INDIA Alliance Seat Sharing: कांग्रेस के खाते में तीन सीटे आ रही है लेकिन इसमें कांग्रेस अध्यक्ष ख़ासतौर से आरक्षित सीट नॉर्थ वेस्ट चाहते हैं वहीं इसके अलावा चाँदनी चौक , नार्थ ईस्ट और ईस्ट दिल्ली पर कांग्रेस की आम आदमी पार्टी से बात चल रही है। इन तीनों सीटों पर 2019 के लोक सभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत सबसे ज़्यादा था। जेपी अग्रवाल , शीला दीक्षित और अरविन्दर लवली इन सीटों पर लड़े थे ।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या गुजरात की भरूच सीट को लेकर है । कांग्रेस का बड़ा तबक़ा यह मानता है की अहमद पटेल की कर्मभूमि रही भरूच सीट को आप को देना बड़ी गलती होगी । आदिवासी बाहुल्य इलाक़े में आम आदमी अपने ट्राइबल विधायक चैतर वसावा को लड़ाना चाहती है जनवरी में अरविंद केजरीवाल ने इसका एलान भी कर दिया था । चैतर आदिवासियों के अच्छे नेता माने जाते हैं और अभी एक मामले में जेल में है। कांग्रेस ये नहीं चाहती हैं कि भरूच आम आदमी पार्टी को दे दी जाए क्योंकि इससे सौराष्ट्र में आदिवासियों के पार्टी से चटकने का डर है।
इन दोनों मुद्दों पर आम आदमी और कांग्रेस में बातचीत चल रही है..सूत्रों के मुताबिक़ कि एक दो दिन में फ़ैसला हो जायेगा।
TMC के साथ सीट शेयरिंग पर बात कहाँ अटकी?
ममता के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद ये माना जा रहा था की, कांग्रेस के साथ TMC का गठबंधन ख़त्म हो गया लेकिन कांग्रेस के उच्च सूत्रों की माने तो TMC के साथ कांग्रेस की बातचीत चल रही है। सूत्रों का दावा है TMC मेघालय में 1 सीट और असम 2 सीट माँग रही है। जिसपर चर्चा जारी है वही बंगाल में भी कांग्रेस सम्माजनक सीट की उम्मीद TMC से लगाए बैठी है।
महाराष्ट्र में सबकुछ तय फिर किस बात का है इंतज़ार?
INDIA एलायंस पार्टियो के साथ सीट शेयरिंग में सबसे अच्छे तरीक़े और कम समय में महाराष्ट्र में चर्चा ख़त्म हुई थी, सूत्रों की माने तो महाराष्ट्र में कांग्रेस:उद्धव:शरद पवार के बीच 16:16:16 का फार्मूला तय हुआ था, जिसमे प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी को तीनों हो पार्टी अपने-अपने कोटे से 1:1:1 सीट देते लेकिन यहाँ भी पेंच इस बात पर फँसी हुई है की प्रकाश अंबेडकर अब 5 सीटों की दावेदारी कर रहे हैं।
NC के साथ कहाँ फँसा है पेंच?
कांग्रेस की नेशनल एलायंस कमिटी नेशनल कॉन्फ़्रेंस (NC) से बात कर रही है. NC और कांग्रेस के बीच 3:3 के फ़ॉर्मूले पर चर्चा हो रही है,आज कमिटी इस बाबत उमर अब्दुल्ला से चर्चा करेगा। इस चर्चा में सबसे बड़ी चुनौती 3:3 के फ़ार्मूले में पीडीपी को किस तरह शामिल किया जाए ये रहेगा।
