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TMC संसदीय दल के नेता चुनी गईं ममता बनर्जी, जानें किस बात के लिए दीदी ने मांगी माफी

TMC Plan for Delhi: ममता बनर्जी ने कहा, 'मुझे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल का अध्यक्ष, पार्टी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को लोकसभा में पार्टी का नेता, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में उपनेता, कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) चुना गया। ममता ने इस मौके पर माफी भी मांगी।

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ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल।

Photo : Times Now Digital

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसदों के साथ बैठक की। इस मौके पर लोकसभा में पार्टी की रणनीति पर की चर्चा की गई। साथ ही पार्टी संसदीय दल का नेता, लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक पर फैसला हुआ। ममता ने खुद इसके बारे में जानकारी साझा की है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा को सरकार बनाने की बधाई देने से इनकार कर दिया है।

टीएमसी संसदीय दल की नेता चुनी गईं ममता

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, 'मुझे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल का अध्यक्ष, पार्टी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को लोकसभा में पार्टी का नेता, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में उपनेता, कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक(चीफ व्हिप) चुना गया। राज्यसभा में TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को पार्टी का नेता चुना गया, सागरिका घोष को उपनेता और नदीमुल हक को मुख्य सचेतक(चीफ व्हिप) चुना गया है।

ममता ने किस बात के लिए मांग ली माफी?

ममता ने कहा कि 'मैं माफी चाहती हूं, लेकिन गैर संवैधानिक, गैर कानूनी पार्टी को सरकार बनाने के लिए मैं शुभकामनाएं नहीं दे सकती हूं। मेरी शुभकामना देश के लिए रहेगी, जो भी सांसद हैं उनसे कहूंगी कि आप अपनी पार्टी को मजबूत बनाए, हम आपकी पार्टी नहीं तोड़ेंगे लेकिन आपकी पार्टी में अंदर से ही टूट होगी, आपके पार्टी में लोग खुश नहीं हैं।'

ममता ने पार्टी के सांसदों को दी बधाई

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ शनिवार को बैठक की तथा लोकसभा में पार्टी की रणनीति पर चर्चा की। तृणमूल कांग्रेस नेताओं की यह बैठक शाम साढ़े चार बजे शुरू हुई थी। बैठक की शुरुआत में, ममता ने पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों, विशेष रूप से उन सांसदों को बधाई दी जो पहली बार चुने गए हैं जिनमें युसूफ पठान, रचना बनर्जी, मिताली बाग, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया शामिल हैं।

29 लोकसभा सीट पर TMC ने हासिल की जीत

तृणमूल ने बंगाल में अपना वर्चस्व कायम रखा है और पार्टी ने प्रदेश की 42 में से 29 लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है। राज्य में, मुख्य विपक्षी दल भाजपा की सीट संख्या घट कर 12 रह गई, जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट पर जीत मिली। बैठक में पार्टी के लोकसभा सदस्यों के अलावा राज्यसभा सदस्य और जिला अध्यक्षों ने हिस्सा लिया।

पार्टी के एक नेता ने इससे पहले बताया था, 'बैठक के दौरान, लोकसभा में पार्टी की भूमिका और रणनीति पर चर्चा की जाएगी। पार्टी यह भी तय कर सकती है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस का नेता कौन होगा।' पिछली लोकसभा में भी 75 वर्षीय तृणमूल सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता थे। बंद्योपाध्याय ने लगातार चौथी बार कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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