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रीवा में पिता की भूख हड़ताल पर पुलिस का एक्शन, बेटी कल्पना मिश्रा के लिए इंसाफ मांग रहे पिता को अस्पताल में भर्ती कराया

मध्य प्रदेश के रीवा में सिरमौर चौराहे पर 13 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे मृतका कल्पना मिश्रा के पिता रामशरण मिश्रा को पुलिस ने जबरन धरनास्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया है। कल्पना की संजय गांधी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान मौत हो गई थी।

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बेटी कल्पना मिश्रा के लिए इंसाफ मांग रहे पिता को अस्पताल में भर्ती कराया

रीवा के सिरमौर चौराहे पर बीते 15 दिनों से अपनी बेटी कल्पना मिश्रा के लिए न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे पिता राम शिरोमणि मिश्रा को पुलिस और प्रशासन की टीम ने जबरन उठा लिया है। बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पुलिस उन्हें रीवा के जिला चिकित्सालय ले गई, जहां उन्हें भर्ती कराया गया है।इसके साथ ही धरनास्थल पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया और टेंट-पंडाल को पूरी तरह से हटा दिया है।

दरअसल, यह पूरा मामला रीवा के शासकीय गांधी स्मारक अस्पताल का है, जहां कथित डॉक्टरी लापरवाही के कारण प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों के भारी आक्रोश और विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने डीन और अधीक्षक को पद से हटा दिया था, जबकि दो डॉक्टरों और संबंधित नर्सों को निलंबित कर दिया गया था।

'दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए'

हालांकि, परिजन इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। मृतका के पिता राम शिरोमणि मिश्रा की मांग है कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पद से इस्तीफा दें। इसी मांग को लेकर वे सिरमौर चौराहे पर अनशन पर बैठ गए थे, जिसे कांग्रेस समेत कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा था।

15वें दिन बुधवार को भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम अचानक धरनास्थल पहुंची। पुलिस ने स्वास्थ्य बिगड़ने का तर्क देते हुए राम शिरोमणि मिश्रा को जबरन गाड़ी में बिठाया और अस्पताल पहुंचा दिया। धरनास्थल को पूरी तरह खाली करा दिया गया है।

प्रशासन का क्या कहना है

मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह धरना बिना किसी वैध अनुमति के आयोजित किया जा रहा था। सिरमौर चौराहा एक व्यस्त मार्ग है, जहां अनशन के कारण यातायात बाधित हो रहा था और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। साथ ही अनशनकारी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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