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Nuh Vidhan Sabha Chunav 2024, नूंह विधानसभा सीट: नूंह में कितना कारगर होगा BJP का हिंदू कार्ड? इस सीट पर आज तक नहीं जीता कोई हिंदू कैंडिडेट

Nuh Vidhan Sabha Seat Result 2024 हरियाणा, नूंह विधानसभा सीट परिणाम, Constituency, History, Party, Key Candidates, History in Hindi: हरियाणा की नूंह विधानसभा सीट उनमें शुमार है, जहां से आजतक कोई हिंदू उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका है। शायद यही वजह है कि पार्टियां यहां पर मुस्लिम चेहरे पर ही भरोसा जताती हैं।

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नूंह विधानसभा चुनाव।

Photo : Twitter

Nuh Haryana Vidhan Sabha Chunav 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यहां का चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण होने वाला है। एक तरफ बीजेपी यहां केंद्र की तरह हैट्रिक लगाने की तैयारी में है तो दूसरी तरफ कांग्रेस भी कड़ी टक्कर दे रही है। इस बीच हरियाणा की हॉट सीटों में शुमार मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट नूंह में भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू कार्ड खेला है। पार्टी ने यहां नायब सिंह सैनी सरकार में मंत्री संजय सिंह को टिकट दिया है। संजय सिंह नूंह से सटे सोहना विधानसभा सीट से विधायक हैं और हरियाणा में हिंदुत्व का बड़ा चेहरा माने जाते हैं।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने यहां दिग्गज नेता और मौजूदा विधायक आफताब अहमद को एक बार फिर से प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार जाकिर हुसैन को करीब 4 हजार वोटों से हराया था। वहीं, आम आदमी पार्टी ने पूर्व राज्यपाल अखलाक-उर-रहमान किदवई की पोती राबिया किदवई को टिकट दिया है। राबिया इस सीट से खड़ी होने वाली पहली महिला उम्मीदवार हैं। ऐसे में यहां का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है।

आज तक नहीं जीता कोई हिंदू कैंडीडेट

हरियाणा की नूंह विधानसभा सीट उनमें शुमार है, जहां से आजतक कोई हिंदू उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका है। शायद यही वजह है कि पार्टियां यहां पर मुस्लिम चेहरे पर ही भरोसा जताती हैं। हालांकि, भाजपा ने इस बार यहां हिंदू कार्ड खेला है। सैनी सरकार में मंत्री संजय सिंह इस सीट से 2009 और 2014 में भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

ऐसा है सीट का इतिहास

इस सीट के इतिहास को देखें तो 1976 में यहां निर्दलीय प्रत्यशी चौधरी रहीम खान ने जीत हासिल की थी। वह यहां से तीन बाद विधायक बने। इसे बाद यह सीट मुस्लिम उम्मीदवारों के पास ही रही। 2009 की बात करें तो इस सीट से कांग्रेस के आफदाब अहमद ने जीत हासिल की थी, हालांकि, 2014 में नूंह निर्वाचन क्षेत्र इनेलो पार्टी के चौधरी जाकिर हुसैन के पास चला गया। 2019 में कांग्रेस ने फिर से सीट पर कब्जा जमा लिया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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