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MP Election: मध्य प्रदेश में बागी बने BJP-CONG के लिए सिरदर्द, दोहरा सकता है 2018 का इतिहास

  • Edited by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Oct 22, 2023, 04:24 PM IST

MP Election: राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए 17 नवंबर को एक चरण में मतदान होना है। राज्य में सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। दोनों ही राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन में भारी मशक्कत के दौर से गुजरना पड़ रहा है।

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मध्य प्रदेश में बागी बिगाड़ेंगे खेल

MP Election: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में बागी भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। दोनों ही पार्टियों में टिकट बंटवारे के बाद बगावत दिखने को मिल रहा है। कहां पार्टी ऑफिस पर हमला हो रहा है तो कहीं निर्दलीय उतरने की तैयारी। बीजेपी में तो पांचवीं लिस्ट पर ऐसा बवाल मचा है कि जबलपुर में केंद्रीय भूपेंद्र यादव के साथ धक्का मुक्की हो गई। सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट कर दी। हाल ये हुआ कि सुरक्षाकर्मी पिस्तौल निकालने लगा।

टिकट बंटवारे के साथ ही बवाल

राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए 17 नवंबर को एक चरण में मतदान होना है। राज्य में सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। दोनों ही राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन में भारी मशक्कत के दौर से गुजरना पड़ रहा है। टिकट मिलने और काटने से कई इलाकों में असंतोष भी उभर रहा है और नाराज नेता पार्टियां छोड़कर दूसरे दल का दामन थामने में लगे हैं तो वहीं विरोध प्रदर्शन करने के मामले में पीछे नहीं है।

कांग्रेस ने बदले 3 उम्मीदवार

कांग्रेस अब तक 229 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है और इसके बाद लगभग दो दर्जन स्थानों से विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही है। इसी का नतीजा रहा है कि पार्टी को तीन स्थान दतिया, पिछोर व गोटेगांव से अपने उम्मीदवारों को बदलने तक पड़ गया। बगावती नेताओं के समर्थक विधानसभा क्षेत्र से लेकर भोपाल तक अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। बड़ी संख्या में पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है और कई ने तो पार्टी तक छोड़ दी है।

भाजपा में भी बगावत

भाजपा ने भी जिन उम्मीदवारों के टिकट काटे हैं और दलबदलुओं को उम्मीदवार बनाया है उसको लेकर कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। पार्टी से कई नेताओं ने इस्तीफा भी दिया और वर्तमान के दो विधायक शिवपुरी के कोलारस से वीरेंद्र रघुवंशी और मैहर के नारायण त्रिपाठी ने तो पार्टी को ही अलविदा कह दिया। ये दोनों ऐसे विधायक हैं जिन्हें कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद थी, मगर निराशा हाथ लगी।

मनाने में जुटे नेता

दोनों ही राजनीतिक दल बढ़ते असंतोष से चिंतित हैं और उन्होंने नाराज नेताओं को बनाने की जिम्मेदारी अपने-अपने दल के वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। वे नाराज नेताओं को भरेासा दिला रहे हैं कि राज्य में पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें महत्व दिया जाएगा, साथ ही कई नेताओं को तो संगठन में समायोजित किया जा रहा है।

2018 वाला 'खेल'

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के इस बार के चुनाव कांटे के मुकाबले के हैं। सरकार किसी भी दल की बन सकती है और यही कारण है कि तमाम दावेदार चुनाव मैदान में उतरकर अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि राजनेताओं को लगता है कि अगर वह चुनाव जीत जाते हैं तो उनकी किस्मत बदल जाएगी। जिन नेताओं को राजनीतिक दल टिकट नहीं दे रहे हैं वे बगावत कर सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी का दामन थाम रहे हैं। छोटे दलों की तरफ राजनेताओं का रुझान इसलिए भी है कि अगर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में से किसी को भी बहुमत नहीं मिलता है, वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव जैसी स्थिति बनती है, तो सत्ता की चाबी उनके हाथ में आ जाएगी।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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