनी यात्रा को पुनर्निर्धारित कर सकती थी।’’
बनर्जी ने यह भी कहा था कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के नतीजों का विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन के भविष्य पर असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि यह कांग्रेस की निजी हार है। हालांकि, दीदी भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ ‘इंडिया’ की पिछली बैठकों में लगातार हिस्सा लेती आई हैं।
इस बीच, मंगलवार सुबह समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के भी इस बड़ी मीटिंग में शामिल न होने की खबर आई। समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को इस बारे में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने मंगलवार को बताया कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का बुधवार को दिल्ली में होने वाली विपक्ष के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) की बैठक में जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है।
ऐसा माना जाता है कि यूपी के पूर्व सीएम का मन तब खट्टा हुआ था, जब कांग्रेस ने म.प्र के चुनाव में गठबंधन धर्म नहीं निभाया था। सूत्रों की मानें तो सपा की ओर से तब सात सीट मांगी गई थीं। सियासी जानकारों और विश्लेषकों की मानें तो हालिया चुनावी नतीजों के बाद भले ही विपक्ष अपनी एकता बरकरार रखने का दावा कर रहा हो, मगर क्षेत्रीय दलों का मनोबल जरूर गिरा है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बड़े नेताओं के शरीक न होने से जुड़े सवाल पर कहा, "हो सकता है कि इन नेताओं के कार्यक्रम पहले से तय हों। समय के चलते शेड्यूल मैच नहीं हो पा रहा होगा। वे नहीं जाएंगे तो उनके दल की ओर से कोई और मौजूदगी दर्ज कराएगा।"

Narendra Modi on Opposition
उधर, मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक्स" हैंडल से कहा गया- वे अपने अहंकार, झूठ, निराशावाद और अज्ञानता से खुश रहें। लेकिन उनके विभाजनकारी एजेंडे से सावधान रहें। 70 साल पुरानी आदत इतनी आसानी से नहीं जा सकती है। साथ ही लोगों की समझदारी ऐसी है कि उन्हें आगे कई और मंदी के लिए तैयार रहना होगा।
दरअसल, रविवार को सूत्रों की ओर से बताया गया था कि ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए छह दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठक करेंगे। बुधवार शाम को संभावित बैठक के दौरान नेताओं की ओर से 2024 के आम चुनाव से पहले सामूहिक रूप से भाजपा का मुकाबला करने की अपनी योजना पर विचार-विमर्श करने और उसे अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
