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मुस्लिमों पर मनमोहन सिंह ने क्या कहा था? वो बयान जिसको PM Modi ने बनाया चुनावी मुद्दा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 22, 2024, 01:38 PM IST

PM Modi remarks on Manmohan Singh Statement: पीएम मोदी के भाषण के बाद मनमोहन सिंह का 9 दिसंबर, 2006 में दिया गया बयान चर्चा में आ गया है। उन्होंने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना और विकास पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद की 52वीं बैठक को संबोधित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया है कि मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।

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पीएम मोदी- मनमोहन सिंह

Photo : BCCL

PM Modi remarks on Manmohan Singh Statement: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान ने देश की राजनीति में आग लगा दी है। उन्होंने रविवार को राजस्थान के बांसवाड़ा में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो आपकी संपत्ति मुसलमानों को बांट देगी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के 2006 में दिए गए एक बयान का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।

उनके इस बयान पर अब विपक्ष आगबबूला है और पीएम मोदी की आलोचना कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि पहले चरण के मतदान में निराशा हाथ लगने के बाद नरेंद्र मोदी के झूठ का स्तर इतना गिर गया है कि घबरा कर वह अब जनता को मुद्दों से भटकाना चाहते हैं। देश अब अपने मुद्दों पर वोट करेगा, अपने रोज़गार, अपने परिवार और अपने भविष्य के लिए वोट करेगा। भारत भटकेगा नहीं।

क्या मनमोहन सिंह ने सच में ऐसा कहा?

पीएम मोदी के भाषण के बाद मनमोहन सिंह का 9 दिसंबर, 2006 में दिया गया बयान चर्चा में आ गया है। उन्होंने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना और विकास पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद की 52वीं बैठक को संबोधित किया था। मनमोहन सिंह ने कहा था, "मेरा मानना है कि हमारी सामूहिक प्राथमिकताएं बहुत स्पष्ट हैं। कृषि, सिंचाई एवं जल संसाधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों, महिलाओं एवं बच्चों के उत्थान के लिए कार्यक्रम हमारी प्राथमिकताएं हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए योजनाओं को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। हमें ये सुनिश्चित करने के लिए नई योजनाएं बनानी होंगी कि अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिमों को विकास में समान भागीदारी मिले। संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का होना चाहिए।

हंगामे के बाद PMO ने जारी किया था स्पष्टीकरण

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस बयान के बाद काफी हंगामा हुआ था और विपक्ष ने उनपर तुष्टीकरण का आरोप लगाया था। इसके बाद अगले ही दिन मनमोहन सिंह के पीएमओ कार्यालय की ओर से एक स्पष्टीकरण भी जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री ने अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण की बात कही है, लेकिन इसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

अब पीएम मोदी का पूरा बयान

पीएम मोदी ने राजस्थान में कहा "ये अर्बन नक्सल वाली सोच वाले लोग मेरी माताओ- बहनों का मंगलसूत्र भी बचने नहीं देंगे। इस हद तक चले जाएंगे। ये कांग्रेस का घोषणापत्र कह रहा है कि वे माताओं-बहनों के सोने का हिसाब करेंगे, उसकी जानकारी लेंगे और फिर उस संपत्ति को बांट देंगे। उनको बांटेगे जिनके बारे में मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था कि संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। पहले जब उनकी सरकार थी, उन्होंने कहा था की देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब ये संपत्ति इकट्ठी करके किसको बांटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे हैं उनको बांटेंगे। घुसपैठियों को बांटेंगे। आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा?

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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