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Lok Sabha Election: चुनाव से पहले बदला दक्षिण का समीकरण, DMK के साथ गठबंधन में शामिल हुई कमल हासन की पार्टी

Tamil Nadu Politics: कमल हासन की पार्टी द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई है। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने एक दिन पहले ही अपने सहयोगी दलों वीसीके और एमडीएमके के साथ सीट-बंटवारा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया तथा दोनों पार्टियों के साथ 2019 के समझौते को दोहराया था।

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एम के स्टालिन और कमल हासन के बीच समझौता।

Photo : Times Now Digital

Election News: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले दक्षिण का सियासी समीकरण लगातार बदल रहा है। एक ओर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की एनडीए गठबंधन में वापसी लगभग तय हो गई है। वहीं तमिलनाडु में द्रमुक लगातार खुद को मजबूत करने में जुटी हुई है। बीते शुक्रवार को ही अपने सहयोगी दलों वीसीके और एमडीएमके के साथ सीट बंटवारे को डीएमके ने अंतिम रूप दिया और अब स्टालिन की पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन में अभिनेता कमल हासन के नेतृत्व वाली पार्टी मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) भी शामिल हो गई है।

द्रमुक संग गठबंधन में शामिल हुई कमल हासन की पार्टी

अभिनेता कमल हासन के नेतृत्व वाली पार्टी मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नीत गठबंधन में शनिवार को शामिल हो गई और उसे आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपना समर्थन दिया। हासन की पार्टी को संसदीय चुनाव लड़ने के लिए सीटें आवंटित किए जा सकने की अटकलों के बीच द्रमुक ने एमएनएम को 2025 के राज्यसभा चुनाव के लिए एक सीट आवंटित की।

कमल हासन ने बोला किसी पद के लिए शामिल नहीं हुए

हासन और सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने यहां द्रमुक मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में समझौते को अंतिम रूप दिया। हासन ने समझौता करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने गठबंधन में शामिल होने का कदम किसी पद के लिए नहीं, बल्कि देश की खातिर उठाया। उन्होंने गठबंधन को अपनी पार्टी का ‘पूर्ण समर्थन’ दिया। दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुसार, एमएनएम पार्टी तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीट और एकमात्र पुडुचेरी क्षेत्र में प्रचार अभियान संबंधी कार्य करेगी।

चुनाव को लेकर डीएमके ने सेट कर लिया है फॉर्मूला

इससे पहले द्रमुक ने शुक्रवार को सहयोगी दलों वीसीके और एमडीएमके के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया और दोनों पार्टियों के साथ 2019 के समझौते को दोहराया था। विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) को दो सीटें आवंटित की गईं। दोनों आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है। वाइको के नेतृत्व वाली मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) को गठबंधन के प्रमुख भागीदार द्वारा एक सीट दी गई। साल 2019 में एमडीएमके को एक राज्यसभा सीट भी दी गई थी।

सीट बंटवारे पर कांग्रेस के साथ समझौता होना बाकी

द्रमुक ने अब तक वीसीके और एमडीएमके के अलावा सहयोगी दलों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और कोंगुनाडु मक्कल देसिया कच्ची (केएमडीके) के साथ सीट-बंटवारे के समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। कांग्रेस के साथ उसका समझौता होना अभी बाकी है। द्रमुक तमिलनाडु में बहुदलीय धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) का नेतृत्व करती है और उसने 2019 के चुनावों में राज्य की 39 लोकसभा सीट में से 38 पर जीत हासिल की थी। द्रमुक ने पुडुचेरी संसदीय सीट पर भी जीत हासिल की थी।

दक्षिण में खुद को मजबूत करने में जुटी भाजपा

वहीं लोकसभा चुनाव से पहले आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की एनडीए गठबंधन में वापसी लगभग तय हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर सहमति बन गई है। अमित शाह के आवास पर चल रही बैठक अब खत्म हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जल्द ही औपचारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान कर सकते हैं।

भाजपा आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ेगी। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर अमित शाह, जेपी नड्डा, चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के बीच हुई बैठक में सीट बंटवारे पर सहमति हो जाने के बाद नायडू की एनडीए गठबंधन में वापसी का रास्ता भी साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि ये तीनों दल एनडीए गठबंधन के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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